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Muzaffarnagar में ‘पुलिस की पाठशाला’ से छात्रों को मिला साइबर ठगी और सड़क सुरक्षा का पाठ, डिजिटल अरेस्ट से लेकर OTP फ्रॉड तक समझाए खतरे

Muzaffarnagar  जिले में विद्यार्थियों को साइबर अपराध और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत शुक्रवार को सर छोटूराम इंटर कॉलेज में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन ठगी के बदलते तरीकों से लेकर सड़क पर सुरक्षित रहने के नियमों तक की महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में एसपी क्राइम श्रीमती इंदु सिद्धार्थ ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए बताया कि डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। फर्जी कॉल, OTP और UPI से जुड़े फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी कस्टमर केयर और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचा सकती है।

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि साइबर सुरक्षा केवल बड़ों के लिए जरूरी विषय नहीं है। आज बच्चे और युवा भी मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल पेमेंट और इंटरनेट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। इसलिए उन्हें भी यह समझना जरूरी है कि ऑनलाइन दुनिया में किस प्रकार की सावधानियां बरतनी चाहिए।


‘पुलिस की पाठशाला’ में साइबर अपराध के बदलते तरीकों पर चर्चा

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अपराध के बारे में जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी परिस्थितियों में सही प्रतिक्रिया के लिए तैयार करना भी रहा।

एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने विद्यार्थियों को समझाया कि साइबर ठगी करने वाले अपराधी अक्सर लोगों को डर, लालच या जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर फोन किया जाता है, कभी किसी रिश्तेदार या परिचित के नाम से संदेश भेजा जाता है और कभी किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर कार्रवाई की धमकी दी जाती है।

ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यही है कि किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर तत्काल कोई वित्तीय लेन-देन न किया जाए और न ही निजी जानकारी साझा की जाए।


फर्जी कॉल से सावधान रहने की दी सलाह

साइबर अपराध का एक सामान्य तरीका फर्जी फोन कॉल भी है। ठग बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, कस्टमर केयर प्रतिनिधि, डिलीवरी एजेंट या किसी अन्य संस्था का कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क कर सकते हैं।

विद्यार्थियों को बताया गया कि केवल फोन करने वाले व्यक्ति के दावा करने से उसकी पहचान वास्तविक नहीं माननी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक खाते की जानकारी, कार्ड नंबर, OTP, UPI PIN या पासवर्ड मांगता है तो ऐसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

पुलिस ने विद्यार्थियों को समझाया कि वास्तविक संस्थाएं आम तौर पर इस प्रकार की संवेदनशील जानकारी मांगने के नाम पर लोगों पर तत्काल दबाव नहीं डालतीं। किसी संदिग्ध कॉल की स्थिति में बातचीत रोककर संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से जानकारी सत्यापित करना अधिक सुरक्षित है।


OTP और UPI फ्रॉड से बचने का सबसे जरूरी नियम

कार्यक्रम में OTP और UPI फ्रॉड को लेकर भी विशेष रूप से जागरूक किया गया।

विद्यार्थियों को बताया गया कि OTP यानी One-Time Password किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार UPI PIN भी पूरी तरह गोपनीय रखना जरूरी है।

साइबर अपराधी कई बार भुगतान प्राप्त करने के नाम पर ऐसा लिंक या रिक्वेस्ट भेजते हैं, जिसे स्वीकार करने पर व्यक्ति के खाते से पैसा जा सकता है। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए भुगतान अनुरोध को बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

एक महत्वपूर्ण बात यह भी समझाई गई कि पैसा प्राप्त करने के लिए सामान्यतः UPI PIN डालने की आवश्यकता नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति पैसा भेजने के नाम पर PIN डालने या किसी संदिग्ध स्क्रीन पर भुगतान स्वीकृत करने को कह रहा है, तो बेहद सावधान रहने की जरूरत है।


सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग से कैसे बचें?

आज के समय में सोशल मीडिया अकाउंट भी साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य प्लेटफॉर्म पर अकाउंट हैक होने या फर्जी प्रोफाइल बनाए जाने के मामले सामने आते रहते हैं।

पुलिस की पाठशाला में विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट के लिए मजबूत और अलग पासवर्ड रखें। जहां संभव हो, वहां Two-Factor Authentication जैसी सुरक्षा सुविधा सक्रिय रखें।

किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या सोशल मीडिया पर प्राप्त किसी संदिग्ध संदेश के आधार पर अपनी लॉगिन जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।

विद्यार्थियों से यह भी कहा गया कि वे अपनी निजी जानकारी सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा सार्वजनिक न करें।


फर्जी कस्टमर केयर नंबर से हो रही ठगी पर भी चेतावनी

साइबर ठगी के मामलों में फर्जी कस्टमर केयर नंबर भी एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। कई बार लोग इंटरनेट पर किसी कंपनी या बैंक का कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं और गलत वेबसाइट या पोस्ट से प्राप्त नंबर पर फोन कर बैठते हैं।

