Rajpal Yadav को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार- “आपकी जगह जेल में है”, 5 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका, 7 अक्टूबर को फिर सुनवाई
बॉलीवुड अभिनेता Rajpal Yadav को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद थी, लेकिन सोमवार की सुनवाई में मामला उनके लिए और मुश्किल होता दिखाई दिया। कोर्ट के आदेश के बावजूद तय रकम जमा नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के रवैये पर बेहद सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट ने साफ कर दिया कि आदेश का पालन नहीं किया गया तो अब जेल जाने की स्थिति से बचना आसान नहीं होगा।
मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने हुई। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से रकम जमा करने को लेकर दलीलें दी गईं, लेकिन कोर्ट इस बात से संतुष्ट नहीं हुआ कि पहले दिए गए आदेश के मुताबिक 5 करोड़ रुपये क्यों जमा नहीं किए गए।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने नाराजगी जताते हुए कहा, “इस घमंड को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।”
कोर्ट की यह टिप्पणी सुनवाई के सबसे अहम हिस्सों में रही। अदालत ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि अब मामले में केवल आश्वासन या समय मांगने से बात नहीं बनेगी और आदेश का पालन करना होगा।
राजपाल यादव को मिला आखिरी मौका, 6 अक्टूबर तक जमा करने होंगे पैसे
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि राजपाल यादव को तत्काल जेल भेजने के बजाय एक आखिरी मौका दिया है। कोर्ट ने उन्हें मंगलवार यानी 6 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
इसका मतलब साफ है कि अभिनेता के पास अब भुगतान की शर्त पूरी करने के लिए बेहद कम समय बचा है। अगर तय समय तक रकम जमा नहीं होती है तो अगली सुनवाई में अदालत उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी राजपाल यादव को भुगतान के लिए समय दे चुका है। 15 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने उन्हें रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। साथ ही सरेंडर करने से मिली उनकी अंतरिम राहत को 5 अक्टूबर तक बढ़ाया गया था।
लेकिन 5 अक्टूबर तक भी अदालत की ओर से तय रकम जमा नहीं हो सकी। यही वजह रही कि सोमवार की सुनवाई में कोर्ट का रुख काफी सख्त दिखाई दिया।
50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी लेकर पहुंचे थे वकील
सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी कोर्ट के सामने रखी गई है। वकील के मुताबिक डिमांड ड्राफ्ट अगले दिन तक दिल्ली पहुंच जाएगा।
इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सवाल किया, “50 लाख रुपये? क्या यह असली भी है?”
अदालत का सवाल इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि केवल किसी दस्तावेज या डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी पेश कर देना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट पहले ही 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दे चुका था और उसके मुताबिक भुगतान होना जरूरी था।
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि राजपाल यादव को 5 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।
यानी कोर्ट के सामने चुनौती केवल यह नहीं थी कि अभिनेता कुछ रकम जमा करने के लिए तैयार हैं या नहीं, बल्कि यह थी कि पहले से दिए गए न्यायिक आदेश के मुताबिक तय रकम वास्तव में जमा हुई या नहीं।
शिकायतकर्ता के वकील ने कहा- कोर्ट में भी ‘एक्टिंग’ कर रहे हैं
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने राजपाल यादव के रवैये पर भी सवाल उठाया। वकील ने आरोप लगाया कि अभिनेता कोर्ट में भी “एक्टिंग” कर रहे हैं और उन्हें अदालत का सम्मान नहीं है।
यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान माहौल को और तीखा बनाने वाली रही। हालांकि अदालत में किसी पक्ष की ओर से की गई टिप्पणी को उसी पक्ष के आरोप या दलील के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अदालत द्वारा प्रमाणित तथ्य के रूप में।
राजपाल यादव की ओर से जब उनके वकील ने यह तर्क दिया कि शिकायतकर्ता गरीब नहीं हैं, तो जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस बागची ने कहा कि शिकायतकर्ता भले ही ज्यादा अमीर हों, लेकिन जिस रकम से उन्हें नुकसान हुआ है, उस हद तक वे गरीब हैं।
कोर्ट की इस टिप्पणी से साफ था कि भुगतान की जिम्मेदारी को शिकायतकर्ता की आर्थिक स्थिति से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। अदालत का ध्यान इस बात पर था कि जिस रकम को लेकर विवाद है, वह शिकायतकर्ता को वापस मिलनी चाहिए।
दो हफ्ते का समय खत्म हो चुका था, फिर क्यों नहीं हुआ भुगतान?
