‘Melody’ से लेकर मूंगा सिल्क साड़ी तक… PM मोदी के शाही तोहफों ने दुनिया को किया मंत्रमुग्ध, मेलोनी समेत कई वैश्विक नेताओं को दिए भारत की संस्कृति से जुड़े खास उपहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दोस्ताना केमिस्ट्री एक बार फिर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए “Melody” मोमेंट ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा, लेकिन इस वायरल वीडियो के पीछे भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े वे शानदार तोहफे भी थे, जिन्हें पीएम मोदी खासतौर पर मेलोनी के लिए भारत से लेकर गए थे।
इटली की प्रधानमंत्री को दिए गए ये उपहार सिर्फ महंगे या खूबसूरत नहीं थे, बल्कि भारत की पारंपरिक कला, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत का प्रतीक भी थे। यही वजह है कि पीएम मोदी के ये तोहफे अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में “सॉफ्ट पावर” के सबसे चर्चित उदाहरणों में गिने जा रहे हैं।
जॉर्जिया मेलोनी को भेंट की गई असम की शाही मूंगा सिल्क साड़ी
प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को असम की प्रसिद्ध मूंगा सिल्क से बनी बेहद शानदार साड़ी उपहार में दी। डार्क रॉयल ब्लू रंग की यह साड़ी सुनहरे धागों से बुनी गई थी, जिसने इसकी खूबसूरती को और भी शाही बना दिया।
मूंगा सिल्क भारत की सबसे दुर्लभ और महंगी रेशमी वस्त्र परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसकी खास बात यह है कि इसे तैयार करने में किसी प्रकार के केमिकल या कृत्रिम डाई का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह पूरी तरह प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार मूंगा सिल्क केवल फैशन नहीं बल्कि भारतीय हस्तकला और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इसकी बनावट इतनी रॉयल मानी जाती है कि यह इटली की लक्जरी टेक्सटाइल परंपराओं से भी मेल खाती है।
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि अगर मेलोनी इस साड़ी को पहनेंगी तो वह किसी रॉयल फैशन आइकन से कम नहीं लगेंगी।
शिरुई लिली स्टोल ने बढ़ाई भारतीय हस्तकला की शान
सिर्फ साड़ी ही नहीं, पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री के लिए मणिपुर की दुर्लभ शिरुई लिली फूल से प्रेरित एक खूबसूरत सिल्क स्टोल भी लेकर गए। सफेद रंग के इस स्टोल की किनारी लाल थी और उस पर हल्के गुलाबी फूलों की डिजाइन बनाई गई थी।
यह डिजाइन शिरुई लिली नामक दुर्लभ फूल से प्रेरित है, जो दुनिया में केवल मणिपुर में ही पाया जाता है। घंटी के आकार का यह फूल अपनी नाजुक बनावट और हल्के गुलाबी-सफेद रंग के लिए प्रसिद्ध है।
यह स्टोल केवल एक फैशन एक्सेसरी नहीं बल्कि पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत और हिमालयी कारीगरी का सुंदर संगम माना जा रहा है।
‘मेलोडी’ वीडियो ने इंटरनेट पर मचाई धूम
पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच “मेलोडी” टॉफी को लेकर हुआ हल्का-फुल्का मजाक सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया। दोनों नेताओं की मुस्कान और सहज बातचीत ने दुनियाभर के लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर मीम्स, रील्स और पोस्ट्स की बाढ़ आ गई। लोगों ने इस दोस्ताना पल को भारत-इटली संबंधों में “ह्यूमन कनेक्शन” का बेहतरीन उदाहरण बताया।
हालांकि इस वायरल पल के पीछे भारत की संस्कृति, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय विशेषताओं को दुनिया तक पहुंचाने की गहरी रणनीति भी दिखाई दी।
FAO डायरेक्टर जनरल को भेंट किए गए हेल्दी मिलेट्स बार
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के डायरेक्टर जनरल को भारत के पारंपरिक मोटे अनाजों से बने हेल्दी मिलेट्स बार भेंट किए।
