Azamgarh में 6 लाख की नकल डील का पर्दाफाश: कान में हियरिंग डिवाइस, अंडरवियर में ब्लूटूथ-सिम; नकल माफिया गिरोह का सदस्य गिरफ्तार
News-Desk
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पुलिस ने इस मामले में अंतरजनपदीय नकल माफिया गिरोह से जुड़े वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने अभ्यर्थी को परीक्षा में पास कराने के लिए छह लाख रुपये में सौदा तय किया था।
परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी के कान के अंदर हियरिंग डिवाइस और उसके अंडरवियर में सिम तथा दो सेल बैटरी से जुड़ा ब्लूटूथ डिवाइस मिलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पुलिस की जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से अभ्यर्थी तक प्रश्नों के उत्तर पहुंचाने की तैयारी में थे।
मामले में पहले ही एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। विवेचना के दौरान नकल कराने वाले कथित नेटवर्क से वीरेंद्र कुमार राय का नाम सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने उसे आजमगढ़ के प्राइवेट बस अड्डे से गिरफ्तार किया।
छह लाख रुपये में पास कराने की कथित डील
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू परीक्षा पास कराने के लिए तय की गई कथित रकम है।
गिरोह ने अभ्यर्थी आलोक पटेल को यूपीएसएससी प्राविधिक सहायक मुख्य परीक्षा में पास कराने के लिए छह लाख रुपये में सौदा तय किया था।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि अभ्यर्थी को बाहर से उत्तर बताने की व्यवस्था की गई थी।
इसके लिए ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें सामान्य तलाशी में आसानी से पकड़ पाना मुश्किल हो सकता था।
हालांकि, परीक्षा केंद्र पर की गई तलाशी के दौरान उपकरण बरामद होने के बाद कथित साजिश का खुलासा हो गया।
कान के अंदर मिला हियरिंग डिवाइस
घटना 9 अगस्त को शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज में आयोजित यूपीएसएसएससी प्राविधिक सहायक मुख्य परीक्षा के दौरान सामने आई।
शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय के अनुसार, परीक्षा केंद्र के ब्लॉक-A के एक कक्ष में परीक्षा दे रहे वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के भड़ाव गांव निवासी आलोक पटेल की गतिविधियां संदिग्ध लगीं।
इसके बाद उसकी तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान उसके कान के अंदर एक हियरिंग डिवाइस मिला।
यह उपकरण कथित तौर पर परीक्षा के दौरान बाहर से जानकारी या उत्तर उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
पुलिस के अनुसार, यही बरामदगी मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बनी।
अंडरवियर में छिपाया गया था ब्लूटूथ डिवाइस
मामले में पुलिस को सिर्फ कान के अंदर छिपाया गया उपकरण ही नहीं मिला।
तलाशी के दौरान अभ्यर्थी के अंडरवियर में सिम और दो सेल बैटरी से जुड़ा ब्लूटूथ डिवाइस भी बरामद किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इस तरह छिपाकर परीक्षा केंद्र में ले जाने की कथित कोशिश ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।
पुलिस का आरोप है कि इन उपकरणों के जरिए परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद सहयोगियों से संपर्क कर उत्तर हासिल करने की योजना थी।
संदिग्ध गतिविधियों से खुला पूरा मामला
अगर परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी की गतिविधियां संदिग्ध नहीं लगतीं तो संभव है कि यह कथित योजना आगे बढ़ जाती।
लेकिन परीक्षा के दौरान निगरानी और बाद में तलाशी के चलते इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हो गए।
इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की तह तक जाने के लिए जांच शुरू की।
शुरुआत में मामला केवल एक अभ्यर्थी द्वारा कथित नकल की कोशिश तक सीमित दिखाई दे रहा था।
