Yemen में बाजार पर एयरस्ट्राइक से मची तबाही, 7 की मौत और 40 घायल; बच्चों के भी मारे जाने का दावा, सऊदी-हूती तनाव से फिर बढ़ा युद्ध का खतरा
Yemen ताइज प्रांत के एक बाजार को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में 7 लोगों की मौत होने की खबर है। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। हमले में करीब 40 लोगों के घायल होने का भी दावा किया गया है।
हमले के बाद सामने आई तस्वीरों में बाजार क्षेत्र में धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दे रहा है। कई दुकानों और एक स्टोरेज बिल्डिंग को नुकसान पहुंचने की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। तस्वीरों में कुछ इमारतों की छतें क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही हैं, जबकि बाजार की कई दुकानों पर हमले का असर नजर आ रहा है।
हालांकि, हमले में कितने लोगों की मौत हुई और घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ, इसे लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए मृतकों और घायलों के आंकड़ों को फिलहाल संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
ताइज के बाजार में हमले के बाद उठता दिखा धुएं का गुबार
यमन के ताइज प्रांत में हुए हमले के बाद सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों ने घटना की भयावहता को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है।
तस्वीरों में एक इलाके से कई फीट ऊपर तक धुआं उठता नजर आ रहा है। आसपास मौजूद इमारतों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा दिखाई देता है। एक स्टोरेज बिल्डिंग की छत का हिस्सा बुरी तरह टूटा हुआ नजर आया, जबकि दूसरी तस्वीरों में कई दुकानों को क्षतिग्रस्त बताया गया है।
यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण बाजार, आवासीय क्षेत्र और सार्वजनिक स्थान पहले भी हिंसा की चपेट में आते रहे हैं। ऐसे में किसी बाजार क्षेत्र में हमला होने की खबर स्थानीय लोगों के बीच भय और असुरक्षा को और बढ़ा सकती है।
यमन सरकार का दावा- सैन्य ठिकाने और वाहनों को बनाया गया निशाना
हमले को लेकर यमन की सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यमनी सरकार ने कहा कि उसकी सेना ने हूती सैन्य कैंप और वाहनों को निशाना बनाते हुए हमला किया था।
यमनी सरकार के सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि हूती विद्रोहियों ने हाल ही में बाजार के पास एक सैन्य कैंप स्थापित किया था।
यानी इस हमले को लेकर एक तरफ हूती स्वास्थ्य मंत्रालय नागरिकों की मौत और बाजार को नुकसान पहुंचने की बात कर रहा है, जबकि यमनी सरकार की ओर से इसे हूती सैन्य ठिकानों और वाहनों के खिलाफ की गई कार्रवाई बताया गया है।
युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियों में किसी हमले के वास्तविक लक्ष्य और उसके परिणाम को लेकर पक्षों के दावे अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सामने आने तक सभी दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।
7 मौत और 40 घायल होने का दावा, बच्चों के भी शामिल होने की बात
हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हमले में 7 लोगों की मौत हुई है और करीब 40 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय का दावा है कि मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं।
यदि बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे, तो ऐसी स्थिति में हवाई हमले का प्रभाव गंभीर हो सकता है। दुकानदारों, ग्राहकों, राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए बाजार क्षेत्र अचानक संघर्ष का केंद्र बन सकता है।
यमन जैसे लंबे समय से युद्ध प्रभावित देश में नागरिक आबादी पहले ही आर्थिक और मानवीय संकट का सामना कर रही है। ऐसे में किसी भी नए हमले से स्थानीय लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता
हमले के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियो प्रसारित हुए। इनमें धुएं के बड़े गुबार से लेकर क्षतिग्रस्त दुकानों और इमारतों की तस्वीरें शामिल हैं।
ऐसी तस्वीरें संघर्ष वाले क्षेत्रों में घटनाओं की शुरुआती जानकारी देने में मदद करती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रसारित हर तस्वीर या वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि हमेशा संभव नहीं होती।
