Allahabad High Court का बड़ा फैसला: गैंगस्टर एक्ट में कुर्क संपत्ति रिलीज से इन्कार किया तो डीएम को कोर्ट भेजना होगा मामला
उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट कुर्क संपत्ति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। Allahabad High Court ने स्पष्ट किया है कि यदि गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई संपत्ति को रिलीज करने के लिए दिए गए आवेदन को जिलाधिकारी खारिज करते हैं, तो मामला वहीं खत्म नहीं हो जाता। ऐसी स्थिति में डीएम के लिए अपनी रिपोर्ट के साथ मामले को उस संबंधित कोर्ट में भेजना अनिवार्य है, जिसे गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध की सुनवाई का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर डीएम के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को नए सिरे से तय करने के लिए वापस भेज दिया। कोर्ट ने डीएम को कानून के अनुसार याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर दोबारा निर्णय लेने के लिए समय सीमा भी तय की है।
डीएम के आदेश को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
यह मामला फिरोजाबाद निवासी एक याचिकाकर्ता से जुड़ा है। उसकी संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत 22 जुलाई 2025 को कुर्क किया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कुर्क की गई संपत्तियों को रिलीज करने के लिए जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन दिया।
लेकिन जिलाधिकारी ने 9 मार्च 2026 को याचिका खारिज कर दी। डीएम के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और संपत्ति रिलीज से जुड़े आदेश को चुनौती दी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने की।
19 मुकदमों का हवाला देकर आवेदन किया था खारिज
डीएम की ओर से आवेदन खारिज करते हुए आदेश में आरोपी सुशील कुमार उर्फ सट्टा के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया था। आदेश के मुताबिक उसके खिलाफ वर्ष 2011 से 19 मुकदमे दर्ज हैं।
प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया था कि संबंधित अचल संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं। साथ ही संपत्तियों के वैध स्रोत को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए गए थे।
इन्हीं आधारों पर संपत्ति को रिलीज करने के आवेदन को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने इस फैसले को कानूनी प्रक्रिया के आधार पर हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने धारा 16(1) का दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट की धारा 16(1) के प्रावधानों पर विशेष ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि धारा 15 के तहत यदि संपत्ति को रिलीज करने से इन्कार किया जाता है तो जिलाधिकारी को अपनी रिपोर्ट के साथ मामला उस न्यायालय को भेजना होता है, जिसे गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध की सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
यानी डीएम द्वारा संपत्ति रिलीज का आवेदन खारिज कर देने के बाद मामला केवल प्रशासनिक स्तर पर समाप्त नहीं किया जा सकता। कानून में आगे की प्रक्रिया भी निर्धारित है और उसका पालन करना जरूरी है।
प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर डीएम का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने पाया कि इस मामले में डीएम की ओर से संपत्ति रिलीज के आवेदन को खारिज तो कर दिया गया, लेकिन कानून में निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक मामले को संबंधित सक्षम कोर्ट में नहीं भेजा गया।
कोर्ट ने इसे गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के विपरीत माना। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी के 9 मार्च 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने मामले को दोबारा जिलाधिकारी के पास भेजते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से संपत्ति की रिहाई के लिए दिए गए अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय लिया जाए।
दो महीने में करना होगा नए सिरे से फैसला
हाईकोर्ट ने मामले में समय सीमा भी तय की है। आदेश में जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से दो महीने के भीतर याचिकाकर्ता के संपत्ति रिलीज संबंधी अभ्यावेदन पर नए सिरे से निर्णय लिया जाए।
इस तरह हाईकोर्ट ने संपत्ति की रिलीज को सीधे मंजूरी देने के बजाय कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अब डीएम को मामले पर दोबारा विचार करना होगा और आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार करनी होगी।
फैसले का अहम पहलू क्या है?
इस आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति कुर्क किए जाने के बाद उसे रिलीज करने की प्रक्रिया में जिलाधिकारी की भूमिका को कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही निभाना होगा। यदि रिलीज का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है, तो संबंधित मामले को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम कोर्ट तक पहुंचाना जरूरी है।
हाईकोर्ट ने इसी प्रक्रिया को नजरअंदाज किए जाने को गंभीरता से लिया और डीएम के आदेश को कायम रखने के बजाय उसे रद्द कर दिया। इससे यह साफ होता है कि कुर्क संपत्ति से जुड़े मामलों में केवल प्रशासनिक आदेश पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून में बताई गई अगली न्यायिक प्रक्रिया का पालन भी आवश्यक है।

