72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में भावुक हुए सितारे, sanjay mishra ने पिता को किया याद; कार्तिक आर्यन बोले- ‘फीलिंग अनरियल है’
72nd National Film Awards की सेरेमनी मंगलवार को गुजरात में आयोजित हुई, जहां भारतीय सिनेमा के कई चर्चित कलाकारों और फिल्मकारों को उनके काम के लिए सम्मानित किया गया। पुरस्कार समारोह में चमक-दमक के बीच कई ऐसे पल भी आए, जब विजेता अपनी उपलब्धि को याद करते हुए भावुक हो गए।
सीनियर अभिनेता sanjay mishra के लिए यह सम्मान खास तौर पर भावनाओं से भरा रहा। फिल्म ‘भक्षक’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। करीब 35 वर्षों से टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय संजय मिश्रा के करियर में यह पहला नेशनल अवॉर्ड है।
अवॉर्ड मिलने के बाद जब उनसे पूछा गया कि वह इस सम्मान को किसके नाम करना चाहते हैं, तो उन्होंने अपने पिता शंभूनाथ मिश्रा का नाम चुना। इसके पीछे उनके परिवार और पिता के साथ जुड़ी कई यादें हैं।
संजय मिश्रा ने यह भी बताया कि जब उन्होंने अपनी मां को नेशनल अवॉर्ड मिलने की जानकारी दी, तो मां ने सबसे पहले उनसे पूछा कि उन्होंने खाना खाया या नहीं। यही बात संजय के लिए इस बड़े सम्मान के बीच सबसे भावुक और घरेलू पल बन गई।
वहीं ‘मैदान’ के गाने ‘जाने दो’ के लिए बेस्ट लिरिक्स का पुरस्कार जीतने वाले मनोज मुंतशिर ने भी एक पुरानी बात याद की। उन्होंने बताया कि जब यह गीत बनाया जा रहा था, उसी समय संगीतकार ए.आर. रहमान ने उनसे कहा था कि यह गाना नेशनल अवॉर्ड जीतेगा। उस समय उन्होंने इसे एक तारीफ के रूप में लिया था, लेकिन बाद में वही बात सच साबित हुई।
संजय मिश्रा का पहला नेशनल अवॉर्ड, पिता के नाम किया सम्मान
फिल्म ‘भक्षक’ में संजय मिश्रा के अभिनय को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के सम्मान से नवाजा गया। यह उनके लंबे करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है।
अवॉर्ड मिलने के बाद संजय मिश्रा ने सबसे पहले फिल्म के निर्देशक का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वह उस डायरेक्टर को धन्यवाद देना चाहेंगे, जिन्होंने उन्हें ऐसी फिल्म में काम करने का अवसर दिया।
इसके बाद उन्होंने रेड चिलीज का शुक्रिया अदा किया, जो इस तरह की फिल्मों को प्रमोट करता है। उन्होंने अपनी को-स्टार भूमि पेडनेकर का भी जिक्र किया और कहा कि उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशा अच्छा रहा है।
संजय मिश्रा ने भूमि पेडनेकर के साथ पहले ‘दम लगा के हईशा’ में काम किया था, जिसे भी काफी सराहना मिली थी। ‘भक्षक’ में दोनों की दोबारा साथ काम करने की बात करते हुए संजय ने कहा कि उनके साथ काम करने में अलग तरह का आनंद आता है।
उन्होंने ‘भक्षक’ की कहानी को असल जिंदगी से जुड़ी कहानी बताते हुए कहा कि कलाकारों को केवल अपनी बात कहने के बजाय अपने काम के जरिए बोलना चाहिए। उनके मुताबिक उन्होंने फिल्म में मिली जिम्मेदारी को निभाने की कोशिश की।
अवॉर्ड पर लिखा पिता का नाम, संजय मिश्रा ने साझा की खास याद
जब संजय मिश्रा से पूछा गया कि वह अपना नेशनल अवॉर्ड किसे समर्पित करना चाहते हैं, तो उन्होंने अपने पिता शंभूनाथ मिश्रा का नाम लिया।
संजय ने बताया कि उनसे पूछा गया था कि अवॉर्ड पर किसका नाम लिखवाना चाहेंगे। उन्होंने अपने नाम के साथ पिता का नाम ‘संजय शंभूनाथ मिश्रा’ लिखवाने का फैसला किया।
उन्होंने अपने पिता के पेशेवर जीवन का भी जिक्र किया। संजय के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय उनके परिवार की जिंदगी से भी जुड़ा रहा, क्योंकि उनके पिता की नौकरी और वेतन का संबंध इसी व्यवस्था से था। उन्होंने प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB में भी अपने पिता के काम करने की बात याद की।
एक राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद पिता को याद करना संजय मिश्रा के लिए केवल औपचारिक समर्पण नहीं था, बल्कि उनके सफर से जुड़ी पारिवारिक स्मृतियों को सामने लाने वाला क्षण था।
मां ने अवॉर्ड से पहले पूछा- खाना खाया कि नहीं?