इसलिए वायरल तस्वीरों को घटना से जोड़ते समय सावधानी आवश्यक है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ताइज के बाजार में हमले के बाद ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, लेकिन तस्वीरों में दिखाई देने वाले प्रत्येक नुकसान या व्यक्ति के बारे में स्वतंत्र निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
यमन में 2014 से जारी है संघर्ष
यमन का मौजूदा संघर्ष अचानक शुरू हुआ कोई नया विवाद नहीं है। देश में 2014 से गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है।
एक तरफ हूती लड़ाके हैं, जबकि दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में लड़ने वाली सेनाएं हैं। सऊदी अरब भी लंबे समय से यमन की सरकार का समर्थन करता रहा है।
इस संघर्ष ने यमन की राजनीतिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर लड़ाई, हवाई हमले, मिसाइल हमले और अन्य सैन्य कार्रवाइयां होती रही हैं।
2022 में सीजफायर से मिली थी राहत, लेकिन अब फिर बढ़ा तनाव
यमन संघर्ष को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों के तहत 2022 में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था।
उस दौर में हिंसा में कमी आई और आम नागरिकों को कुछ राहत मिली। हालांकि, लंबे समय तक चली शांति की उम्मीद पूरी तरह स्थायी नहीं रह सकी।
हाल के महीनों में संघर्ष दोबारा तेज होने की खबरें सामने आई हैं। मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों ने एक बार फिर यमन के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र में भी चिंता बढ़ा दी है।
इस नए तनाव का सबसे बड़ा खतरा यह है कि स्थानीय संघर्ष फिर से क्षेत्रीय टकराव का रूप ले सकता है।
दो महीने में 700 से ज्यादा मौतों का UN का आंकड़ा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि पिछले दो महीनों में यमन में फिर तेज हुए संघर्ष में नागरिकों समेत 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके साथ ही सितंबर की शुरुआत से अब तक 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित होने की जानकारी दी गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि संघर्ष का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में आम लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ रहा है।
विस्थापन का मतलब केवल घर से दूर जाना नहीं होता। इसके साथ भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित रहने की समस्या भी जुड़ जाती है।
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यमन का रणनीतिक महत्व उसकी भौगोलिक स्थिति के कारण भी बेहद ज्यादा है।
यमन के पास बाब अल-मंदेब स्ट्रेट स्थित है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में इसकी अहम भूमिका है।
इस क्षेत्र में लंबे समय तक संघर्ष या समुद्री हमले होने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसका असर केवल यमन या सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और माल ढुलाई पर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि यमन में बढ़ता सैन्य तनाव लाल सागर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा करता है।
सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों का दावा
यमन सरकार की सेना ने शनिवार को दावा किया कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद की दिशा में दो ड्रोन दागे थे।
सेना के मुताबिक, सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने दोनों ड्रोन को रोक दिया।
इसके अलावा यमनी सेना ने दावा किया कि हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी सीमा क्षेत्र खमिस मुशैत की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल भी दागी थी।
सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, रात के समय अबहा और जिजान में भी संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की गई थी।
इन घटनाओं को लेकर भी संबंधित पक्षों की ओर से किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी से अलग करके देखना जरूरी है।
सऊदी अरब और हूतियों के बीच टकराव क्यों बढ़ा?
