सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के जाली नोट! पाकिस्तान कनेक्शन की जांच में जुटी NIA, बैंक से लेकर सप्लायर तक खंगाली जा रही पूरी कड़ी
News-Desk
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29 अगस्त 2026 को मामला सामने आने के बाद शुरू हुई जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट करेंसी चेस्ट तक आखिर पहुंचे कैसे। प्रारंभिक जांच में बैंक से जुड़े कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की भूमिका संदिग्ध सामने आई, जिसके बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में कथित पाकिस्तान कनेक्शन के संकेत मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पहलू पर जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों की एजेंसियां तस्दीक कर रही हैं। इसलिए पाकिस्तान या किसी पाकिस्तानी एजेंसी की भूमिका को इस समय अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के बजाय जांच के दायरे में मौजूद आरोप/कनेक्शन के रूप में देखना उचित होगा।
मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और NIA कथित नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
17.29 करोड़ के जाली नोट मिलने से मचा हड़कंप
सहारनपुर की पंजाब नेशनल बैंक करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलना अपने आप में बेहद गंभीर मामला है। जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम के जाली नोट बैंकिंग प्रणाली से जुड़े परिसर तक कैसे पहुंच गए।
29 अगस्त को पुलिस को करेंसी चेस्ट में नकली भारतीय मुद्रा होने की सूचना मिली थी। जांच के दौरान बरामद जाली नोटों का कुल अंकित मूल्य 17.29 करोड़ रुपये बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बरामद नकली नोटों में 500 रुपये के नोट शामिल हैं।
मामला सामने आने के बाद बैंक के स्तर पर भी कार्रवाई हुई और कुछ कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में आई। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामला केवल बाजार में नकली नोट चलाने वाले किसी छोटे स्थानीय गिरोह तक सीमित नहीं हो सकता।
NIA ने संभाली जांच, अब खुल सकती हैं कई परतें
मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA ने सितंबर की शुरुआत में जांच अपने हाथ में ली। रिपोर्टों के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को एजेंसी ने मामले को री-रजिस्टर कर जांच शुरू की।
NIA की जांच का फोकस अब केवल बरामद नोटों तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोटों का स्रोत क्या था, उन्हें किसने तैयार या उपलब्ध कराया, उन्हें सहारनपुर तक कौन लेकर आया और बैंक की करेंसी चेस्ट में पहुंचाने के लिए किस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।
इसके साथ ही बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका और बाहरी नेटवर्क के बीच किसी संपर्क की भी जांच की जा रही है।
बैंक की करेंसी चेस्ट तक नकली नोट पहुंचना सबसे बड़ा सवाल
Saharanpur PNB Fake Currency Case में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि नकली नोट आम बाजार से होते हुए बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।
करेंसी चेस्ट सामान्य तौर पर बैंकिंग प्रणाली में बड़ी मात्रा में नकदी के भंडारण और वितरण से जुड़ी व्यवस्था होती है। ऐसे स्थान पर करोड़ों रुपये के नकली नोटों का मिलना जांच एजेंसियों के लिए कई सवाल खड़े करता है।
क्या नकली नोट किसी वैध नकदी के साथ मिलाकर लाए गए? क्या किसी कर्मचारी ने जानबूझकर उन्हें सिस्टम में प्रवेश दिलाया? क्या बाहर से नकदी लाने वाले किसी नेटवर्क की भूमिका थी? या फिर करेंसी चेस्ट से जुड़ी किसी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया?