नेशनल अवॉर्ड जीतने के बाद संजय मिश्रा ने अपनी मां से हुई बातचीत का जिक्र किया तो समारोह की गंभीरता के बीच माहौल भावुक भी हुआ और हल्का-फुल्का भी।
संजय ने मां के अंदाज में उनकी बात बताते हुए कहा कि मां ने उन्हें बधाई देने के साथ सबसे पहले यह पूछा कि उन्होंने खाना खाया या नहीं। मां को चिंता थी कि कार्यक्रम काफी देर तक चला होगा और वहां उन्हें खाना मिला भी या नहीं।
इसके साथ ही उनकी मां ने यह भी कहा कि अगर उनके पिता आज होते तो उन्हें बहुत अच्छा लगता।
यही एक वाक्य संजय मिश्रा के लिए इस पुरस्कार की भावनात्मक अहमियत को और बढ़ा देता है। जिस व्यक्ति के नाम पर उन्होंने अवॉर्ड लिखवाया, उसी पिता को उनकी मां ने भी इस उपलब्धि के मौके पर याद किया।
पत्नी के साथ पहुंचे संजय मिश्रा, बोले- अब घर में थोड़ी इज्जत बढ़ जाएगी
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में संजय मिश्रा अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे। जब उनसे पत्नी की मौजूदगी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने अंदाज में मजाकिया जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि अब घर में थोड़ी इज्जत बढ़ जाएगी, वरना वह पूछते हैं कि पति आखिर किस काम के हैं।
संजय मिश्रा की यही सहजता समारोह के दौरान भी दिखाई दी। इतने बड़े राष्ट्रीय सम्मान के बावजूद उन्होंने अपनी बातचीत में परिवार, माता-पिता और अपने साथ काम करने वाले लोगों को प्रमुखता दी।
मनोज मुंतशिर को ‘जाने दो’ के लिए बेस्ट लिरिक्स अवॉर्ड
हिंदी फिल्म ‘मैदान’ के गीत ‘जाने दो’ के लिए मनोज मुंतशिर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट लिरिक्स का पुरस्कार मिला।
मनोज ने इस गीत के बनने की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि गाना चेन्नई में ए.आर. रहमान के स्टूडियो में तैयार किया जा रहा था। रात के करीब 3 बजे रहमान ने उन्हें धुन सुनाई।
मनोज के मुताबिक धुन ऐसी थी कि भावनाएं अपने आप उमड़ने लगीं। स्टूडियो की छत पर एक झूला था और वह उस पर बैठ गए। वहीं उन्होंने गीत की शुरुआती पंक्तियां लिखीं।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वह नीचे आए और अपनी लिखी पंक्तियां ए.आर. रहमान को सुनाईं। वहां बोनी कपूर और फिल्म के निर्देशक अमित शर्मा भी मौजूद थे।
मनोज ने बताया कि उनकी पंक्तियां सुनने के बाद रहमान ने उनसे कहा था कि यह नेशनल अवॉर्ड वाला गीत है।
ए.आर. रहमान की बात उस समय मजाक जैसी लगी, बाद में सच हुई
मनोज मुंतशिर ने कहा कि जब ए.आर. रहमान ने उस समय गीत को नेशनल अवॉर्ड मिलने की बात कही थी, तब उन्होंने केवल मुस्कुराकर उस बात को लिया था।
उन्होंने नहीं सोचा था कि वास्तव में यह गीत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करेगा। लेकिन बाद में वही बात सच हो गई।
एक गीतकार के लिए उस रचना को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना खास उपलब्धि होती है, खासकर तब जब गीत के बनने के शुरुआती क्षणों में ही किसी वरिष्ठ संगीतकार ने उसकी क्षमता को पहचान लिया हो।
मनोज ने इस अवसर पर अपने दर्शकों और पाठकों से भी एक भावुक वादा किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने उनसे जो उम्मीदें लगा रखी हैं, वह उन्हें टूटने नहीं देंगे।
मनोज मुंतशिर ने पत्नी नीलम मुंतशिर को किया अवॉर्ड समर्पित
मनोज मुंतशिर ने अपना नेशनल अवॉर्ड पत्नी नीलम मुंतशिर को समर्पित किया।
