उत्तर प्रदेश

Pilibhit News: ड्यूटी में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, तीन दरोगा समेत 15 पुलिसकर्मी निलंबित, एसपी सुकीर्ति माधव का सख्त संदेश

Pilibhit में पुलिस विभाग से जुड़ी एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। जिले में लंबे समय से बिना अनुमति और बिना संतोषजनक कारण के अनुपस्थित चल रहे पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने सख्त कदम उठाते हुए 15 कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और विभागीय अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश गया है कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निलंबित कर्मचारियों में तीन उपनिरीक्षक (दरोगा), एक मुख्य आरक्षी, नौ आरक्षी, एक महिला आरक्षी और दो स्वीपर शामिल हैं। विभागीय आदेश जारी होने के साथ ही सभी संबंधित कर्मियों के विरुद्ध आगे की जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।


लंबे समय से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित थे कर्मचारी

पुलिस विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिले की विभिन्न इकाइयों में तैनात कई कर्मचारी लंबे समय से बिना अनुमति अनुपस्थित पाए गए थे। विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मी आकस्मिक अवकाश और अर्जित अवकाश पर जाने के बाद निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे।

इसके अलावा कुछ कर्मचारी लगातार लंबे समय से कार्यस्थल से गायब चल रहे थे और उनके द्वारा अनुपस्थिति को लेकर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत नहीं किया गया। विभागीय स्तर पर कई बार स्थिति की समीक्षा किए जाने के बाद अंततः निलंबन की कार्रवाई की गई।

सूत्रों के अनुसार पुलिस विभाग में उपस्थिति और अनुशासन को लेकर हाल के दिनों में विशेष निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में यह मामला सामने आया और कार्रवाई अमल में लाई गई।


तीन उपनिरीक्षकों समेत कई पुलिसकर्मी कार्रवाई की जद में

निलंबित किए गए कर्मचारियों में उपनिरीक्षक दिनेश कुमार, कृष्ण कुमार और विकास कुमार के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों ने अवकाश अवधि समाप्त होने के बाद भी अपना कार्यभार ग्रहण नहीं किया और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया।

इसके अलावा मुख्य आरक्षी श्याम सुंदर शुक्ला सहित कई आरक्षी भी लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। विभागीय जांच में सामने आया कि इन कर्मचारियों की अनुपस्थिति का कोई वैध अथवा संतोषजनक कारण रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं था।

पुलिस प्रशासन का मानना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था में अनुशासन सर्वोपरि होता है और ऐसी लापरवाही पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है।


विभिन्न थानों और इकाइयों में तैनात थे निलंबित कर्मचारी

जानकारी के अनुसार निलंबित किए गए कर्मचारी जिले के विभिन्न थानों और इकाइयों में तैनात थे। इनमें पुलिस लाइन, कोतवाली, सेहरामऊ उत्तरी, जहानाबाद, बरखेड़ा, यूपी-112, मॉनिटरिंग सेल और अन्य शाखाओं के कर्मचारी शामिल हैं।

विभागीय अभिलेखों के अनुसार कुछ कर्मचारी मार्च और अप्रैल माह से ही बिना अनुमति अनुपस्थित चल रहे थे, जबकि कुछ कर्मचारी मई और जून के दौरान अवकाश समाप्त होने के बाद भी ड्यूटी पर नहीं लौटे।

इस पूरे मामले में विभाग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद कार्रवाई को अंतिम रूप दिया। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच भी की जाएगी ताकि अनुपस्थिति के वास्तविक कारणों का सत्यापन किया जा सके।


अनुशासन और जवाबदेही को लेकर पुलिस विभाग का स्पष्ट संदेश

पुलिस प्रशासन में अनुशासन को सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी केवल कार्यालय तक सीमित नहीं होती बल्कि वे जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में यदि कोई कर्मचारी बिना सूचना या अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है तो इसका सीधा प्रभाव विभागीय कार्यों और आम जनता को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है। यही कारण है कि पुलिस विभाग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई न केवल विभागीय अनुशासन को मजबूत करती है बल्कि अन्य कर्मचारियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का संदेश देती है।


विभागीय जांच भी शुरू, आगे हो सकती है अतिरिक्त कार्रवाई

निलंबन के साथ ही सभी संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि अनुपस्थिति किन परिस्थितियों में हुई और क्या किसी कर्मचारी के पास ऐसा कोई कारण था जिसे विभागीय स्तर पर स्वीकार किया जा सके।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सेवा नियमों के तहत आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय नियमों के अनुसार चेतावनी, वेतन संबंधी प्रभाव, सेवा अभिलेख में प्रविष्टि या अन्य अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा और नियमों के अनुरूप ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


एसपी सुकीर्ति माधव का सख्त रुख, लापरवाही पर नहीं मिलेगी छूट

पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने स्पष्ट कहा है कि ड्यूटी के प्रति लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और अनधिकृत अनुपस्थिति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में यदि इसी प्रकार के मामले सामने आते हैं तो उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन की यह कार्रवाई विभाग में जवाबदेही और कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई

एक साथ 15 कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक हलकों में इसे अनुशासन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि पुलिस व्यवस्था की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारी का निर्वहन आवश्यक है।

इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ है कि विभाग अब अनुपस्थिति और कार्य में लापरवाही जैसे मामलों पर पहले की तुलना में अधिक सख्ती बरत रहा है। आने वाले समय में ऐसे मामलों की निगरानी और भी तेज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।


पीलीभीत पुलिस विभाग में तीन दरोगाओं समेत 15 पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता और अनधिकृत अनुपस्थिति को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। एसपी सुकीर्ति माधव द्वारा की गई इस कार्रवाई को विभागीय जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल सभी संबंधित कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

 

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