इन मिलेट्स बार में ज्वार, बाजरा और अन्य ऑर्गेनिक अनाज शामिल थे। यह उपहार भारत के “श्री अन्न” अभियान और पोषणयुक्त खाद्यान्न को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिलेट्स भविष्य के सुपरफूड माने जा रहे हैं क्योंकि इनमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं।
नॉर्वे के राजा के लिए ओडिशा की प्रसिद्ध तारकसी कला
प्रधानमंत्री मोदी जब नॉर्वे पहुंचे तो वहां के राजा हाराल्ड V के लिए विशेष उपहार लेकर गए। पीएम ने उन्हें चांदी से बनी एक शानदार सेलबोट भेंट की, जो ओडिशा के कटक शहर की मशहूर तारकसी कला का बेजोड़ नमूना थी।
तारकसी कला बेहद महीन चांदी की जालीदार नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है और इसे भारत की सबसे खूबसूरत हस्तकलाओं में गिना जाता है। चूंकि नॉर्वे के राजा को नौकायन का विशेष शौक है, इसलिए यह उपहार उनके व्यक्तित्व से भी पूरी तरह जुड़ा हुआ माना गया।
क्राउन प्रिंस के लिए सूर्य-चंद्रमा वाली कलमकारी पेंटिंग
नॉर्वे के क्राउन प्रिंस को पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध कलमकारी कला से बनी पेंटिंग भेंट की। इस पेंटिंग में सूर्य और चंद्रमा के प्रतीकात्मक चित्र बनाए गए थे।
कलमकारी भारत की प्राचीन हस्तचित्र कला है, जिसमें प्राकृतिक रंगों से सूती कपड़े पर हाथ से पेंटिंग की जाती है। सूर्य ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि चंद्रमा शांति और भावनात्मक संतुलन को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पेंटिंग ब्रह्मांड में संतुलन और जीवन के द्वैत स्वरूप को दर्शाने वाला गहरा संदेश देती है।
स्वीडन के प्रधानमंत्री के लिए लोकताक टी और पश्मीना स्टोल
स्वीडन के प्रधानमंत्री को पीएम मोदी ने मणिपुर की प्रसिद्ध लोकताक टी उपहार में दी। यह खास चाय लोकताक झील के आसपास की पहाड़ियों में उगाई जाती है और अपनी शुद्धता व सुगंध के लिए जानी जाती है।
इसके साथ ही उन्हें लद्दाख की पारंपरिक पश्मीना स्टोल भी भेंट की गई। चांगथांगी बकरी के बेहद मुलायम ऊन से तैयार यह स्टोल भारतीय हिमालयी शिल्पकला का शानदार उदाहरण माना जाता है।
UAE के लिए मिथिला का मखाना और गुजरात का केसर आम
संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस के लिए पीएम मोदी बिहार के मिथिला क्षेत्र का प्रसिद्ध मखाना लेकर गए। GI टैग वाला यह मखाना भारत की पारंपरिक खाद्य विरासत का हिस्सा माना जाता है।
वहीं UAE के राष्ट्रपति को मेघालय का खास अनानास और गुजरात का प्रसिद्ध केसर आम भेंट किया गया। केसर आम अपने मीठे स्वाद, खूबसूरत रंग और खुशबू के लिए दुनियाभर में मशहूर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपहारों के जरिए भारत ने अपनी कृषि विविधता और क्षेत्रीय विशेषताओं को वैश्विक मंच पर शानदार तरीके से प्रस्तुत किया।
स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस को मिली गोंड पेंटिंग
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया को मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध गोंड पेंटिंग भेंट की। गोंड कला भारत की सबसे पुरानी जनजातीय कला शैलियों में से एक है।
इस कला में प्रकृति, पशु-पक्षी और जंगलों को बेहद रंगीन और जीवंत तरीके से दर्शाया जाता है। चूंकि स्वीडन पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबिलिटी को बहुत महत्व देता है, इसलिए यह उपहार विशेष रूप से प्रतीकात्मक माना जा रहा है।
भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ बन रहे हैं पीएम मोदी के उपहार
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी के ये उपहार सिर्फ औपचारिक कूटनीतिक भेंट नहीं बल्कि भारत की “सॉफ्ट पावर” का प्रभावशाली प्रदर्शन हैं। इन तोहफों के जरिए भारत अपनी कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, कृषि और पारंपरिक विरासत को वैश्विक नेताओं तक पहुंचा रहा है।
हर उपहार के पीछे किसी न किसी राज्य की पहचान, संस्कृति और लोककला जुड़ी हुई दिखाई देती है। यही वजह है कि ये उपहार केवल वस्तुएं नहीं बल्कि भारत की कहानी बनकर दुनिया के सामने उभर रहे हैं।