उन्होंने अपने जीवन के उस दौर को याद किया जब पहला अवॉर्ड मिलने के बाद और इस दूसरे सम्मान के बीच कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें उनकी पत्नी नीलम एक साथी के रूप में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं।
मनोज ने कहा कि उनकी नजर में पत्नी ही इंसान की सबसे करीबी दोस्त होती है। इसलिए उन्होंने इस उपलब्धि को अपनी पत्नी के नाम किया।
यह उनके लिए केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि उन निजी संघर्षों और रिश्तों की याद भी था, जो किसी कलाकार की सार्वजनिक सफलता के पीछे छिपे रहते हैं।
‘आज की रात’ के लिए विजय गांगुली को बेस्ट कोरियोग्राफी अवॉर्ड
फिल्म ‘स्त्री 2’ के लोकप्रिय गीत ‘आज की रात’ के लिए विजय गांगुली को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कोरियोग्राफी का सम्मान मिला।
इस गाने में तमन्ना भाटिया नजर आई थीं और इसके डांस मूव्स ने दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की थी।
अवॉर्ड मिलने के बाद विजय गांगुली ने कहा कि वह अभी भी इस सम्मान को पूरी तरह महसूस नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझने में शायद दो-तीन दिन लगेंगे कि यह पुरस्कार वास्तव में उनके हाथ में है।
विजय ने तमन्ना भाटिया को भी इस सफलता का बड़ा श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने तमन्ना को संदेश भेजकर बताया कि इस पुरस्कार का क्रेडिट उन्हें भी जाता है।
उनके मुताबिक यदि तमन्ना वे स्टेप्स उस तरह नहीं कर पातीं, जैसे उन्हें सिखाया गया था, तो शायद यह परिणाम नहीं आता।
बच्चों को ‘आज की रात’ पर डांस करते देख भावुक हुए विजय गांगुली
विजय गांगुली ने पुरस्कार मिलने के बाद एक और अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने छोटे बच्चों को ‘आज की रात’ पर डांस करते हुए वीडियो देखा तो उन्हें बहुत खुशी हुई।
एक कोरियोग्राफर के लिए अपने बनाए हुए स्टेप्स को लोगों और खासकर बच्चों द्वारा अपनाते देखना एक अलग तरह का अनुभव होता है।
विजय ने इस सम्मान को एक कलाकार के सपने जैसा बताया। उनके लिए यह पुरस्कार केवल ट्रॉफी नहीं बल्कि उनके काम को मिली राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है।
कार्तिक आर्यन का पहला नेशनल अवॉर्ड, बोले- फीलिंग अनरियल है
फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। यह उनके करियर का पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है।
सेरेमनी के बाद कार्तिक ने अपनी खुशी और भावनाओं को साझा करते हुए कहा कि वह बहुत खुश हैं और इस समय पूरी फैमिली उनके साथ है।
उन्होंने इस पल को बेहद भावुक बताया और कहा कि यह उनके लिए एक तरह की अनरियल फीलिंग है। उनके मुताबिक वह अपनी भावनाओं को ठीक से शब्दों में व्यक्त भी नहीं कर पा रहे थे।
कार्तिक के लिए यह सम्मान उनके अभिनय करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। ‘चंदू चैंपियन’ में उन्होंने एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया था और फिल्म के लिए उनकी शारीरिक तथा अभिनय तैयारी भी चर्चा में रही थी।
‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान
आदित्य धर की फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान मिला।
अवॉर्ड पर प्रतिक्रिया देते हुए आदित्य धर ने कहा कि वह इसे भारत को समर्पित करना चाहेंगे। उनके मुताबिक ऐसी फिल्में देश को प्रस्तुत करती हैं और अलग-अलग विचारों के बावजूद फिल्म की अपनी पहचान है।
