Vaibhav suryavanshi ने इकाना में मचाया तहलका! 1 घंटे में उड़ाए 15 छक्के, वेस्टइंडीज को मैच से पहले मिला बड़ा संकेत
लखनऊ। Vaibhav Suryavanshi ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले से ठीक एक दिन पहले लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में ऐसा अभ्यास किया, जिसने टीम इंडिया के साथ-साथ मैदान पर मौजूद लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया। युवा बल्लेबाज ने सोमवार को करीब एक घंटे तक जमकर बल्लेबाजी की और इस दौरान 15 छक्के जड़ दिए। अभ्यास सत्र में उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी का नमूना पेश किया और खास तौर पर मिडऑन तथा मिडऑफ के ऊपर से लगाए गए उनके शॉट्स चर्चा में रहे।
वैभव की बल्लेबाजी के दौरान तीन बार गेंद हवा में कैच के लिए भी गई। यानी युवा बल्लेबाज पूरी तरह आक्रामक अंदाज में दिखाई दिए और बड़े शॉट खेलने के प्रयास में जोखिम लेने से भी पीछे नहीं हटे। टीम के बॉलिंग कोच मॉर्नी मोर्कल ने पेस गेंदबाजों को वैभव के लिए लगातार गेंदें डालने को कहा, ताकि मुकाबले से पहले बल्लेबाज को तेज गेंदबाजी के खिलाफ पर्याप्त अभ्यास मिल सके।
इकाना में वैभव का यह अभ्यास सत्र ऐसे समय हुआ जब भारत और वेस्टइंडीज दोनों टीमें मुकाबले की तैयारियों में जुटी हुई हैं। सोमवार को दोनों टीमों की ओर से मीडिया ब्रीफिंग भी की गई और दोनों खेमों ने अपनी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए।
एक तरफ भारतीय टीम की नजर जीत के साथ सीरीज में मजबूत शुरुआत पर है, तो दूसरी तरफ वेस्टइंडीज ने साफ कर दिया है कि वह पिछले रिकॉर्ड या भारत की मौजूदा स्थिति से दबाव में आने वाली नहीं है।
वैभव सूर्यवंशी के बल्ले से निकले 15 छक्के, पेसर्स के सामने दिखाया आक्रामक अंदाज
इकाना स्टेडियम में अभ्यास के दौरान वैभव सूर्यवंशी ने लगभग एक घंटे तक बल्लेबाजी की। इस दौरान उन्होंने गेंद को लगातार बाउंड्री के पार पहुंचाया और कुल 15 छक्के लगाए।
अभ्यास में लगाए गए छक्कों का मैच के स्कोर में कोई योगदान नहीं होता, लेकिन बल्लेबाज की तैयारी और आत्मविश्वास का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है। खासकर तब, जब बल्लेबाज तेज गेंदबाजों के खिलाफ बड़े शॉट खेलने का अभ्यास कर रहा हो।
वैभव के लिए सोमवार का सत्र इसी लिहाज से खास रहा। मोर्कल ने पेस गेंदबाजों को उनकी ओर गेंदबाजी करने को कहा। इसका उद्देश्य युवा बल्लेबाज को मैच जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार करना था।
वैभव ने सबसे प्रभावशाली शॉट्स मिडऑन और मिडऑफ के क्षेत्र में लगाए। इसका मतलब साफ था—गेंद की लाइन और लेंथ मिलने पर वह फ्रंटफुट पर जाकर तेज गेंदबाजों को सीधे मैदान के सामने से निशाना बनाने में बिल्कुल नहीं झिझक रहे थे।
तीन बार हवा में गई गेंद, लेकिन आक्रामकता में नहीं आई कमी
वैभव के अभ्यास सत्र का एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि बड़े शॉट खेलने के दौरान तीन बार गेंद हवा में कैच के लिए गई।
लेकिन नेट प्रैक्टिस में बल्लेबाज का मकसद केवल सुरक्षित शॉट खेलना नहीं होता। खासकर टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजों को सीमित समय में अधिकतम रन बनाने के लिए जोखिम उठाना पड़ता है।
युवा खिलाड़ी के लिए इस तरह का अभ्यास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाज नेट्स की तुलना में अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। पावरप्ले में फील्डिंग प्रतिबंधों का फायदा उठाना और सही गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाना टी-20 बल्लेबाजी का अहम हिस्सा है।
वैभव ने सोमवार को इसी आक्रामक बल्लेबाजी की झलक दिखाई।
मॉर्नी मोर्कल की नजर युवा बल्लेबाजों पर, पेस अटैक से कराया खास अभ्यास
भारतीय गेंदबाजी कोच मॉर्नी मोर्कल ने अभ्यास के दौरान वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी पर खास ध्यान दिया। पेस गेंदबाजों से उन्हें लगातार गेंदबाजी कराई गई।