लेकिन विवेचना आगे बढ़ी तो पुलिस को कथित तौर पर एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले।
पहले आलोक पटेल हुआ गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के भड़ाव गांव निवासी आलोक पटेल को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
उसके खिलाफ परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के आरोप में कार्रवाई की गई।
पूछताछ और विवेचना के दौरान पुलिस को कथित तौर पर उन लोगों की जानकारी मिली जिन्होंने उसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराए थे।
यहीं से जांच वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू तक पहुंची।
आजमगढ़ के प्राइवेट बस अड्डे से गिरफ्तारी
पुलिस ने मंगलवार को वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू को गिरफ्तार कर लिया।
उसकी गिरफ्तारी आजमगढ़ के प्राइवेट बस अड्डे से किए जाने की जानकारी दी गई है।
वीरेंद्र वाराणसी के जंसा थाना क्षेत्र के कुरौना सरौनी गांव का निवासी बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर परीक्षा में नकल कराने की व्यवस्था से जुड़े होने की बात बताई।
अब जांच एजेंसियां उसके संपर्क में रहने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।
तीन लोगों का नाम पूछताछ में सामने आया
शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय के अनुसार, पूछताछ में वीरेंद्र ने अपने साथियों आनंद पटेल और कुश पटेल का भी नाम बताया।
दोनों वाराणसी के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने की व्यवस्था करने वाले लोगों से संपर्क किया था।
इससे जांच का दायरा अब एक अभ्यर्थी और एक आरोपी से आगे बढ़कर कथित नेटवर्क तक पहुंच गया है।
15 हजार रुपये एडवांस लेने का दावा
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराने के बदले उसे 15 हजार रुपये एडवांस मिले थे।
छह लाख रुपये की कथित पूरी डील में यह रकम उपकरण और व्यवस्था उपलब्ध कराने से जुड़ी बताई जा रही है।
हालांकि, पुलिस पूछताछ में सामने आए इन दावों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी बाकी है।
किसने कितनी रकम दी, पैसा किस माध्यम से पहुंचा और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल थे—इन सवालों की जांच अब महत्वपूर्ण होगी।
नकल कराने का पूरा तरीका क्या था?
पुलिस के अनुसार, कथित योजना का उद्देश्य परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद लोगों के जरिए अभ्यर्थी को प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराना था।
इसके लिए हियरिंग डिवाइस और ब्लूटूथ आधारित उपकरण का इस्तेमाल किया गया।
ऐसी व्यवस्था में अभ्यर्थी के पास बाहर से सूचना पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
हालांकि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के कारण कथित व्यवस्था परीक्षा के दौरान ही पकड़ ली गई।
नकल माफिया का अंतरजनपदीय नेटवर्क क्यों चिंता की बात?
इस मामले में पुलिस ने इसे अंतरजनपदीय नकल माफिया गिरोह से जुड़ा बताया है।
अगर जांच में यह नेटवर्क साबित होता है तो यह केवल आजमगढ़ की एक परीक्षा तक सीमित मामला नहीं रहेगा।
वाराणसी और आजमगढ़ के बीच कथित संपर्क सामने आने से यह संभावना जांच का हिस्सा बन सकती है कि गिरोह अन्य परीक्षाओं और अभ्यर्थियों से भी जुड़ा था।
पुलिस इसी दिशा में आगे की जांच कर रही है।
क्या दूसरे अभ्यर्थी भी निशाने पर थे?
यह भी जांच का महत्वपूर्ण सवाल है।
यदि छह लाख रुपये में एक अभ्यर्थी को पास कराने की व्यवस्था की गई थी तो पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि क्या इसी गिरोह ने अन्य उम्मीदवारों से भी संपर्क किया था।
क्या अन्य परीक्षाओं में भी ऐसे उपकरण इस्तेमाल किए गए?
क्या गिरोह के पास पहले से ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध थे?
क्या इसके लिए कोई स्थायी नेटवर्क काम कर रहा था?