‘आर्टिकल 370’ का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। फिल्म से जुड़े कई कलाकारों और तकनीकी सदस्यों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान मिला।
शाश्वत सचदेव को दूसरी बार मिला नेशनल अवॉर्ड
‘आर्टिकल 370’ के लिए शाश्वत सचदेव को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (सॉन्ग्स) का पुरस्कार मिला।
शाश्वत के लिए यह दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है। इससे पहले उन्हें ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के लिए बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।
दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद शाश्वत ने अपने सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि वह राजस्थान के एक मिडिल क्लास परिवार में पले-बढ़े और लोगों के आशीर्वाद तथा समर्थन ने उन्हें यहां तक पहुंचाया।
उन्होंने यह पुरस्कार अपने माता-पिता और पत्नी को समर्पित किया।
मिडिल क्लास परिवार से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर
शाश्वत सचदेव की प्रतिक्रिया में उनके निजी सफर की झलक भी दिखाई दी। उन्होंने खुद को राजस्थान से आए एक ऐसे लड़के के रूप में याद किया, जिसने मिडिल क्लास परिवार में परवरिश पाई और आज राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के मंच तक पहुंचा।
किसी कलाकार के लिए ऐसी उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सम्मान नहीं होती। इसके पीछे परिवार, प्रशिक्षण, संघर्ष, अवसर और लंबे समय तक किए गए काम का योगदान होता है।
शाश्वत ने अपने पुरस्कार को अपने माता-पिता और पत्नी को समर्पित करके इस व्यक्तिगत सफर में परिवार की भूमिका को रेखांकित किया।
‘मैं निदा’ को मिला बेस्ट आर्ट्स एंड कल्चर फिल्म का अवॉर्ड
दिवंगत शायर निदा फाजली के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट आर्ट्स एंड कल्चर फिल्म का पुरस्कार मिला।
इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माता अतुल गंगवार लंबे समय तक निदा फाजली के करीबी रहे। पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं को शब्दों में बयान करना मुश्किल है।
उन्होंने इस सम्मान को सिनेमा के क्षेत्र में मिलने वाले महत्वपूर्ण सम्मानों में से एक बताया और कहा कि इस तरह का पुरस्कार मिलना किसी भी फिल्मकार के लिए खुशी की बात है।
निदा फाजली की लेखनी को याद करते हुए भावुक हुए अतुल गंगवार
अतुल गंगवार ने निदा फाजली की विरासत और उनके साहित्यिक योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि निदा साहब ने ग्वालियर और मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया।
उन्होंने पूर्व में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निदा फाजली की एक रचना की पंक्तियों का उल्लेख किए जाने की बात भी याद की।
अतुल गंगवार के लिए यह पुरस्कार केवल डॉक्यूमेंट्री को मिला सम्मान नहीं था, बल्कि निदा फाजली के जीवन और उनकी साहित्यिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान भी थी।
आनंद एल. राय को ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ के लिए सम्मान
फिल्मकार आनंद एल. राय को हिंदी नॉन-फीचर फिल्म ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ के लिए बेस्ट डायरेक्शन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