इसके बाद ठग खुद को कस्टमर केयर कर्मचारी बताकर मोबाइल पर कोई ऐप डाउनलोड करने, स्क्रीन शेयर करने या बैंक संबंधी जानकारी देने के लिए कह सकते हैं।

पुलिस ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि किसी कंपनी, बैंक या डिजिटल सेवा का हेल्पलाइन नंबर खोजते समय केवल उसके आधिकारिक स्रोत पर भरोसा करें।

किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए नंबर या लिंक को सत्यापित किए बिना इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है।


‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान

कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई।

साइबर ठग कई बार पुलिस, CBI, ED, कस्टम विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन करते हैं। इसके बाद व्यक्ति को किसी कथित अपराध में फंसने की बात कहकर डराया जाता है और उससे पैसे ट्रांसफर करने या निजी जानकारी देने के लिए कहा जाता है।

ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत बातचीत रोकना और संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए।

किसी फोन कॉल पर खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताने वाला व्यक्ति यदि पैसे भेजने या निजी बैंकिंग जानकारी साझा करने का दबाव बनाता है तो यह गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है।


साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर तुरंत करें शिकायत

एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी दी।

पुलिस ने बताया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। ऑनलाइन शिकायत के लिए भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in का इस्तेमाल किया जा सकता है।

साइबर फ्रॉड में समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए ठगी होने के बाद चुप बैठने या पहले किसी परिचित से सलाह लेने में ज्यादा समय गंवाने के बजाय तत्काल आधिकारिक माध्यम से शिकायत करना जरूरी है।

जितनी जल्दी घटना की जानकारी संबंधित व्यवस्था तक पहुंचती है, उतनी जल्दी आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी उपलब्ध हो सकती है।


पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी को लेकर बरतें विशेष सावधानी

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से कहा कि अपना पासवर्ड, UPI PIN, OTP, ATM या कार्ड से संबंधित संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न बताएं।

सिर्फ अनजान व्यक्ति ही नहीं, बल्कि किसी भी संदिग्ध वेबसाइट या ऐप पर ऐसी जानकारी दर्ज करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।

एक ही पासवर्ड को हर जगह इस्तेमाल करना भी सुरक्षा के लिहाज से जोखिम बढ़ा सकता है। महत्वपूर्ण अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखना बेहतर सुरक्षा अभ्यास माना जाता है।


साइबर सुरक्षा के साथ सड़क सुरक्षा का भी पढ़ाया गया पाठ

कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा यातायात और सड़क सुरक्षा रहा।

एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ और यातायात उप-निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।

विद्यार्थियों को विशेष रूप से बताया गया कि नाबालिग उम्र में वाहन चलाना न केवल कानून और सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय है, बल्कि इससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।

युवाओं में बाइक और स्कूटर चलाने का आकर्षण आम है, लेकिन सड़क पर छोटी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना में बदल सकती है।


नाबालिग वाहन न चलाएं, अभिभावक भी रहें जिम्मेदार

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को नाबालिग उम्र में वाहन न चलाने की हिदायत दी।

कई बार बच्चे या किशोर परिवार के वाहन लेकर सड़क पर निकल जाते हैं। ऐसे मामलों में केवल वाहन चलाने वाले की ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

विद्यार्थियों से कहा गया कि जब तक वे कानूनी रूप से वाहन चलाने के योग्य न हों और वैध ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त न कर लें, तब तक वाहन न चलाएं।


हेलमेट और सीट बेल्ट केवल नियम नहीं, सुरक्षा कवच हैं

कार्यक्रम में हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व पर भी जोर दिया गया।

दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना और कार में यात्रा करते समय सीट बेल्ट लगाना सड़क सुरक्षा के सबसे बुनियादी नियमों में शामिल है।

कई दुर्घटनाओं में वाहन की गति से ज्यादा चोट का कारण व्यक्ति का सड़क सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल न करना बन सकता है। इसलिए विद्यार्थियों को खुद भी नियमों का पालन करने और अपने परिवार के सदस्यों को भी इसके लिए प्रेरित करने की सलाह दी गई।


स्टंटबाजी और तेज रफ्तार से दूर रहने की अपील

युवाओं के बीच बाइक स्टंट और तेज रफ्तार का चलन कभी-कभी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन जाता है।

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को वाहन चलाते समय स्टंटबाजी से पूरी तरह बचने की सलाह दी।

सड़क सार्वजनिक स्थान है, जहां चालक के साथ दूसरे वाहन चालक, पैदल यात्री, बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद होते हैं। इसलिए किसी एक व्यक्ति की लापरवाही कई लोगों के लिए खतरा बन सकती है।

पुलिस ने विद्यार्थियों को समझाया कि सड़क पर कौशल दिखाने की बजाय सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य तक पहुंचना ही सबसे महत्वपूर्ण है।


ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन बना सकता है बड़ा खतरा

कार्यक्रम में वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी गई।

मोबाइल पर बात करना, मैसेज पढ़ना या सोशल मीडिया देखना चालक का ध्यान सड़क से हटा सकता है। कुछ सेकंड की यह लापरवाही भी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

विद्यार्थियों से कहा गया कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें और परिवार के बड़े सदस्यों को भी इस नियम का पालन करने के लिए प्रेरित करें।