इन सभी सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।
पाकिस्तान कनेक्शन की जांच ने मामले को बनाया और गंभीर
इस मामले में सबसे संवेदनशील पहलू कथित पाकिस्तान कनेक्शन है। जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि एजेंसियों को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे नकली नोटों के नेटवर्क के सीमा पार संबंधों की संभावना की जांच की जा रही है।
हालांकि, जांच एजेंसी अभी इन साक्ष्यों की पुष्टि और अन्य सबूत जुटाने में लगी है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरी नकली करेंसी निश्चित रूप से पाकिस्तान से आई थी या किसी विशेष पाकिस्तानी एजेंसी ने इसे संचालित किया था।
यदि जांच में सीमा पार नेटवर्क के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो मामले का दायरा स्थानीय अपराध से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं तक जा सकता है।
ISI का नाम भी जांच के संभावित एंगल में
रिपोर्टों में यह दावा सामने आया है कि नकली करेंसी के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, इस तरह के दावे की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य और एजेंसी की आधिकारिक जांच आवश्यक होगी।
नकली भारतीय मुद्रा को भारत की अर्थव्यवस्था में खपाने की कोशिश यदि किसी संगठित सीमा पार नेटवर्क से जुड़ी साबित होती है, तो इसे सामान्य आपराधिक गतिविधि की तुलना में कहीं अधिक गंभीर माना जाएगा।
फिलहाल NIA द्वारा जांच जारी है और एजेंसी साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने में लगी है।
नेपाल बॉर्डर से जुड़े पुराने नकली नोट मामलों से भी जोड़ी जा रही कड़ियां
जांच के दौरान ऐसे पुराने मामलों का भी संदर्भ सामने आया है, जिनमें उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोट नेपाल सीमा के रास्ते भारत में पहुंचने की बात सामने आई थी।
ऐसे ही एक मामले में कासगंज निवासी दो युवकों को उत्तर प्रदेश ATS ने गिरफ्तार किया था। रिपोर्टों में बताया गया कि उन मामलों में बरामद नकली नोटों की गुणवत्ता सामान्य जाली नोटों से बेहतर थी और उनमें सुरक्षा धागा भी मौजूद था।
हालांकि, किसी पुराने मामले और सहारनपुर के मौजूदा मामले के बीच सीधा संबंध तभी माना जा सकता है जब जांच एजेंसी उसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए।
इसी वजह से जांच एजेंसियां नकली नोटों की गुणवत्ता, डिजाइन, सुरक्षा विशेषताओं और संभावित स्रोत की भी तुलना कर सकती हैं।
जाली नोटों की क्वालिटी ने बढ़ाई चिंता
इस मामले में सामने आई एक महत्वपूर्ण बात नकली नोटों की गुणवत्ता से जुड़ी है।
बताया गया है कि बरामद करेंसी सामान्य स्तर की नकली करेंसी नहीं थी। रिपोर्टों में सुरक्षा धागे सहित कुछ सुरक्षा विशेषताओं के मौजूद होने का भी उल्लेख किया गया है।
यदि बड़ी संख्या में ऐसे नोट तैयार किए जाते हैं जो पहली नजर में असली मुद्रा से मिलते-जुलते हों, तो उन्हें बैंकिंग और बाजार प्रणाली में पहचानना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसी वजह से फोरेंसिक और तकनीकी जांच इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मुकेश कुमार पहले भी जाली नोट के मामले में गिरफ्तार हो चुका था
जांच में सामने आए नामों में मुकेश कुमार भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्टों के अनुसार, मुकेश को वर्ष 2024 में भी नकली नोटों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।
उस समय उसके पास कथित तौर पर करीब दो लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए थे और उसके दो साथियों को भी पकड़ा गया था।
बाद में मुकेश जमानत पर बाहर आ गया था।
अब एक बार फिर उसका नाम करोड़ों रुपये के जाली नोटों से जुड़े मामले में सामने आने के बाद जांच एजेंसियां उसके पुराने नेटवर्क और मौजूदा मामले के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।
2024 की गिरफ्तारी के बाद फिर सक्रिय हुआ था नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के सामने अब यह सवाल भी हो सकता है कि यदि मुकेश पहले से नकली नोटों से जुड़े मामले में जांच के दायरे में आ चुका था तो वह दोबारा इस तरह की गतिविधि में कैसे शामिल हुआ।
क्या पुराने संपर्क फिर सक्रिय हुए थे? क्या जमानत पर बाहर आने के बाद उसने नए लोगों के साथ नेटवर्क तैयार किया? क्या मौजूदा मामले में शामिल अन्य आरोपी पहले से उसके संपर्क में थे?