आनंद एल. राय मुख्य रूप से फीचर फिल्मों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट ने उन्हें एक अलग तरह के सिनेमाई अनुभव का अवसर दिया।
उन्होंने कहा कि अपनों के बीच होना हमेशा अच्छा लगता है, लेकिन इतना बड़ा सम्मान मिलना उनके लिए सौभाग्य और खुशी का विषय है।
उन्होंने बताया कि उन्हें सरदार वल्लभभाई पटेल और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का अवसर मिला। इस काम के दौरान उन्हें पटेल के बारे में पहले से जितना पता था, उससे कहीं अधिक जानने और समझने का मौका मिला।
आनंद एल. राय बोले- इस उम्र में भी सीखना बंद नहीं होता
आनंद एल. राय ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री बनाने के अनुभव ने उन्हें यह समझाया कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर सीखना बंद नहीं होता।
उन्होंने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री ने उन्हें पुरस्कार तो दिया ही, लेकिन साथ में बहुत कुछ सिखाया भी।
आनंद एल. राय के मुताबिक अक्षय कुमार ने उनसे इस तरह की डॉक्यूमेंट्री बनाने के बारे में पूछा था। इसके बाद उन्होंने विषय पर रिसर्च की, टीम के साथ बैठकर काम किया और गुजरात आकर प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।
उन्होंने अपना पुरस्कार देश को समर्पित करने की इच्छा जताई।
एक ही समारोह में अभिनय से लेकर गीत और डॉक्यूमेंट्री तक सम्मान
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड की खासियत यह रही कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले कलाकारों और फिल्मकारों को सम्मान मिला।
अभिनय की श्रेणी में संजय मिश्रा और कार्तिक आर्यन जैसे नाम चर्चा में रहे। गीत लेखन के लिए मनोज मुंतशिर को सम्मान मिला, जबकि कोरियोग्राफी के लिए विजय गांगुली को पुरस्कार मिला।
संगीत के क्षेत्र में शाश्वत सचदेव को दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान मिला। वहीं डॉक्यूमेंट्री और नॉन-फीचर सिनेमा से जुड़े अतुल गंगवार और आनंद एल. राय ने भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की।
इस तरह समारोह में भारतीय सिनेमा के अलग-अलग रूपों को सम्मानित होते देखा गया।
संजय मिश्रा से कार्तिक आर्यन तक, हर विजेता की अपनी कहानी
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मंच पर मौजूद विजेताओं की उपलब्धियां भले अलग-अलग फिल्मों और श्रेणियों से जुड़ी थीं, लेकिन उनकी प्रतिक्रियाओं में एक समान बात दिखाई दी—परिवार और सफर की याद।
संजय मिश्रा ने अपने पिता को याद किया। उनकी मां की पहली चिंता खाने को लेकर थी। मनोज मुंतशिर ने अपनी पत्नी को पुरस्कार समर्पित किया और ए.आर. रहमान के साथ गीत बनने की पुरानी याद साझा की।
विजय गांगुली ने तमन्ना भाटिया को अपने पुरस्कार की सफलता में अहम भागीदार बताया। कार्तिक आर्यन ने अपनी फैमिली के साथ इस पल को साझा किया और इसे अनरियल बताया।
शाश्वत सचदेव ने माता-पिता और पत्नी को याद किया। अतुल गंगवार ने निदा फाजली की विरासत को सामने रखा और आनंद एल. राय ने देश को सम्मान समर्पित करने की बात कही।
नेशनल अवॉर्ड की चमक के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किसी भी कलाकार के लिए बड़ा सम्मान माना जाता है, लेकिन समारोह में सामने आई प्रतिक्रियाओं ने यह भी दिखाया कि पुरस्कार तक पहुंचने के पीछे केवल एक फिल्म का काम नहीं होता।
