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Muzaffarnagar में यूरिया कालाबाजारी का सबसे बड़ा खुलासा: 15.12 लाख किलो अनुदानित खाद की काली कमाई का पर्दाफाश, अंतरराज्यीय गिरोह के 8 आरोपी गिरफ्तार

Muzaffarnagar पुलिस ने ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है जिसने कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को हैरान कर दिया है। किसानों के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाने वाले अनुदानित यूरिया की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह संगठित नेटवर्क पिछले छह महीनों के दौरान लगभग 15.12 लाख किलोग्राम अनुदानित यूरिया की कथित कालाबाजारी में शामिल रहा है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 454 कट्टे (20,430 किलोग्राम) अनुदानित यूरिया, दो पिकअप वाहन, एक कैंटर, एक कार और फर्जी बिल बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई जा रही है। इस खुलासे को हाल के वर्षों में जिले में खाद की अवैध तस्करी और कालाबाजारी के खिलाफ हुई सबसे बड़ी कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।


जानसठ पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई से खुला करोड़ों के खेल का राज

अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन और पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई अंजाम दी गई। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक, क्षेत्राधिकारी जानसठ ऋषिका सिंह तथा थाना जानसठ प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार के नेतृत्व में थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त टीम लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार कवाल पुल के निकट नियमित चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एसओजी टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि एक सफेद रंग की कार में सवार दो व्यक्ति पीछे चल रहे मालवाहक वाहनों को रास्ते की जानकारी देते हुए आगे-आगे चल रहे हैं। सूचना में बताया गया कि पीछे आने वाले वाहनों में किसानों के लिए आवंटित अनुदानित यूरिया की बड़ी खेप मौजूद है।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई और कृषि विभाग को भी मौके पर बुलाया गया।


हाईवे पर बैरियर लगाकर रोके गए वाहन, खुल गया पूरा खेल

पुलिस ने कवाल पुल से पहले जानसठ की ओर हाईवे पर बैरियर लगाकर विशेष चेकिंग शुरू कर दी। कुछ समय बाद मुखबिर द्वारा बताए गए विवरण से मेल खाती एक सफेद रंग की कार दिखाई दी, जिसके पीछे एक कैंटर और दो पिकअप वाहन चल रहे थे।

जैसे ही वाहन बैरियर के पास पहुंचे, पुलिस ने चारों वाहनों को घेरकर रोक लिया। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने वाहनों में मौजूद पांच लोगों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया।

जब वाहनों की तलाशी ली गई तो पुलिस के सामने चौंकाने वाले तथ्य आए। कार से चार कट्टे, कैंटर से 350 कट्टे तथा दोनों पिकअप वाहनों से 100 कट्टे अनुदानित यूरिया बरामद किया गया।


फर्जी बिलों के सहारे चल रहा था अवैध कारोबार

गिरफ्तार आरोपियों ने यूरिया के परिवहन को वैध दिखाने के लिए कुछ बिल प्रस्तुत किए। हालांकि मौके पर पहुंचे जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने दस्तावेजों की जांच की तो वे कथित रूप से फर्जी पाए गए।

पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से इसी तरीके से सरकारी सब्सिडी वाली खाद को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा रहा था। फर्जी दस्तावेजों के जरिए जांच एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की जाती थी।

यह खुलासा होने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई क्योंकि यह केवल अवैध परिवहन का नहीं बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का मामला बन गया।


हरियाणा, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर तक फैला था नेटवर्क

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सहारनपुर, यमुनानगर (हरियाणा) और मुजफ्फरनगर के निवासी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में तनवीर तेली, राहिल राणा, रियासत, मोहित, मनीष, सौरभ उर्फ हिमांशु, रोहन उर्फ प्रियांशु तथा सूर्य प्रताप उर्फ तुषार के नाम शामिल हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं था बल्कि कई जनपदों और राज्यों तक फैला हुआ था। इसी कारण पुलिस इसे अंतरराज्यीय गिरोह मानकर जांच कर रही है।