विद्यार्थियों को ‘जागरूक नागरिक’ बनने का संदेश

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से केवल खुद सुरक्षित रहने की अपील नहीं की, बल्कि उन्हें अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने के लिए कहा।

एक विद्यार्थी यदि अपने घर में माता-पिता को OTP साझा न करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, हेलमेट पहनने या सीट बेल्ट लगाने की सलाह देता है तो उसका प्रभाव एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।

इसी सोच के साथ पुलिस की पाठशाला में विद्यार्थियों को जागरूकता के संदेश का वाहक बनने के लिए प्रेरित किया गया।


साइबर अपराध रोकने में जागरूकता की अहम भूमिका

साइबर अपराधों में अपराधी अक्सर तकनीक के साथ-साथ मानव व्यवहार का भी फायदा उठाते हैं। डर, लालच, जल्दबाजी और भरोसे का गलत इस्तेमाल करके लोगों से जानकारी या पैसा हासिल किया जाता है।

इसलिए साइबर सुरक्षा का पहला स्तर किसी अत्याधुनिक तकनीक से ज्यादा सावधानी और जागरूकता है।

यदि कोई व्यक्ति अनजान कॉल पर तुरंत भरोसा न करे, OTP और PIN साझा न करे, संदिग्ध लिंक न खोले और ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करे तो साइबर अपराध से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।


स्कूलों में साइबर जागरूकता की बढ़ती जरूरत

इंटरनेट और स्मार्टफोन के विस्तार के साथ स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच साइबर सुरक्षा शिक्षा का महत्व भी बढ़ा है।

आज विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया, ईमेल और विभिन्न ऐप का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उन्हें केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं, बल्कि तकनीक का सुरक्षित उपयोग करना भी आना चाहिए।

पुलिस की पाठशाला जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन में सामने आने वाली समस्याओं और उनसे बचने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी देने का अवसर प्रदान करते हैं।


मुजफ्फरनगर पुलिस का जागरूकता अभियान

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाया जा रहा यह विशेष अभियान साइबर अपराध की रोकथाम और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से जुड़ा है।

सर छोटूराम इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में दोनों विषयों को एक साथ रखा गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया और वास्तविक सड़क सुरक्षा—दोनों मोर्चों पर सतर्क बनाना रहा।

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे खुद नियमों का पालन करें और अपने परिवार तथा मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करें।


एक छोटी गलती, बड़ा नुकसान

कार्यक्रम में दिए गए संदेश का सार यही रहा कि साइबर दुनिया में एक छोटी सी गलती आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है और सड़क पर एक छोटी लापरवाही जानलेवा दुर्घटना में बदल सकती है।

एक गलत लिंक पर क्लिक करना, OTP बताना, UPI PIN साझा करना, फर्जी कस्टमर केयर पर भरोसा करना या किसी अनजान व्यक्ति को स्क्रीन शेयर करना साइबर अपराधियों के लिए अवसर बन सकता है।

इसी तरह बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, मोबाइल फोन इस्तेमाल करना या सड़क पर स्टंट करना दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकता है।

इसलिए जागरूकता और सावधानी को सबसे प्रभावी सुरक्षा उपायों में माना गया।


विद्यार्थियों से परिवार तक पहुंचेगा जागरूकता का संदेश

पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि वे कार्यक्रम में मिली जानकारी को केवल अपने तक सीमित न रखें।

यदि छात्र अपने माता-पिता, भाई-बहन और आसपास के लोगों को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में बताते हैं, तो जागरूकता का दायरा बढ़ सकता है।

इसी तरह घर के बड़े यदि बच्चों को कम उम्र में वाहन न चलाने, हेलमेट पहनने और सड़क नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं तो दुर्घटनाओं की रोकथाम में मदद मिल सकती है।


पुलिस की पाठशाला में मिला दोहरी सुरक्षा का संदेश

सर छोटूराम इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को एक साथ दो महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया—डिजिटल सुरक्षा और सड़क सुरक्षा।

एक तरफ जहां पुलिस ने फर्जी कॉल, OTP/UPI फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, फर्जी कस्टमर केयर और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताए, वहीं दूसरी ओर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, बिना लाइसेंस ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी, मोबाइल फोन के इस्तेमाल और स्टंटबाजी से होने वाले खतरों के बारे में समझाया।

मुजफ्फरनगर में ‘पुलिस की पाठशाला’ के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया जागरूकता का संदेश आज के डिजिटल और तेज रफ्तार जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है। साइबर ठगी से बचने के लिए OTP, UPI PIN, पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी को गोपनीय रखना, संदिग्ध कॉल या लिंक पर भरोसा न करना तथा साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करना जरूरी है। इसी तरह सड़क पर हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों का पालन करना, नाबालिगों को वाहन न चलाने देना तथा ड्राइविंग के दौरान मोबाइल और स्टंटबाजी से बचना भी सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जागरूक विद्यार्थी न केवल खुद सुरक्षित रह सकते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज तक भी इन सावधानियों का संदेश पहुंचा सकते हैं।

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