उत्तर प्रदेश

Kanpur Ursala Hospital में DM की बड़ी कार्रवाई: 22 डॉक्टर समेत 32 कर्मचारी गायब, दो दलाल गिरफ्तार

Kanpur के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में मंगलवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब जिलाधिकारी Jitendra Pratap Singh ने उर्सला सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। सुबह करीब 9:30 बजे भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पहुंचे डीएम ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत देखी तो कई गंभीर लापरवाहियां सामने आ गईं।

निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि ड्यूटी समय के बावजूद 22 डॉक्टर और 10 अन्य कर्मचारी अपनी सीटों से नदारद मिले। अचानक हुई इस कार्रवाई से अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।


ड्यूटी टाइम में गायब मिले डॉक्टर, एक दिन का वेतन काटने के आदेश

निरीक्षण के दौरान डीएम ने अलग-अलग विभागों का दौरा किया और उपस्थिति पंजिका की जांच की। इस दौरान कई डॉक्टरों और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी सामने आई।

जिलाधिकारी ने इस लापरवाही को बेहद गंभीर मानते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन स्थापित करने के उद्देश्य से की गई है।

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल के निदेशक B. Paul स्वयं भी डीएम के पहुंचने के लगभग आधे घंटे बाद अस्पताल पहुंचे। इसे लेकर भी प्रशासन ने नाराजगी जताई।


फर्जी उपस्थिति का मामला आया सामने, हस्ताक्षर दर्ज लेकिन डॉक्टर गायब

निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। ओपीडी में तैनात सर्जन Prashant Mishra के हस्ताक्षर उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज मिले, लेकिन जब डीएम उनके चैंबर पहुंचे तो वह वहां मौजूद नहीं थे।

जिलाधिकारी ने इसे गंभीर अनियमितता और संभावित धोखाधड़ी मानते हुए मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को हस्ताक्षरों की सत्यता और पूरे रिकॉर्ड की जांच करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में फर्जी उपस्थिति का मामला सामने आना प्रशासन के लिए बड़ा सवाल खड़ा करता है।


अस्पताल में सक्रिय दलाल गिरोह पर कार्रवाई, दो संदिग्ध गिरफ्तार

निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में मरीजों को गुमराह कर निजी क्लीनिक और बाहरी जांच केंद्रों की ओर भेजने वाले दलालों पर भी बड़ी कार्रवाई की गई।

मौके से दो संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान विवेक तिवारी निवासी महोली गांव, नर्वल तहसील और हैदर अली निवासी चमनगंज के रूप में हुई है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दलालों के संबंध अस्पताल के किन कर्मचारियों या बाहरी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में सक्रिय दलाली नेटवर्क गरीब मरीजों के शोषण का बड़ा कारण बनता जा रहा है।


बाहर की दवा लिखने पर डीएम की सख्त चेतावनी

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रशासन को साफ निर्देश दिए कि गरीब मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने की शिकायत बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने सीएमएस को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई डॉक्टर कमीशन के लिए मरीजों को बाहर की फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मजबूर करता पाया गया, तो उसके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराई जा सकती है।

डीएम ने कहा कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, न कि उन्हें निजी नेटवर्क के जरिए आर्थिक बोझ में डालना।


अनुपस्थित कर्मचारियों की लंबी सूची से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए गए डॉक्टरों और कर्मचारियों की सूची काफी लंबी रही। इनमें कई वरिष्ठ डॉक्टरों के नाम भी शामिल हैं।

अनुपस्थित पाए गए प्रमुख डॉक्टरों में R.K. Agrawal, Priti Mehta, Rahul Verma, Ashish Kumar, Altamas Khan और कई अन्य शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

उर्सला अस्पताल में सामने आई लापरवाहियों के बाद सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, दलालों का सक्रिय नेटवर्क और मरीजों को बाहर की दवाएं लिखना लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है।

स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक इस तरह की औचक जांचें जरूरी हैं, लेकिन स्थायी सुधार के लिए नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है।


अन्य अस्पतालों में भी बढ़ी बेचैनी, आगे और कार्रवाई के संकेत

डीएम की इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन आने वाले दिनों में अन्य विभागों और अस्पतालों में भी इसी तरह के औचक निरीक्षण कर सकता है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश भी दिए हैं।


कानपुर के उर्सला अस्पताल में जिलाधिकारी की औचक कार्रवाई ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कई गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति, फर्जी उपस्थिति, दलालों की सक्रियता और मरीजों को बाहर की दवा लिखने जैसे मुद्दों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकारी अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

 

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