यमन के संघर्ष में सऊदी अरब का स्थान महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूती विद्रोही उसके विरोध में लड़ रहे हैं।
इसी राजनीतिक और सैन्य टकराव के कारण सऊदी अरब भी हूती हमलों का निशाना बनता रहा है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से हूतियों ने रियाद के अलावा अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू जैसे शहरों को ड्रोन और मिसाइल हमलों से निशाना बनाने का दावा किया है।
इन हमलों में एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को लक्ष्य बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
लाल सागर में सऊदी जहाजों पर हमलों के दावे भी इस बढ़ते तनाव का हिस्सा बताए गए हैं।
जवाब में यमन में हूती ठिकानों पर सऊदी हमले
हूतियों के हमलों के जवाब में सऊदी अरब की ओर से यमन में हूती ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
इस तरह दोनों पक्षों के बीच कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है।
एक पक्ष द्वारा मिसाइल या ड्रोन हमला किए जाने के बाद दूसरे पक्ष की सैन्य कार्रवाई होती है और फिर जवाबी हमला सामने आता है। ऐसे चक्र में सबसे ज्यादा चिंता नागरिक आबादी को लेकर होती है।
ताइज के बाजार पर हुआ ताजा हमला इसी व्यापक संघर्ष के बीच सामने आया है।
लाल सागर के कारण संघर्ष का असर दुनिया तक पहुंच सकता है
यमन में जारी संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह देश दुनिया के एक बेहद अहम समुद्री व्यापार क्षेत्र के पास स्थित है।
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा की स्थिति खराब होने पर समुद्री परिवहन कंपनियों को वैकल्पिक मार्गों पर विचार करना पड़ सकता है।
समुद्री मार्ग बदलने से यात्रा का समय बढ़ सकता है और परिवहन लागत पर भी असर पड़ सकता है।
इसीलिए यमन और लाल सागर में सुरक्षा की स्थिति केवल क्षेत्रीय सैन्य खबर नहीं रहती, बल्कि इसका संबंध वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन से भी जुड़ जाता है।
हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों को लेकर भी बढ़ी चिंता
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट की ओर बढ़ते हुए बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास के इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाया है।
रणनीतिक रूप से यह इलाका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच समुद्री यातायात गुजरता है।
यदि किसी सैन्य संगठन का प्रभाव इस क्षेत्र में बढ़ता है, तो समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
इसी संदर्भ में हूतियों की ओर से सऊदी जहाजों या सऊदी से सामान ले जा रहे जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दिए जाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।
यमन का संघर्ष अब सिर्फ देश की सीमा तक सीमित नहीं
यमन में शुरू हुआ राजनीतिक और सैन्य संघर्ष धीरे-धीरे क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।
एक तरफ यमनी सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई है, दूसरी तरफ सऊदी अरब की इसमें भूमिका है। इसके अलावा लाल सागर और बाब अल-मंदेब की रणनीतिक स्थिति इस संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जोड़ती है।
ड्रोन और मिसाइल तकनीक के इस्तेमाल ने संघर्ष को और जटिल बना दिया है। पहले जहां लड़ाई मुख्य रूप से जमीन पर सैन्य ठिकानों के नियंत्रण को लेकर होती थी, वहीं अब लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण खतरा दूर-दराज के शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तक पहुंच सकता है।
आम लोगों पर सबसे भारी पड़ रहा युद्ध
यमन में युद्ध की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।
लंबे समय से जारी संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी सेवाओं पर भारी दबाव डाला है। जिन इलाकों में लड़ाई बढ़ती है, वहां लोगों के लिए सुरक्षित स्थान पर जाना प्राथमिकता बन जाता है।
हजारों लोगों का विस्थापन केवल एक आंकड़ा नहीं है। इसके पीछे ऐसे परिवार हैं जिन्हें अपने घर, दुकान, रोजगार और कई बार अपनी पूरी सामाजिक व्यवस्था छोड़नी पड़ती है।
बच्चों के लिए इसका असर और भी गंभीर हो सकता है क्योंकि विस्थापन के कारण उनकी पढ़ाई बाधित होती है और स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
बाजार पर हमला क्यों बना सबसे ज्यादा चिंता का विषय?