इन सवालों का जवाब पूछताछ और डिजिटल तथा वित्तीय साक्ष्यों से मिल सकता है।
किसी आरोपी का पहले किसी मामले में गिरफ्तार होना अपने आप में मौजूदा मामले में दोष सिद्ध नहीं करता। मौजूदा प्रकरण में उसकी भूमिका का निर्धारण जांच और अदालत की प्रक्रिया से होगा।
अब सप्लायर तक पहुंचने की कोशिश
जांच का अगला महत्वपूर्ण सिरा कथित सप्लायर तक पहुंचने का है।
रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसियों को उस व्यक्ति या नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली है, जो कथित तौर पर मुकेश को नकली नोट उपलब्ध कराता था। अब उसकी तलाश की जा रही है।
यदि कथित सप्लायर तक जांच एजेंसी पहुंचती है तो नकली नोटों की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
यानी जांच केवल यह जानने तक सीमित नहीं है कि बैंक में नकली नोट किसने जमा किए, बल्कि एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन नोटों का स्रोत कहां था और बीच में कौन-कौन लोग जुड़े थे।
NIA ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया
मामले में NIA की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ी है। उपलब्ध हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुकेश कुमार और राजेंद्र कुमार सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा PNB करेंसी चेस्ट से जुड़े संविदा ड्राइवर आदेश चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया था।
बाद में हरिद्वार क्षेत्र से नीटू की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने उसे पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों का करीबी सहयोगी बताया है।
इस तरह जांच का नेटवर्क सहारनपुर से निकलकर हरिद्वार और दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
बैंक अधिकारी भी जांच के घेरे में
मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका ने जांच को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआती जांच में बैंक के तीन कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी और उन्हें निलंबित किया गया। बाद में NIA ने फरार चल रहे बैंक अधिकारी अमित कुमार को गिरफ्तार किया।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि बैंकिंग प्रक्रिया के किस स्तर पर कथित अनियमितता हुई और क्या किसी कर्मचारी ने जानबूझकर नकली नोटों को करेंसी चेस्ट तक पहुंचने में सहायता की।
करेंसी चेस्ट की व्यवस्था और पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
NIA की जांच में बैंक के पुराने रिकॉर्ड, नकदी से जुड़े दस्तावेज और लेन-देन के पैटर्न भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जांच एजेंसी यह देख सकती है कि संदिग्ध अवधि में करेंसी चेस्ट में नकदी की आवाजाही किस प्रकार हुई। कौन-कौन कर्मचारी किन जिम्मेदारियों पर थे और किस स्तर पर नकदी की गिनती, जांच और भंडारण किया गया।
यदि किसी विशेष तारीख या बैच में असामान्य गतिविधि दिखाई देती है तो वह जांच की दिशा को और स्पष्ट कर सकती है।
क्या नकली नोट बैंकिंग सिस्टम में खपाने की कोशिश थी?
Saharanpur PNB Fake Currency Case का एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इन नोटों को सीधे बैंकिंग सिस्टम में खपाने की कोई सुनियोजित कोशिश की गई थी।
इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोटों का मिलना यह संकेत जरूर देता है कि जांच एजेंसियों को केवल व्यक्तिगत स्तर के अपराध से आगे देखना होगा। हालांकि, किसी बड़े नेटवर्क या सुनियोजित साजिश की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली नोटों को बैंक की करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कितने लोग काम कर रहे थे।
17 करोड़ की रकम ने बढ़ाई राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता
नकली भारतीय मुद्रा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है। यदि किसी संगठित नेटवर्क द्वारा बड़ी मात्रा में जाली मुद्रा तैयार करके उसे असली मुद्रा के साथ अर्थव्यवस्था में डालने की कोशिश की जाती है, तो इससे वित्तीय प्रणाली पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
इसी वजह से बड़े नकली नोट मामलों की जांच में पुलिस के अलावा केंद्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हो सकती हैं।
सहारनपुर के मामले में NIA के शामिल होने से जांच का दायरा स्थानीय स्तर से आगे बढ़ चुका है।
सहारनपुर से हरिद्वार तक जुड़ रही जांच की कड़ियां
मामले में गिरफ्तारियों का दायरा सहारनपुर के अलावा उत्तराखंड के हरिद्वार क्षेत्र तक पहुंचा है। नीतू की गिरफ्तारी और पहले से गिरफ्तार आरोपियों के कथित संपर्कों की जांच से एजेंसियां नेटवर्क की भौगोलिक पहुंच समझने की कोशिश कर रही हैं।
यदि जांच में अन्य राज्यों या सीमा पार संपर्कों के प्रमाण मिलते हैं, तो आगे और गिरफ्तारियां तथा पूछताछ हो सकती है।
जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल—नोट आए कहां से?
करोड़ों रुपये की नकली करेंसी बरामद होने के बाद जांच का सबसे सीधा सवाल यही है—इतने बड़े पैमाने पर नकली नोट आखिर आए कहां से?