मोर्कल का यह अभ्यास केवल वैभव की तैयारी तक सीमित नहीं माना जा सकता। भारतीय टीम मैनेजमेंट आगामी बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयार करने पर जोर दे रहा है।
तेज गेंदबाजी के सामने बल्लेबाजी करना किसी भी युवा बल्लेबाज के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा होती है। गेंद की गति, उछाल और शरीर के करीब आने वाली गेंदों पर निर्णय लेने की क्षमता टी-20 क्रिकेट में खास मायने रखती है।
इसीलिए मैच से एक दिन पहले वैभव को पेस गेंदबाजों के सामने अधिक से अधिक गेंदें खेलने का मौका दिया गया।
वेस्टइंडीज को हल्के में लेने की गलती नहीं करेगी टीम इंडिया
भारतीय टीम के सामने भले ही युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन और भविष्य की तैयारी का सवाल हो, लेकिन मुकाबले में जीत टीम की प्राथमिकता बनी हुई है।
मॉर्नी मोर्कल ने सोमवार को साफ कहा कि टीम का फोकस अगले दिन होने वाले मैच को जीतने पर रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे।
यानी टीम मैनेजमेंट के सामने दो लक्ष्य एक साथ हैं—मैच जीतना और भविष्य की मजबूत टीम तैयार करना।
टी-20 क्रिकेट में यह संतुलन आसान नहीं होता। अगर टीम युवा खिलाड़ियों को मौके देती है तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव मिलता है, लेकिन साथ ही परिणाम का दबाव भी बना रहता है।
भारतीय टीम इस चुनौती को आगामी टी-20 विश्व कप की तैयारियों से जोड़कर देख रही है।
वेस्टइंडीज के अकील हुसैन का बेबाक जवाब—भारत से डरने वाले नहीं
वेस्टइंडीज की ओर से स्टार स्पिनर अकील हुसैन ने भी मुकाबले से पहले अपनी टीम का आत्मविश्वास सामने रखा।
जब उन्हें 100वें टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए बधाई दी गई, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए स्पष्ट किया कि वह अभी 99 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच ही खेल चुके हैं। उनका 100वां मैच तब दर्ज होगा जब वह प्लेइंग-11 में मैदान पर उतरेंगे।
उनकी यह प्रतिक्रिया बताती है कि वह आंकड़ों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं और इस उपलब्धि से पहले अगला मुकाबला उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।
भारत के खिलाफ पिछले रिकॉर्ड के बारे में पूछे जाने पर अकील हुसैन ने कहा कि जो कुछ पहले हो चुका है, वह अब अतीत है। उनका संदेश साफ था—वेस्टइंडीज भारत के खिलाफ मैदान पर किसी डर के साथ उतरने वाली नहीं है।
‘जो बीत गया, वह अतीत था’—अकील हुसैन ने भारत को दिया सीधा संदेश
टी-20 क्रिकेट में वेस्टइंडीज की पहचान आक्रामक क्रिकेट के लिए रही है। दुनिया भर की टी-20 लीग में वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों ने अपनी ताकत, पावर हिटिंग और परिस्थितियों के अनुसार तेजी से खेलने की क्षमता दिखाई है।
अकील हुसैन ने भी इसी मानसिकता को सामने रखते हुए कहा कि उनकी टीम अपने आक्रामक रवैये से पीछे नहीं हटेगी।
भारत के खिलाफ पिछले मुकाबलों में क्या हुआ, उसका असर आगामी मैच पर नहीं पड़ना चाहिए—यही उनका संदेश था।
उनका मानना है कि मैदान पर उतरने के बाद परिस्थितियां अलग होती हैं और उसी समय सही निर्णय लेना महत्वपूर्ण होता है।
अकील हुसैन ने बताया—टी-20 में सिर्फ डेटा से नहीं जीता जाता मैच
आधुनिक क्रिकेट में डेटा और एनालिटिक्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बल्लेबाज किस क्षेत्र में ज्यादा रन बनाता है, किस गेंदबाज के खिलाफ उसका स्ट्राइक रेट कैसा है और पावरप्ले में किस तरह के आंकड़े सामने आते हैं—इन सभी का इस्तेमाल रणनीति तैयार करने में किया जाता है।
लेकिन अकील हुसैन का मानना है कि सिर्फ डेटा के आधार पर टी-20 मुकाबला नहीं जीता जा सकता।
उनके अनुसार पिच की स्थिति, हवा का रुख, गेंद का व्यवहार और मैच के उस समय की परिस्थिति देखकर तुरंत निर्णय लेना जरूरी है।
यही वह अंतर है जो कागज पर बनी रणनीति और मैदान पर लागू होने वाली रणनीति के बीच होता है।
पावरप्ले में गेंदबाजी को बताया चुनौतीपूर्ण