इन सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के बाद सामने आ सकते हैं।
परीक्षा केंद्र की सुरक्षा पर भी सवाल
आजमगढ़ की इस घटना ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है।
आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले स्वरूप के कारण परीक्षा केंद्रों पर तलाशी और निगरानी की चुनौती बढ़ गई है।
ऐसे मामलों में केवल गेट पर सामान्य तलाशी पर्याप्त नहीं हो सकती।
परीक्षा केंद्रों को उम्मीदवारों की गतिविधियों पर भी नजर रखनी पड़ती है।
हालांकि किसी भी परीक्षा में सुरक्षा और अभ्यर्थियों की गरिमा के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
प्रतियोगी परीक्षा में एक सीट की कीमत कितनी बड़ी होती है
सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं।
हर सीट के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मेहनत करते हैं।
ऐसे में यदि कोई व्यक्ति पैसे देकर परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने का प्रयास करता है तो उसका असर केवल परीक्षा व्यवस्था पर नहीं पड़ता।
इससे उन अभ्यर्थियों के साथ भी अन्याय होता है जिन्होंने वर्षों तक तैयारी की होती है।
इसी कारण नकल और पेपर से जुड़े गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग लगातार उठती रही है।
ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए बड़ा खतरा
किसी प्रतियोगी परीक्षा में एक उम्मीदवार की कथित नकल दूसरे उम्मीदवार के अवसर को प्रभावित कर सकती है।
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में मेरिट और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं।
यदि पैसे और संपर्क के आधार पर कोई व्यक्ति व्यवस्था को धोखा देने में सफल होता है तो परीक्षा प्रणाली पर युवाओं का भरोसा कमजोर हो सकता है।
इसीलिए परीक्षा में नकल कराने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई को केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा भी माना जाता है।
सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और IT Act के तहत केस
पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
कानूनी धाराएं जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों के आधार पर आगे बदल या बढ़ सकती हैं।
पुलिस ने मामले में आगे की विवेचना जारी रखी है।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत के सामने पेश किया जाएगा और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार होगी।
2021 में भी दर्ज हुई थी प्राथमिकी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू के खिलाफ वाराणसी के फूलपुर थाने में वर्ष 2021 में भी प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
यह जानकारी पुलिस जांच में सामने आई है।
पुराने मामले की प्रकृति और वर्तमान प्रकरण से उसका संबंध क्या है, यह न्यायिक रिकॉर्ड और पुलिस जांच से स्पष्ट होगा।
यदि दोनों मामलों के बीच कोई संबंध सामने आता है तो जांच एजेंसियों को आरोपी की कथित गतिविधियों का व्यापक पैटर्न समझने में मदद मिल सकती है।
पुलिस अब खंगाल रही है गिरोह के बाकी सदस्य
वीरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच खत्म नहीं हुई है।
बल्कि अब जांच का अगला चरण कथित गिरोह के अन्य सदस्यों और संपर्कों तक पहुंचने का है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उपकरण कहां से आए, उन्हें किसने उपलब्ध कराया, परीक्षा के दौरान बाहर से कौन संपर्क करने वाला था और छह लाख रुपये की कथित डील में अन्य कौन लोग शामिल थे।
मोबाइल फोन भी बरामद
गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
जांच के दौरान मोबाइल फोन से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।
कॉल रिकॉर्ड, संदेश, संपर्क नंबर और अन्य उपलब्ध डिजिटल जानकारी से कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सकती है।
हालांकि किसी डिजिटल सामग्री को अपराध का प्रमाण मानने से पहले उसकी विधिवत जांच और कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी।
क्या मोबाइल से खुलेंगे और राज?
जांचकर्ताओं के लिए बरामद मोबाइल एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है।
यदि उसमें परीक्षा, अभ्यर्थी, भुगतान या उपकरणों से संबंधित बातचीत मिलती है तो पुलिस को कथित नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिल सकती है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया था।
फिलहाल मोबाइल से क्या जानकारी मिली है, इसकी विस्तृत जानकारी पुलिस की ओर से सामने नहीं आई है।
परीक्षा के दिन की घटनाओं की कड़ी जोड़ी जा रही
9 अगस्त की परीक्षा से लेकर मंगलवार की गिरफ्तारी तक पुलिस ने घटनाओं की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की है।
पहले परीक्षा केंद्र पर आलोक पटेल की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं।
तलाशी में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले।
इसके बाद पूछताछ हुई।
विवेचना आगे बढ़ी और कथित तौर पर उपकरण उपलब्ध कराने वाले लोगों के बारे में जानकारी मिली।
फिर वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया गया।
अब पुलिस बाकी संपर्कों और कथित नेटवर्क की जांच कर रही है।
छह लाख की रकम का स्रोत भी जांच का हिस्सा
छह लाख रुपये में परीक्षा पास कराने की कथित डील की बात सामने आने के बाद जांचकर्ताओं के सामने आर्थिक लेन-देन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या रकम वास्तव में दी गई?
किसे दी गई?
किस माध्यम से दी गई?
क्या कोई बैंक लेन-देन हुआ?
क्या नकद भुगतान किया गया?