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव को भुगतान के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया था और वह समय अब समाप्त हो चुका है।
राजपाल यादव की ओर से पेश वकील ने भुगतान में देरी की वजह बताते हुए कहा कि बैंक 3-4 दिनों तक बंद थे। हालांकि कोर्ट इस स्पष्टीकरण से भी प्रभावित नहीं हुआ।
अदालत ने कहा कि अगर वास्तव में समय बढ़ाने की जरूरत थी तो इसके लिए अंतरिम आवेदन दाखिल किया जा सकता था।
यानी कोर्ट का सवाल यह था कि जब भुगतान की समय सीमा पूरी हो रही थी और किसी कारण से उसका पालन संभव नहीं था, तो समय रहते अदालत से औपचारिक राहत क्यों नहीं मांगी गई।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि कुल रकम करीब 7.5 करोड़ रुपये है। शिकायतकर्ता ने अदालत से राजपाल यादव को अवमानना का दोषी ठहराए जाने की मांग भी की।
हालांकि इस चरण पर सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता को एक आखिरी मौका दिया और निर्देश दिया कि भुगतान अगले दिन तक किया जाना चाहिए।
राजपाल यादव ने कहा था- पांच बार जेल जाने को तैयार, लेकिन एक पैसा नहीं दूंगा
इस मामले में राजपाल यादव की ओर से पहले दिया गया एक बयान भी काफी चर्चा में रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि वह पांच बार जेल जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन एक पैसा नहीं देंगे।
यही रुख अब अदालत की सख्ती के बीच महत्वपूर्ण हो गया है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही भुगतान की शर्त के साथ उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दे चुका था। लेकिन निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने के बाद अदालत ने दोबारा सख्त रुख अपनाया है।
अब अदालत ने उन्हें आखिरी मौका दिया है। इसलिए 6 अक्टूबर की तारीख इस मामले में बेहद अहम हो गई है। इस तारीख तक भुगतान होता है या नहीं, इसका असर 7 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पड़ सकता है।
16 साल पुराना है पूरा विवाद, 2010 में लिया था 5 करोड़ का फंड
राजपाल यादव से जुड़ा यह मामला नया नहीं है। इसकी शुरुआत करीब 16 साल पहले, यानी 2010 में हुई थी।
शिकायतकर्ता कंपनी के मुताबिक, वर्ष 2010 में राजपाल यादव को उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। फिल्म के निर्देशन और निर्माण से जुड़े राजपाल यादव पर इस रकम को वापस करने की जिम्मेदारी थी।
बाद में दोनों पक्षों के बीच भुगतान को लेकर समझौते हुए और रकम लौटाने के लिए चेक जारी किए गए। लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक इनमें से सात चेक बाउंस हो गए।
यही सात चेक बाद में कानूनी विवाद का आधार बने और मामला अदालत तक पहुंचा।
राजपाल यादव ने फिल्म के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। रकम की वापसी से जुड़े चेक के बाउंस होने के बाद उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।
सात चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए गए थे राजपाल यादव
चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया था। मामला आगे बढ़ते-बढ़ते दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा।
जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों मामलों में उनकी सजा बरकरार रखते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का आदेश दिया था।
इसके बाद राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में उन्हें तत्काल सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी, लेकिन इस राहत के साथ भुगतान की शर्त भी रखी गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि राहत का लाभ भुगतान से जुड़ी शर्तों के अधीन रहेगा।
इसके बाद 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रकम जमा करने के लिए राजपाल यादव को अतिरिक्त समय दिया था।
लेकिन निर्धारित समय में भुगतान की शर्त पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतिम मौका दिया है।
अब 6 अक्टूबर और 7 अक्टूबर की तारीखें क्यों हैं बेहद अहम?
इस मामले में अगले दो दिन राजपाल यादव के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट ने उन्हें 6 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। इसके ठीक अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होनी है।
इसलिए अब पूरा मामला इस बात पर टिका है कि अभिनेता अदालत के निर्देश के मुताबिक रकम जमा करते हैं या नहीं।
एक तरफ उनके वकील की ओर से 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की बात कही गई है, वहीं दूसरी तरफ अदालत का आदेश 5 करोड़ रुपये जमा करने का है। ऐसे में दोनों रकमों के बीच बड़ा अंतर है और यही अंतर सुनवाई के दौरान अदालत की नाराजगी की एक प्रमुख वजह बना।
कोर्ट पहले ही समय दे चुका है। अब अदालत ने साफ कर दिया है कि भुगतान की शर्त को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
राजपाल यादव के लिए मामला सिर्फ पैसे का नहीं, अंतरिम राहत का भी है
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को अंतरिम राहत दी थी, लेकिन वह राहत भुगतान की शर्त के साथ जुड़ी हुई थी। अब जब तय समयसीमा में भुगतान नहीं हुआ, तो अदालत ने सख्ती दिखाई है।
इसलिए अगली सुनवाई में केवल यह नहीं देखा जाएगा कि राजपाल यादव की ओर से कितना पैसा जमा हुआ, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश का कितना पालन किया गया।
फिलहाल अदालत ने अभिनेता को एक और मौका दिया है। 6 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश और 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई इस पुराने चेक बाउंस विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ले आई है। अब देखना होगा कि आखिरी मौके पर भुगतान होता है या कोर्ट का अगला आदेश राजपाल यादव के लिए और मुश्किल स्थिति पैदा करता है।

