Kanpur में बेटों-बहुओं की बेरहमी! बुजुर्ग मां को घर से निकाला, मारपीट और प्रताड़ना के मामलों ने झकझोरा शहर
News-Desk
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दोनों मामलों में पीड़ित महिलाओं ने अपने बेटे और बहुओं पर मारपीट, गालीगलौज, धमकी और घर से निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कल्याणपुर में बेटे-बहू पर मां को घर से निकालने का आरोप
पहला मामला कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र स्थित आवास विकास-3 इलाके का है। यहां रहने वाली वृद्धा फूलमती ने अपने बेटे सूरज और बहू आरती पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़िता के अनुसार पति के निधन के बाद वह अपने बेटे और बहू के साथ रह रही थीं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे बेटे-बहू का व्यवहार बदलने लगा। पहले गालीगलौज शुरू हुई और बाद में मामला मारपीट तक पहुंच गया।
वृद्धा का आरोप है कि आखिरकार बेटे-बहू ने उन्हें धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया। मजबूरी में उन्हें किराये के मकान में रहना पड़ रहा है।
अपने ही घर से बर्तन लेने पहुंची तो फिर हुई मारपीट
फूलमती के मुताबिक 13 मई की शाम वह अपने घर में रखे कुछ बर्तन लेने पहुंची थीं। आरोप है कि इस दौरान बेटे और बहू ने उन्हें धक्का देकर वहां से भगा दिया।
वृद्धा का कहना है कि मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि उसी रात करीब 10 बजे बेटा और बहू उनके किराये के मकान पर पहुंचे और वहां भी उनके साथ मारपीट की।
पीड़िता ने बताया कि लाठी-डंडों से की गई मारपीट में उन्हें गंभीर चोटें आईं। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद वृद्धा ने कल्याणपुर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट, जांच शुरू
कल्याणपुर इंस्पेक्टर के अनुसार वृद्धा की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बुजुर्गों के साथ बढ़ती घरेलू हिंसा बेहद चिंताजनक है।
कोहना इलाके में 70 वर्षीय महिला ने बहू पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरा मामला कानपुर के कोहना थाना क्षेत्र के पुराना कानपुर इलाके से सामने आया है। यहां रहने वाली 70 वर्षीय गायत्री देवी ने अपनी बहू खुशबू यादव पर मारपीट, जान से मारने की कोशिश और संपत्ति विवाद को लेकर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
बुजुर्ग महिला का कहना है कि वह अपने बेटे रामलखन यादव, बहू और बच्चों के साथ रहती हैं। आरोप है कि बहू संपत्ति पर एकाधिकार चाहती है और इसी वजह से आए दिन विवाद करती रहती है।
‘छाती पर बैठकर मारने की कोशिश की’
गायत्री देवी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 14 अप्रैल को बहू ने उन्हें गिराकर पीटा। उन्होंने दावा किया कि बहू उनकी छाती पर चढ़कर बैठ गई और जान से मारने की कोशिश की।
पीड़िता के मुताबिक शोर सुनकर उनका बेटा मौके पर पहुंचा और किसी तरह उन्हें बचाया। इसके बावजूद प्रताड़ना का सिलसिला जारी रहा।
बुजुर्ग महिला ने कहा कि 12 मई की रात करीब डेढ़ बजे बहू ने घर में जमकर हंगामा किया और घर का सामान बाहर निकालकर आग लगा दी।
सामान जलाने और घर से निकालने का आरोप
पीड़िता के अनुसार बहू ने कमरे में रखे बक्सों से कपड़े और अन्य सामान निकालकर छत पर ले जाकर आग लगा दी। विरोध करने पर गालीगलौज करते हुए धक्का देकर घर से बाहर निकाल दिया और जान से मारने की धमकी दी।
गायत्री देवी का आरोप है कि उन्होंने पहले स्थानीय थाने में शिकायत की थी, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया।
पुलिस कमिश्नर से शिकायत के बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
कोहना थाना प्रभारी प्रतीक सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर खुशबू यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बुजुर्ग महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं और समाज के लिए गंभीर चेतावनी भी हैं।
बढ़ रहे बुजुर्ग उत्पीड़न के मामले, समाज के लिए चिंता का विषय
विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में बुजुर्गों के साथ घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और मानसिक प्रताड़ना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई बुजुर्ग आर्थिक और सामाजिक रूप से परिवार पर निर्भर होते हैं, जिसकी वजह से वे खुलकर शिकायत भी नहीं कर पाते।
समाजशास्त्रियों के अनुसार बदलती पारिवारिक संरचना, संपत्ति विवाद और सामाजिक संवेदनशीलता में कमी ऐसे मामलों की बड़ी वजह बन रही है।
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल
इन घटनाओं के बाद वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि बुजुर्गों के लिए कानूनी सहायता और संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवारों में संवाद, सम्मान और संवेदनशीलता को बढ़ावा दिए बिना ऐसे मामलों पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।