संजय मिश्रा का करीब 35 वर्षों का करियर रहा है और उन्हें पहला राष्ट्रीय पुरस्कार अब मिला। कार्तिक आर्यन के लिए भी यह पहला नेशनल अवॉर्ड है। शाश्वत सचदेव ने दूसरी बार यह सम्मान हासिल किया, जबकि मनोज मुंतशिर और विजय गांगुली ने अपनी-अपनी रचनात्मक विधाओं में राष्ट्रीय पहचान हासिल की।
इन सभी कलाकारों की प्रतिक्रियाओं में अपने परिवार, सहयोगियों और उन लोगों के प्रति आभार दिखाई दिया, जिन्होंने उनके सफर में भूमिका निभाई।
गुजरात में हुआ पुरस्कार समारोह, विजेताओं के लिए यादगार बना दिन
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह गुजरात में आयोजित हुआ। देशभर से जुड़े फिल्मकारों और कलाकारों के लिए यह दिन खास रहा।
पुरस्कार समारोह में मंच पर सम्मान पाने के साथ-साथ विजेताओं ने मीडिया से बातचीत में अपने निजी अनुभव साझा किए। इन्हीं बातचीत में सामने आई भावनाओं ने समारोह को केवल पुरस्कार वितरण कार्यक्रम से आगे एक यादगार अवसर बना दिया।
किसी ने पिता को याद किया, किसी ने पत्नी को, किसी ने मां की चिंता को याद किया और किसी ने अपने देश को पुरस्कार समर्पित किया।
‘भक्षक’ से ‘चंदू चैंपियन’ तक, फिल्मों ने दिलाई राष्ट्रीय पहचान
संजय मिश्रा को ‘भक्षक’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार मिला, जबकि कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला।
दोनों कलाकारों के लिए यह सम्मान अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण रहा। संजय मिश्रा के लिए यह उनके लंबे करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड है, जबकि कार्तिक आर्यन के लिए यह भी पहला राष्ट्रीय पुरस्कार है।
‘भक्षक’ और ‘चंदू चैंपियन’ जैसे अलग विषयों वाली फिल्मों में अभिनय करने वाले कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना इस समारोह की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा।
‘मैदान’ और ‘स्त्री 2’ के गीतों का भी जलवा
राष्ट्रीय पुरस्कारों में केवल अभिनय ही चर्चा का विषय नहीं रहा। ‘मैदान’ के गीत ‘जाने दो’ के लिए मनोज मुंतशिर को बेस्ट लिरिक्स का सम्मान मिला।
वहीं ‘स्त्री 2’ के ‘आज की रात’ गाने के लिए विजय गांगुली को बेस्ट कोरियोग्राफी का पुरस्कार मिला।
एक गीत के शब्द और दूसरे गीत की कोरियोग्राफी—दोनों ने लोकप्रिय सिनेमा के अलग-अलग रचनात्मक पहलुओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में याद रहेंगे ये भावुक पल
इस समारोह में ट्रॉफी हासिल करने से ज्यादा यादगार शायद वे बातें रहीं, जो विजेताओं ने पुरस्कार हाथ में आने के बाद साझा कीं।
संजय मिश्रा के लिए पिता का नाम सबसे ऊपर रहा। उनकी मां का ‘खाना खाया कि नहीं?’ वाला सवाल भी उनके लिए उस रात की खास याद बन गया।
मनोज मुंतशिर के लिए ए.आर. रहमान की पुरानी भविष्यवाणी यादगार रही। विजय गांगुली ने तमन्ना भाटिया को श्रेय दिया। कार्तिक आर्यन ने अपनी फैमिली के साथ इस उपलब्धि को महसूस किया।
शाश्वत सचदेव ने अपने माता-पिता और पत्नी को याद किया। अतुल गंगवार ने निदा फाजली की विरासत को सम्मान से जोड़ा और आनंद एल. राय ने अपने अनुभव को सीखने की प्रक्रिया बताया।
यही वजह है कि 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड का यह समारोह विजेताओं की ट्रॉफियों के साथ-साथ उनकी निजी भावनाओं के लिए भी याद किया जाएगा।