अकील हुसैन ने टी-20 के पावरप्ले ओवरों में गेंदबाजी को भी चुनौतीपूर्ण बताया।
पावरप्ले में केवल दो फील्डर 30 गज के घेरे के बाहर रह सकते हैं। इसका सीधा फायदा बल्लेबाजों को मिलता है। गेंदबाज को विकेट लेने के साथ-साथ रन रोकने की भी चुनौती रहती है।
स्पिनर के लिए यह चुनौती और बढ़ सकती है क्योंकि बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाने की कोशिश करता है।
ऐसे में गेंद की फ्लाइट, गति, लाइन और लेंथ में छोटे-छोटे बदलाव काफी मायने रखते हैं।
अकील हुसैन ने इसी संदर्भ में मैदान की तत्काल परिस्थितियों को समझकर निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया।
दुनिया का नंबर-1 टी-20 गेंदबाज बनना चाहते हैं अकील हुसैन
अकील हुसैन ने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य दुनिया का नंबर-1 टी-20 गेंदबाज बनना है।
यह लक्ष्य बताता है कि वह केवल टीम की जीत तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं।
एक स्पिन गेंदबाज के रूप में उनके सामने चुनौती बड़ी है, क्योंकि टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाज लगातार गेंदबाज पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे माहौल में विकेट लेने के साथ रन रोकना और लगातार प्रभावी प्रदर्शन करना ही किसी गेंदबाज को शीर्ष स्तर पर पहुंचाता है।
मॉर्नी मोर्कल बोले—हर मैच जीतना प्राथमिकता, लेकिन युवाओं को भी मिलेगा मौका
भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मॉर्नी मोर्कल ने सोमवार की मीडिया ब्रीफिंग में टीम मैनेजमेंट का विजन सामने रखा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम के लिए हर मैच जीतना प्राथमिकता है। इसके साथ ही युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने का अवसर देना भी योजना का हिस्सा है।
यह रणनीति खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत को आने वाले समय में कई बड़े टी-20 टूर्नामेंट खेलने हैं।
एक मजबूत टीम बनाने के लिए केवल 11 खिलाड़ियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। बेंच स्ट्रेंथ मजबूत होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर विकल्प तुरंत तैयार होना चाहिए।
इसी दिशा में युवा खिलाड़ियों को लगातार अवसर दिए जा रहे हैं।
एशियन गेम्स के बाद थकान, लेकिन टीम पूरी ऊर्जा के साथ तैयार
मॉर्नी मोर्कल ने खिलाड़ियों की व्यस्त यात्रा और एशियन गेम्स के बाद की स्थिति पर भी बात की।
उन्होंने माना कि लगातार यात्रा और मैचों के कारण खिलाड़ियों में कुछ थकान हो सकती है। लेकिन सीरीज की शुरुआत के साथ भारतीय टीम पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में उतरने के लिए तैयार है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यात्रा, अलग-अलग परिस्थितियां और लगातार मैच खिलाड़ियों की फिटनेस के लिए बड़ी चुनौती होती है।
टीम मैनेजमेंट के सामने ऐसे समय में खिलाड़ियों के workload को संभालना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
टी-20 विश्व कप को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा खिलाड़ियों का पूल
भारतीय टीम मैनेजमेंट की नजर केवल मौजूदा सीरीज पर नहीं है। आगामी टी-20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए टीम के पास ज्यादा से ज्यादा विकल्प तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
इसके लिए युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव देना महत्वपूर्ण है।
किसी बड़े टूर्नामेंट में अचानक किसी खिलाड़ी को मौका देने के बजाय पहले से तैयार खिलाड़ियों का मजबूत समूह होना टीम के लिए काफी फायदेमंद होता है।
इसी वजह से युवा बल्लेबाजों, तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों को लगातार परखा जा रहा है।
मयंक यादव की वापसी से बढ़ी भारतीय टीम की ताकत
तेज गेंदबाज मयंक यादव की चोट से वापसी को लेकर भी मोर्कल ने खुशी जताई।
मयंक की सबसे बड़ी ताकत उनकी गति है। तेज रफ्तार के साथ गेंद को सही क्षेत्र में डालने की क्षमता उन्हें टीम के लिए अलग तरह का विकल्प बनाती है।
