ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिका ने हटाए सभी B-1 बॉम्बर, 12 विमान वापस बुलाए; आतंकी साजिश के बाद बढ़ी थी सुरक्षा
ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से अमेरिका ने अपने सभी B-1 बॉम्बर विमान वापस बुला लिए हैं। एयरबेस पर करीब 12 B-1 बॉम्बर तैनात थे। पेंटागन ने रविवार को इन विमानों को वापस बुलाए जाने की पुष्टि की है।
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब फेयरफोर्ड एयरबेस के आसपास हाल ही में सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई थी। एयरबेस के पास संदिग्ध गतिविधियों और संभावित आतंकी साजिश की जांच के तहत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि जांच में किसी विस्फोटक की बरामदगी नहीं हुई, लेकिन संदिग्ध वैन, नकाबपोश लोगों और पेट्रोल मिलने की खबरों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी।
इसी मामले में गिरफ्तार किए गए पांच ब्रिटिश नागरिकों को बाद में जमानत पर छोड़ दिया गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोपियों को जमानत दिए जाने पर नाराजगी भी जताई थी।
अब फेयरफोर्ड से B-1 बॉम्बर हटाए जाने के बाद इस एयरबेस की सुरक्षा और यहां चल रही अमेरिकी सैन्य गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं।
फेयरफोर्ड से करीब 12 B-1 बॉम्बर हटाए गए
अमेरिका ने ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस पर तैनात अपने सभी B-1 बॉम्बर वापस बुला लिए हैं। यहां करीब 12 B-1 बॉम्बर मौजूद थे।
B-1 बॉम्बर अमेरिकी वायुसेना के प्रमुख लंबी दूरी के स्ट्राइक विमानों में शामिल है। भारी हथियार ले जाने और लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता के कारण ऐसे विमानों की किसी अग्रिम एयरबेस पर मौजूदगी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पेंटागन ने रविवार को इन विमानों की वापसी की पुष्टि की। हालांकि इस फैसले को सीधे तौर पर एयरबेस के पास हुई संदिग्ध घटना से जोड़ने की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है।
लेकिन यह फैसला उस समय आया है जब फेयरफोर्ड के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को हाल ही में मजबूत किया गया था और संभावित आतंकी साजिश को लेकर जांच चल रही थी।
एयरबेस के पास मिली थीं तीन संदिग्ध वैन
पिछले रविवार को फेयरफोर्ड एयरबेस के पास स्थित व्हेलफोर्ड गांव में एक किसान ने सड़क पर तीन संदिग्ध वैन खड़ी देखी थीं।
उसके मुताबिक, आसपास कई नकाबपोश लोग मौजूद थे। बाद में ये लोग वहां से फरार हो गए।
एक महिला ने भी पुलिस को तीन संदिग्ध वैन के बारे में जानकारी दी थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और एयरबेस के आसपास रहने वाले लोगों को लेकर बड़ा सुरक्षा कदम उठाया गया।
एहतियात के तौर पर एयरबेस के आसपास के करीब 85 घरों को खाली कराया गया।
इस कार्रवाई से साफ था कि सुरक्षा एजेंसियां मामले को सामान्य संदिग्ध गतिविधि मानकर नजरअंदाज करने के मूड में नहीं थीं।
वैन के अंदर दिखे थे बैरल जैसे सामान, एक पर लगा था फर्जी लोगो
संदिग्ध वैन की तस्वीरें सामने आने के बाद मामला और गंभीर दिखाई देने लगा। तस्वीरों में वैन के अंदर बैरल जैसी चीजें दिखाई दी थीं।
इनमें से एक वैन पर ऐसा लोगो और फोन नंबर लगा हुआ था, जिससे वह किसी वास्तविक डीजल सप्लाई कंपनी की गाड़ी जैसी दिखाई दे रही थी।
बाद में जांच के दौरान वैन से कोई विस्फोटक बरामद नहीं हुआ।
हालांकि नेशनल काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग के प्रमुख लॉरेंस टेलर ने बताया था कि वहां से कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद किया गया था।
यही वजह रही कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच आगे बढ़ाई।
पांच ब्रिटिश पुरुष गिरफ्तार, बाद में सभी को जमानत
संदिग्ध घटना के बाद पुलिस ने लंदन के रहने वाले 23 से 25 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया था।
