वैश्विक

UNSC में भारत का पाकिस्तान पर जोरदार प्रहार, ‘नरसंहार का इतिहास रखने वाला देश हमें न सिखाए मानवाधिकार’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने दिखाई दिए। सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आयोजित बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने तीखे शब्दों में जवाब देते हुए पाकिस्तान के इतिहास, मानवाधिकार रिकॉर्ड और सैन्य कार्रवाइयों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने पाकिस्तान को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार, सीमा पार हिंसा और नागरिकों पर अत्याचार से जुड़ा रहा हो, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

UNSC में भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर माहौल गर्म कर दिया और पाकिस्तान के आरोपों का भारत ने तथ्यात्मक और आक्रामक अंदाज में जवाब दिया।


जम्मू-कश्मीर मुद्दा उठाने पर भारत का सख्त जवाब

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बहस चल रही थी। इसी दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया और भारत पर आरोप लगाने की कोशिश की।

इसके जवाब में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने बेहद सख्त शब्दों में पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए करता है और अपनी आंतरिक विफलताओं से दुनिया का ध्यान हटाने की कोशिश करता है।

भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है तथा पाकिस्तान को इस विषय पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।


‘अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए हिंसा का सहारा लेता है पाकिस्तान’

हरीश पर्वथनेनी ने अपने संबोधन में पाकिस्तान की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उसका रिकॉर्ड यह दिखाता है कि वह अपनी घरेलू असफलताओं और राजनीतिक संकटों को छिपाने के लिए हिंसा और आक्रामकता का रास्ता अपनाता रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया अच्छी तरह जानती है कि सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और अस्थिरता फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका क्या रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आतंकवाद और नागरिकों के खिलाफ हिंसा पर दोहरा रवैया न अपनाने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस बयान के जरिए पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि और उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सीधा सवाल उठाया है।


अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया

भारत ने UNSC में पाकिस्तान की कथित सैन्य कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। पर्वथनेनी ने कहा कि इस वर्ष रमजान के दौरान पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में स्थित ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर हवाई हमला किया था।

भारत ने कहा कि यह हमला बेहद चिंताजनक था क्योंकि अस्पताल को किसी भी रूप में सैन्य ठिकाना नहीं माना जा सकता। उन्होंने इसे निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा का गंभीर उदाहरण बताया।

भारत ने अपने बयान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) का हवाला देते हुए कहा कि इस हमले में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए थे।


UNAMA रिपोर्ट का हवाला देकर भारत ने रखे आंकड़े

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि UNAMA की रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई थी जबकि 122 लोग घायल हुए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया। भारत ने यह भी कहा कि सीमा पार हिंसा और सैन्य कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।

पर्वथनेनी ने बताया कि UNAMA के मुताबिक पाकिस्तान की कार्रवाइयों के चलते 94 हजार से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।

इन आंकड़ों का उल्लेख करते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नागरिक सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।


1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी किया उल्लेख

भारत ने अपने बयान में 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी उल्लेख किया। पर्वथनेनी ने आरोप लगाया कि उस समय पाकिस्तान की सेना ने बड़े पैमाने पर महिलाओं के खिलाफ संगठित हिंसा और अत्याचार किए थे।

उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में नागरिकों के खिलाफ भयावह कार्रवाई की गई थी। भारत ने यह टिप्पणी पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर की।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने UNSC में पाकिस्तान के अतीत और वर्तमान दोनों को जोड़ते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता बेहद कमजोर रही है।


अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का आक्रामक रुख चर्चा में

हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का रुख पहले की तुलना में अधिक आक्रामक और स्पष्ट दिखाई दे रहा है। चाहे आतंकवाद का मुद्दा हो, सीमा पार हिंसा या कश्मीर पर पाकिस्तान की बयानबाजी — भारत अब हर मंच पर मजबूती से जवाब देता नजर आ रहा है।

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल जवाबी बयान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को भी सामने लाकर वैश्विक विमर्श को प्रभावित करने की रणनीति अपना रहा है।


UNSC में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव बना वैश्विक चर्चा का विषय

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई इस तीखी बहस ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव लंबे समय से जारी है, लेकिन वैश्विक मंचों पर इस तरह की तीखी टिप्पणियां माहौल को और संवेदनशील बना देती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद जरूरी है, हालांकि आतंकवाद और सीमा पार हिंसा जैसे मुद्दे संबंधों में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।


भारत ने दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश

भारत ने अपने बयान के जरिए यह स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर जैसे मुद्दों पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर चुप नहीं रहेगा।

भारत ने यह भी दोहराया कि नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों पर बात करने वाले देशों को पहले अपने रिकॉर्ड की समीक्षा करनी चाहिए। UNSC में भारत का यह बयान वैश्विक कूटनीति में एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई तीखी बहस ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की राजनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता को दुनिया के सामने ला दिया है। भारत ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि आतंकवाद, हिंसा और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर वह किसी भी मंच पर मजबूती से अपनी बात रखेगा। वहीं पाकिस्तान पर लगाए गए आरोपों और ऐतिहासिक घटनाओं के उल्लेख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस को और तेज कर दिया है।

 

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