मोर्कल ने उन्हें टीम का एक्स-फैक्टर बताया।
अगर मयंक पूरी तरह फिट होकर अपनी पुरानी गति और लय हासिल कर लेते हैं तो भारतीय टी-20 गेंदबाजी में एक अतिरिक्त आयाम जुड़ सकता है।
हालांकि, चोट से वापसी करने वाले खिलाड़ी के workload और फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट को स्वाभाविक रूप से सावधानी बरतनी होगी।
प्रिंस यादव जैसे युवाओं को मौका देना क्यों महत्वपूर्ण?
मोर्कल ने प्रिंस यादव जैसे युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच बड़ा अंतर होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों की गुणवत्ता, दबाव और मैच की गति अलग होती है।
इसलिए युवा खिलाड़ियों को जितना जल्दी उच्च स्तर का अनुभव मिलता है, उतनी ही तेजी से वे अपनी कमियों को समझकर उनमें सुधार कर सकते हैं।
भारतीय टीम का मौजूदा approach इसी दिशा में दिखाई देता है।
अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा पर भी टीम मैनेजमेंट की नजर
बल्लेबाजी विभाग में अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे युवा खिलाड़ियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
मोर्कल ने दोनों की बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के अनुसार खुद को ढालने और जिम्मेदारी लेने की क्षमता की सराहना की।
टी-20 क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम हमेशा स्थिर नहीं रहता। मैच की परिस्थिति के हिसाब से किसी खिलाड़ी को ऊपर भेजा जा सकता है, तो कभी किसी अन्य खिलाड़ी को फिनिशर की भूमिका दी जा सकती है।
जो बल्लेबाज अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को ढाल सकता है, वह टीम के लिए ज्यादा मूल्यवान बन जाता है।
सूर्यकुमार यादव की flexibility भी टीम के लिए बड़ा हथियार
भारतीय टीम के कप्तान और प्रमुख बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव की बल्लेबाजी क्षमता को भी इस रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूर्यकुमार का सबसे बड़ा गुण अलग-अलग क्षेत्रों में शॉट खेलने की क्षमता है। टी-20 में जब विपक्षी टीम किसी बल्लेबाज के लिए विशेष फील्ड सेट करती है, तब ऐसे बल्लेबाज की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है जो फील्ड के अलग-अलग हिस्सों में रन बना सके।
मोर्कल ने बल्लेबाजों की परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करने और जिम्मेदारी लेने की क्षमता को भारतीय टीम के लिए सकारात्मक पहलू बताया।
शिवम दुबे और नितिश रेड्डी दे सकते हैं अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प
भारतीय टीम के पास केवल विशेषज्ञ गेंदबाजों पर निर्भर रहने की रणनीति नहीं है।
शिवम दुबे और नितिश रेड्डी जैसे ऑलराउंडरों को अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
टी-20 में यह रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि टीम के पास पांच या छह गेंदबाजी विकल्प मौजूद हों तो कप्तान के पास मैच की परिस्थिति के अनुसार गेंदबाजी बदलने की ज्यादा स्वतंत्रता होती है।
ऑलराउंडर बल्लेबाजी में योगदान देने के साथ कुछ ओवर गेंदबाजी करके टीम का संतुलन मजबूत कर सकते हैं।
कुलदीप यादव की लय में वापसी भारतीय टीम के लिए बड़ा प्लस
स्पिन विभाग में कुलदीप यादव की लय में वापसी को भी टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कुलदीप की खासियत उनकी विविधता है। वह बल्लेबाज को केवल गति में बदलाव से नहीं बल्कि गेंद के घूमने और trajectory में बदलाव से भी चुनौती देते हैं।
मध्य ओवरों में विकेट लेना टी-20 क्रिकेट में बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर स्पिनर बल्लेबाजों की साझेदारी तोड़ने में सफल रहते हैं तो अंतिम ओवरों में विपक्षी टीम के स्कोर पर दबाव बनाया जा सकता है।
भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में भी इस विभाग से काफी उम्मीदें रहेंगी।
भारत के युवा बनाम वेस्टइंडीज का बेखौफ अंदाज—इकाना में किसकी चलेगी?