इसके बाद दूसरा सवाल है—उन्हें सहारनपुर तक कौन लेकर आया?
तीसरा सवाल—बैंक के अंदर उन्हें जमा या शामिल करने में किसकी भूमिका थी?
और चौथा—क्या इसके पीछे केवल स्थानीय नेटवर्क था या किसी बड़े अंतरराज्यीय अथवा सीमा पार नेटवर्क का हाथ था?
NIA की मौजूदा जांच इन्हीं सवालों के जवाब खोजने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पाकिस्तान कनेक्शन साबित हुआ तो मामला और गंभीर हो सकता है
यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त और न्यायिक रूप से टिकाऊ साक्ष्य मिलते हैं कि नकली नोटों की सप्लाई किसी सीमा पार नेटवर्क से हुई थी, तो मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अधिक गंभीर हो जाएगा।
लेकिन इस स्तर पर पाकिस्तान या ISI की भूमिका को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। अभी जांच एजेंसी कथित कनेक्शन से जुड़े साक्ष्यों की पुष्टि कर रही है।
अंतिम तस्वीर तभी सामने आएगी जब जांच पूरी होगी और संबंधित एजेंसी अदालत में अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगी।
आज सहारनपुर, कल कहीं और? जांच का दायरा इसलिए बढ़ रहा
नकली करेंसी नेटवर्क आम तौर पर किसी एक स्थान तक सीमित रहने के बजाय कई शहरों, राज्यों और संपर्कों से जुड़ा हो सकता है। यही वजह है कि NIA अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों और संभावित सप्लायर तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
यदि किसी आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक खातों, यात्रा विवरण या संपर्कों से नई जानकारी सामने आती है तो जांच और आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल एजेंसी का लक्ष्य पूरे नेटवर्क की कड़ी जोड़ना और फरार या संदिग्ध लोगों तक पहुंचना बताया जा रहा है।
अब आगे किन लोगों पर हो सकती है नजर?
जांच के मौजूदा चरण में सप्लायर, बैंक से जुड़े संदिग्ध कर्मचारी और गिरफ्तार आरोपियों के संपर्कों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि नकली नोटों की खेप कब और कैसे सहारनपुर पहुंची।
यदि किसी वाहन, मोबाइल नंबर, बैंक खाते, डिजिटल भुगतान, यात्रा रिकॉर्ड या अन्य तकनीकी साक्ष्य से कड़ी जुड़ती है तो एजेंसी उसके आधार पर आगे कार्रवाई कर सकती है।
सिर्फ नकली नोट नहीं, पूरे नेटवर्क की तलाश
सहारनपुर PNB Fake Currency Case अब केवल 17.29 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने की घटना नहीं रह गया है। जांच का मुख्य केंद्र उस कथित नेटवर्क की तलाश है जिसने इन नोटों को बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंचाया।
NIA की कार्रवाई से संकेत मिलता है कि एजेंसी बैंक कर्मचारियों, बाहरी आरोपियों, कथित सप्लायर और संभावित सीमा पार संपर्कों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
मामले में आगे और गिरफ्तारियां होती हैं या नहीं और कथित पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
सहारनपुर के 17.29 करोड़ के जाली नोट मामले में अब हर कड़ी पर नजर
सहारनपुर की PNB करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के बाद शुरू हुई जांच अब कई स्तरों पर फैल चुकी है। NIA ने मामले को अपने हाथ में लेकर गिरफ्तारियां की हैं और बैंक कर्मचारियों से लेकर कथित बाहरी नेटवर्क तक की भूमिका जांची जा रही है।
मुकेश कुमार की पहले की गिरफ्तारी, बैंक से जुड़े कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका, संविदा ड्राइवर आदेश चौधरी की गिरफ्तारी, राजेंद्र कुमार और नीतू जैसे आरोपियों से पूछताछ तथा कथित सप्लायर की तलाश—ये सभी कड़ियां जांच को एक बड़े नेटवर्क की दिशा में ले जा रही हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच जारी है। कथित पाकिस्तान कनेक्शन और ISI की भूमिका जैसे गंभीर दावों की पुष्टि जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्यों से होनी बाकी है। इसी तरह किसी आरोपी की भूमिका भी अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोप के स्तर पर ही मानी जाएगी।