किसानों के लिए आवंटित खाद को ऊंचे दामों पर खरीदा जाता था

पूछताछ के दौरान सामने आया कि गिरोह किसानों के लिए निर्धारित अनुदानित यूरिया को अवैध रूप से खरीदता था। पुलिस के अनुसार गिरोह से जुड़े कुछ लोग खाद विक्रेताओं और अन्य माध्यमों के जरिए निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया खरीदते थे।

इसके बाद बड़ी मात्रा में एकत्रित खाद को औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाता था, जहां इसकी मांग अधिक बताई जाती है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे कारोबार में कई स्तरों पर लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।


प्लाईवुड उद्योग में भारी मांग बनी कालाबाजारी की वजह

जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि प्लाईवुड उद्योग में ग्लू तैयार करने के लिए यूरिया का उपयोग किया जाता है। पुलिस के अनुसार औद्योगिक उपयोग के लिए निर्धारित तकनीकी ग्रेड यूरिया का खर्च अपेक्षाकृत अधिक होता है, जबकि किसानों के लिए उपलब्ध अनुदानित यूरिया काफी सस्ता पड़ता है।

यही मूल्य अंतर कालाबाजारी का प्रमुख कारण बन गया। पुलिस का दावा है कि इसी आर्थिक लाभ के चलते बड़ी मात्रा में किसानों के हिस्से की खाद को उद्योगों की ओर मोड़ा जा रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों के लिए उपलब्ध खाद बाजार से गायब होने लगे तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की लागत पर पड़ सकता है।


15.12 लाख किलो यूरिया की कथित कालाबाजारी ने चौंकाया

पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार गिरोह पिछले छह महीनों में लगभग 15.12 लाख किलोग्राम अनुदानित यूरिया की कथित कालाबाजारी कर चुका है।

यह आंकड़ा सामने आने के बाद पूरे मामले का दायरा काफी बड़ा हो गया है। यदि जांच में यह दावा पुष्ट होता है तो यह क्षेत्र में खाद की अवैध तस्करी और कालाबाजारी के सबसे बड़े मामलों में से एक साबित हो सकता है।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक पहलुओं, लेन-देन और सप्लाई चेन की भी गहन जांच कर रही है।


तीन अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच को मिली नई दिशा

मुख्य आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने सौरभ उर्फ हिमांशु, रोहन उर्फ प्रियांशु और सूर्य प्रताप उर्फ तुषार को भी गिरफ्तार किया है। इनकी भूमिका खाद की खरीद, भंडारण और दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़ी होने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो इस नेटवर्क को वित्तीय या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध करा रहे थे। एक अन्य आरोपी संजय निवासी रायसी, लक्सर (हरिद्वार) का नाम भी जांच में सामने आया है, जिसकी तलाश की जा रही है।


किसानों के हितों पर चोट, प्रशासन हुआ सख्त

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार किसानों को राहत देने के लिए भारी सब्सिडी पर यूरिया उपलब्ध कराती है। यदि यह खाद किसानों तक पहुंचने के बजाय कालाबाजारी के माध्यम से दूसरे क्षेत्रों में चली जाए तो इसका नुकसान सीधे कृषि क्षेत्र को होता है।

इसी कारण प्रशासन और पुलिस ऐसे मामलों को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसानों के अधिकारों और कृषि व्यवस्था की सुरक्षा के लिए ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।


उत्कृष्ट कार्रवाई पर पुलिस टीम को मिला पुरस्कार

इस बड़े खुलासे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम को प्रोत्साहन स्वरूप 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई न केवल अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देती है बल्कि पुलिस बल का मनोबल भी बढ़ाती है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 

मुजफ्फरनगर में सामने आया यह कथित यूरिया कालाबाजारी प्रकरण केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि किसानों के हितों और कृषि व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है। पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी मात्रा में अनुदानित यूरिया, फर्जी बिल और वाहन बरामद होने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों का ध्यान अब पूरे नेटवर्क, आर्थिक लाभ के स्रोतों और इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित है। यदि जांच में सामने आए दावे पुष्ट होते हैं, तो यह मामला क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी के सबसे बड़े खुलासों में दर्ज हो सकता है।

 

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