मुकाबले से पहले दोनों टीमों की तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आ रही है।
भारत के पास युवा खिलाड़ियों को मौका देने और आगामी टी-20 विश्व कप के लिए मजबूत टीम तैयार करने की रणनीति है। दूसरी तरफ वेस्टइंडीज अपने पारंपरिक आक्रामक क्रिकेट से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
भारत की तरफ से वैभव सूर्यवंशी का अभ्यास सत्र चर्चा में रहा, जबकि वेस्टइंडीज की ओर से अकील हुसैन ने स्पष्ट कर दिया कि टीम पुराने रिकॉर्ड को लेकर दबाव में नहीं है।
ऐसे में मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग क्रिकेटिंग approaches के बीच भी दिलचस्प टकराव बन सकता है।
वैभव सूर्यवंशी के लिए बड़ा मौका, लेकिन दबाव भी कम नहीं
वैभव सूर्यवंशी ने नेट्स में 15 छक्के लगाकर निश्चित रूप से अपनी तैयारी की झलक दिखाई है। लेकिन मैच में नेट्स की सफलता को दोहराना हमेशा आसान नहीं होता।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाज बल्लेबाज की कमजोरियों पर काम करके आते हैं। पावरप्ले की फील्डिंग, गेंद की गति, swing और मैच की परिस्थिति बल्लेबाज की चुनौती को बदल देती है।
इसलिए वैभव के लिए असली परीक्षा मैदान पर होगी।
फिर भी मुकाबले से एक दिन पहले इस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी युवा खिलाड़ी के आत्मविश्वास के लिए अच्छी खबर मानी जा सकती है।
इकाना की पिच और परिस्थितियां भी निभाएंगी अहम भूमिका
लखनऊ का इकाना स्टेडियम मुकाबले की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पिच का व्यवहार, हवा और ओस जैसी परिस्थितियां टी-20 मैच में टीमों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
इसी वजह से अकील हुसैन का यह कहना खास महत्व रखता है कि केवल आंकड़ों के भरोसे मैच नहीं जीता जा सकता।
मैदान पर वास्तविक परिस्थितियों को पढ़ना और उसी समय रणनीति बदलना टी-20 क्रिकेट में सफलता का बड़ा आधार है।
भारतीय और वेस्टइंडीज दोनों टीमों के गेंदबाजों के लिए यह चुनौती होगी कि वे परिस्थितियों के अनुसार अपनी लाइन और लेंथ में कितनी तेजी से बदलाव कर पाते हैं।
अब असली परीक्षा मैच में होगी
अभ्यास सत्र में वैभव सूर्यवंशी के 15 छक्के हों या अकील हुसैन का बेखौफ बयान—मैच का फैसला इन बातों से नहीं होगा। असली परीक्षा उस समय होगी जब दोनों टीमें इकाना की पिच पर आमने-सामने उतरेंगी।
भारत की नजर जीत के साथ शुरुआत करने पर होगी। टीम मैनेजमेंट युवा खिलाड़ियों को मौका देकर भविष्य की टीम तैयार करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। मयंक यादव की वापसी, ऑलराउंडरों के विकल्प और कुलदीप यादव की लय भारतीय टीम के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
वहीं वेस्टइंडीज अपने आक्रामक अंदाज के साथ मैदान में उतरना चाहेगा। अकील हुसैन का संदेश साफ है कि पुराना रिकॉर्ड अब मायने नहीं रखता और उनकी टीम भारत के खिलाफ बिना किसी डर के खेलेगी।
सबसे ज्यादा नजरें युवा वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी। सोमवार को इकाना में एक घंटे के अभ्यास के दौरान लगाए गए 15 छक्कों ने मुकाबले से पहले रोमांच जरूर बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नेट्स में दिखाई दी यह पावर मैच की रोशनी में कितनी दूर तक जाती है।