और क्या अन्य उम्मीदवारों से भी इसी तरह की रकम ली गई?
इन सवालों के जवाब मिलने पर कथित नेटवर्क की आर्थिक संरचना सामने आ सकती है।
परीक्षा में नकल का बदलता तरीका
पारंपरिक तरीकों में कागज, पर्ची या दूसरे लिखित माध्यमों से नकल की कोशिश की जाती थी।
लेकिन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ परीक्षा में अनुचित साधनों का स्वरूप भी बदल रहा है।
छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन सकता है।
आजमगढ़ के इस मामले में भी पुलिस के अनुसार हियरिंग डिवाइस और ब्लूटूथ उपकरण का इस्तेमाल किया गया।
प्रशासन के लिए भी सबक
इस तरह के मामलों से परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों के सामने सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपडेट करने की जरूरत सामने आती है।
प्रवेश से पहले तलाशी, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि सुरक्षा उपायों को इस तरह लागू करना भी जरूरी है कि सामान्य और ईमानदार अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशानी न हो।
नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई से बढ़ेगा भरोसा
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवा लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं।
कई उम्मीदवार वर्षों तक एक परीक्षा की तैयारी में लगे रहते हैं।
जब नकल या पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो उनके बीच असंतोष बढ़ता है।
इसलिए यदि पुलिस वास्तव में पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है तो इससे परीक्षा प्रणाली में भरोसा मजबूत हो सकता है।
वाराणसी से आजमगढ़ तक जुड़ती जांच की कड़ियां
मामले में वाराणसी के कई लोगों के नाम सामने आए हैं।
अभ्यर्थी आलोक पटेल वाराणसी के जंसा क्षेत्र का निवासी है।
गिरफ्तार वीरेंद्र कुमार राय भी वाराणसी के जंसा क्षेत्र का निवासी बताया गया है।
पुलिस के अनुसार उसके साथियों आनंद पटेल और कुश पटेल का संबंध भी वाराणसी से बताया गया है।
इससे जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वाराणसी से जुड़ गया है।
अभी और गिरफ्तारियां संभव?
पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
यदि पूछताछ और डिजिटल या अन्य साक्ष्यों से अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
हालांकि किसी व्यक्ति को केवल किसी आरोपी के बयान के आधार पर दोषी मानना उचित नहीं है।
अंतिम जिम्मेदारी और अपराध की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
UPSSSC परीक्षा की निष्पक्षता पर निगाह
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UPSSSC राज्य में विभिन्न सरकारी पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है।
ऐसी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा हिस्सा लेते हैं।
प्राविधिक सहायक ग्रुप-C जैसी भर्तियों में उम्मीदवारों के लिए परीक्षा का परिणाम करियर की दिशा तय कर सकता है।
इसलिए परीक्षा के दौरान कथित नकल का मामला गंभीर माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों को भी सावधानी की जरूरत
प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार के अनुचित साधन का इस्तेमाल उम्मीदवार के लिए गंभीर कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।
कई बार नकल कराने वाले गिरोह उम्मीदवारों को जल्दी सफलता का लालच देते हैं।
लेकिन ऐसे मामलों में पैसा गंवाने के साथ-साथ उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
आजमगढ़ का मामला इसी जोखिम की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।
एक परीक्षा, कई सवाल
आजमगढ़ में सामने आया मामला केवल एक अभ्यर्थी की कथित नकल तक सीमित नहीं है।
छह लाख रुपये की कथित डील, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाराणसी से जुड़े कई नाम और पहले से दर्ज प्राथमिकी ने जांच को व्यापक बना दिया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस कथित नेटवर्क की कितनी गहराई तक पहुंच पाती है।
आगे की जांच पर टिकी नजर
पुलिस ने वीरेंद्र कुमार राय उर्फ बाबू को गिरफ्तार कर लिया है।
आलोक पटेल पहले से जेल भेजा जा चुका है।
अब जांच में कथित गिरोह के अन्य सदस्यों, आर्थिक लेन-देन, मोबाइल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के स्रोत की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि संगठित रूप से कई अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से पास कराने की व्यवस्था की जा रही थी, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
फिलहाल पुलिस ने जांच जारी रखी है और बाकी आरोपियों की भूमिका सामने आने का इंतजार है।