बाजार आमतौर पर नागरिक गतिविधियों के केंद्र होते हैं। यहां दुकानदारों के साथ बड़ी संख्या में ग्राहक और स्थानीय लोग मौजूद रहते हैं।
यदि किसी बाजार के आसपास सैन्य गतिविधि होती है तो वहां मौजूद आम नागरिकों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
यही कारण है कि ताइज के बाजार पर हुए हमले में नागरिकों की मौत और घायल होने की खबर ने चिंता बढ़ाई है। यमनी सरकार का कहना है कि इलाके में हूती सैन्य कैंप मौजूद था, जबकि हूती पक्ष ने बाजार में लोगों के मारे जाने की बात कही है।
इस पूरे घटनाक्रम में नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
युद्ध के बीच विस्थापन का संकट भी गहराता जा रहा
सितंबर की शुरुआत से अब तक 82 हजार से अधिक लोगों के विस्थापित होने की जानकारी सामने आई है।
जब किसी इलाके में लड़ाई तेज होती है तो लोग सुरक्षित जगह की तलाश में घर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। लेकिन सुरक्षित जगह मिलने के बाद भी उनकी समस्याएं खत्म नहीं होतीं।
अस्थायी ठिकानों में रहने वाले परिवारों को भोजन, साफ पानी, चिकित्सा सहायता और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
इसलिए यमन में बढ़ती सैन्य गतिविधियों का मानवीय असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है।
हवाई हमलों और ड्रोन युद्ध ने बदली संघर्ष की तस्वीर
यमन संघर्ष में ड्रोन और मिसाइलों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों की खबरें सामने आती रही हैं।
ड्रोन अपेक्षाकृत कम लागत में लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता रखते हैं, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलें बड़े क्षेत्र में खतरा पैदा कर सकती हैं।
इसी कारण सऊदी अरब जैसे देशों के लिए एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। दूसरी तरफ यमन के नागरिक इलाकों में सैन्य कार्रवाई होने पर नागरिकों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन जाती है।
क्या फिर बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव?
यमन में एक नया सैन्य चक्र शुरू होने की स्थिति में तनाव केवल यमन और सऊदी अरब तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। लाल सागर का समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होने के कारण किसी भी बड़े व्यवधान का प्रभाव दूसरे देशों तक पहुंच सकता है।
विशेष रूप से यदि समुद्री जहाजों को लंबे समय तक हमलों का खतरा बना रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए सुरक्षा और मार्ग दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे बन सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट है कि यमन में तनाव दोबारा गंभीर स्तर पर पहुंचा है, लेकिन आने वाले दिनों में इसकी दिशा क्या होगी, यह सैन्य और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
यमन की जंग का इतिहास लंबा, लेकिन समाधान अभी भी दूर
2014 से जारी संघर्ष ने यमन की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को बदल दिया है। वर्षों की लड़ाई के बावजूद स्थायी राजनीतिक समाधान नहीं निकल पाया।
2022 का सीजफायर एक महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन अब सामने आ रहे सैन्य घटनाक्रम बताते हैं कि संघर्ष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था।
स्थायी शांति के लिए केवल सैन्य कार्रवाई रोकना पर्याप्त नहीं होगा। राजनीतिक समझौता, सुरक्षा व्यवस्था, मानवीय सहायता और विस्थापित लोगों की वापसी जैसे कई मुद्दों पर समाधान तलाशना होगा।
ताजा हमले ने फिर याद दिलाया- यमन में शांति कितनी नाजुक है
ताइज के बाजार पर हुए हमले की खबर और उसके बाद सामने आई तस्वीरें इस बात की याद दिलाती हैं कि यमन में हिंसा का खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है।
एक ओर सरकार हूती सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कह रही है, दूसरी ओर हूती स्वास्थ्य मंत्रालय नागरिकों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का दावा कर रहा है।
इन दोनों दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि संघर्ष का असर आम लोगों तक पहुंच रहा है।
जब बाजार, सड़कें और आबादी वाले क्षेत्र युद्ध की चपेट में आते हैं तो सैन्य कार्रवाई और नागरिक सुरक्षा के बीच की दूरी बेहद कम हो जाती है।
लाल सागर से लेकर ताइज तक, यमन पर दुनिया की नजर
यमन का संघर्ष अब केवल घरेलू राजनीतिक लड़ाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। ताइज जैसे शहरों में जमीनी और हवाई संघर्ष, सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के दावे तथा बाब अल-मंदेब के आसपास सैन्य गतिविधियां इस संकट को व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दा बना रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा बताए गए मौत और विस्थापन के आंकड़े भी इस संघर्ष की मानवीय कीमत को सामने रखते हैं।
आने वाले दिनों में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि क्या तनाव को दोबारा किसी राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है या मिसाइल, ड्रोन और एयरस्ट्राइक का यह सिलसिला और आगे बढ़ेगा।

