Muzaffarnagar में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस का अभियान तेज, NCC कैडेट्स को बताया डिजिटल फ्रॉड से बचने का तरीका
Muzaffarnagar में अक्टूबर माह को साइबर जागरूकता माह के रूप में मनाते हुए मुजफ्फरनगर पुलिस ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर अपना अभियान तेज कर दिया है। पुलिस की ओर से आम लोगों के साथ-साथ युवाओं को भी लगातार साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचने के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत साइबर थाना पुलिस ने भोकरहेड़ी इंटर कॉलेज में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कॉलेज के एनसीसी कैडेट्स को ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया फ्रॉड और क्यूआर कोड के जरिए होने वाली ठगी सहित साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई।
NCC कैडेट्स को साइबर अपराधियों के नए तरीकों की जानकारी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में चल रहे साइबर जागरूकता अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में साइबर थाना प्रभारी कर्मवीर सिंह ने एनसीसी कैडेट्स को संबोधित किया।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। कई मामलों में अपराधी बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित कंपनी के प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद कभी डर दिखाकर तो कभी किसी फायदे या इनाम का लालच देकर उनसे बैंकिंग या निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं।
एक बार जरूरी जानकारी अपराधियों के हाथ लगने के बाद पीड़ित के खाते से रकम निकालने या अन्य साइबर अपराध करने का खतरा बढ़ जाता है।
फर्जी कॉल से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक, कई तरीकों से हो रही ठगी
पुलिस ने कैडेट्स को बताया कि साइबर अपराध केवल फर्जी फोन कॉल तक सीमित नहीं रह गया है। संदिग्ध लिंक भेजकर, फर्जी मोबाइल एप डाउनलोड करवाकर और सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर पैसे ऐंठने के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधी खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं और फिर उससे पैसे की मांग करते हैं।
पुलिस ने लोगों से ऐसे किसी भी फोन या ऑनलाइन संदेश पर तुरंत भरोसा नहीं करने की अपील की।
OTP, पासवर्ड और बैंक की गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें
साइबर थाना प्रभारी ने कैडेट्स को डिजिटल सुरक्षा के कुछ महत्वपूर्ण नियम भी बताए। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा करने से साइबर अपराधी खाते तक पहुंच बना सकते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक अधिकारी या किसी अन्य संस्था का कर्मचारी बनकर ऐसी जानकारी मांगे तो बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
अनजान लिंक और फाइल पर क्लिक करना पड़ सकता है भारी
पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि मोबाइल पर आने वाली किसी संदिग्ध फाइल या अनजान लिंक को खोलने से बचना चाहिए। कई बार साइबर अपराधी ऐसे लिंक भेजते हैं, जिनके जरिए मोबाइल में फर्जी एप या अन्य खतरनाक सॉफ्टवेयर डाउनलोड कराया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में मोबाइल फोन में मौजूद निजी जानकारी के साथ-साथ बैंकिंग और सोशल मीडिया अकाउंट भी खतरे में पड़ सकते हैं।
इसलिए किसी भी अनजान स्रोत से मिली फाइल या लिंक को खोलने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।
सोशल मीडिया अकाउंट पर भी रखें कड़ी सुरक्षा
पुलिस ने एनसीसी कैडेट्स को सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रखने के लिए मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करने की सलाह दी। साथ ही जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां दोहरी सुरक्षा प्रणाली यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करने को कहा गया।
इससे केवल पासवर्ड पता होने की स्थिति में भी किसी दूसरे व्यक्ति के लिए अकाउंट में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है।
ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत
साइबर थाना पुलिस ने सबसे महत्वपूर्ण बात बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
पीड़ित को बिना समय गंवाए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई। पुलिस के अनुसार, ठगी के तुरंत बाद शिकायत मिलने पर पैसों के ट्रांजेक्शन को समय रहते रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए साइबर फ्रॉड होने के बाद शिकायत करने में देरी करना नुकसान को बढ़ा सकता है।
स्कूल-कॉलेजों में आगे भी होंगे जागरूकता कार्यक्रम
मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार साइबर जागरूकता माह के दौरान जिले के अलग-अलग स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पुलिस का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करना है, ताकि लोग इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय जरूरी सावधानियां बरतें।
आज के दौर में बैंकिंग, खरीदारी, पढ़ाई, सोशल मीडिया और सरकारी सेवाओं का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन हो चुका है। ऐसे में डिजिटल सुविधा के साथ साइबर सुरक्षा की जानकारी भी उतनी ही जरूरी हो गई है।