इन सभी पर एयरबेस के आसपास हुई संदिग्ध गतिविधियों को लेकर जांच की गई। हालांकि बाद में सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
इसके बाद मामले में एक और गिरफ्तारी हुई।
1 अक्टूबर को लंदन से एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई संदिग्ध घटना की जांच के सिलसिले में की गई थी।
बाद में उसे भी जमानत पर छोड़ दिया गया।
फिलहाल इन गिरफ्तारियों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि मामला जांच के स्तर पर है और गिरफ्तार किए गए लोगों को जमानत मिल चुकी है।
आरोपियों को जमानत मिलने पर ट्रम्प ने जताई नाराजगी
मामले में गिरफ्तार लोगों को जमानत मिलने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाराजगी जताई थी।
ट्रम्प ने कहा था कि अगर फैसला उनके हाथ में होता तो वह ऐसा नहीं करते।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी मामले को लेकर गंभीर आशंका जताई थी। उन्होंने संभावित रूप से किसी विदेशी ताकत के शामिल होने की संभावना की ओर इशारा किया था और इस संदर्भ में ईरान का नाम सामने आया था।
हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि फेयरफोर्ड एयरबेस के पास हुई घटना के पीछे किसी विदेशी देश या ईरान का हाथ था। जांच एजेंसियों को इस संबंध में ठोस सबूत सामने लाने होंगे।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियानों के लिए अहम रहा फेयरफोर्ड
RAF फेयरफोर्ड की रणनीतिक अहमियत इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाती है।
ब्रिटेन ने मार्च में अमेरिका को RAF फेयरफोर्ड का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ खास रक्षात्मक अभियानों के लिए करने की अनुमति दी थी। इसके बाद से अमेरिकी बॉम्बर और दूसरे सैन्य विमान इस एयरबेस से उड़ान भरते और वापस लौटते देखे गए हैं।
यानी फेयरफोर्ड केवल ब्रिटेन में मौजूद एक सामान्य सैन्य एयरबेस नहीं है। यह अमेरिका के लिए यूरोप में लंबी दूरी के सैन्य अभियानों और भारी बॉम्बर विमानों के संचालन का एक महत्वपूर्ण ठिकाना रहा है।
ऐसे में एयरबेस के आसपास किसी संदिग्ध गतिविधि की खबर सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्वाभाविक रूप से गंभीर विषय है।
1944 में खुला था एयरबेस, भारी बॉम्बर के लिए खास है रनवे
RAF फेयरफोर्ड का इतिहास भी काफी पुराना है। यह एयरबेस 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खोला गया था।
आज भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका लंबा रनवे शामिल है। एयरबेस का रनवे करीब 9,990 फीट यानी लगभग 3 किलोमीटर लंबा है।
यही लंबाई इसे यूरोप के उन चुनिंदा एयरफील्ड में शामिल करती है, जहां भारी बॉम्बर विमानों को उतारने और उड़ाने की क्षमता है।
B-1 जैसे बड़े और लंबी दूरी के सैन्य विमानों के संचालन के लिए ऐसी सुविधाएं रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण होती हैं।
B-1 बॉम्बर हटाने के फैसले पर सबकी नजर
अब फेयरफोर्ड से सभी B-1 बॉम्बर वापस बुलाए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका ने यह फैसला किस रणनीतिक आकलन के आधार पर लिया।
एक तरफ एयरबेस के आसपास संदिग्ध वैन मिलने, नकाबपोश लोगों के देखे जाने और पेट्रोल बरामद होने के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई थी। दूसरी तरफ इस घटना की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को बाद में जमानत मिल चुकी है।
अमेरिका ने अभी B-1 बॉम्बर की वापसी को किसी खास आतंकी खतरे या जांच के साथ आधिकारिक तौर पर जोड़कर विस्तृत कारण नहीं बताया है। इसलिए फिलहाल दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध मानना उचित नहीं होगा।
लेकिन इतना जरूर है कि फेयरफोर्ड जैसे रणनीतिक एयरबेस से करीब 12 B-1 बॉम्बर का एक साथ वापस बुलाया जाना सैन्य और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

