Kanpur नगर निगम की बैठक में हंगामा, मंगल भवन की समितियां भंग करने पर पार्षदों ने घेरा
उत्तर प्रदेश के Kanpur में नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक शुरू होते ही हंगामे में बदल गई। बैठक में मंगल भवन की समितियों को भंग किए जाने का मुद्दा सबसे पहले गरमाया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण फैसले में कार्यकारिणी की अनुमति क्यों नहीं ली गई और सदन को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
पार्षदों का तर्क था कि नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में कार्यकारिणी और सदन की भूमिका तय है। ऐसे में बिना उनकी अनुमति के मंगल भवन की समितियां भंग किए जाने को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। इसी मुद्दे पर बैठक के दौरान पार्षदों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
मंगल भवन की समितियां भंग करने पर उठे सवाल
कार्यकारिणी की बैठक में पार्षदों ने मंगल भवन की समितियों को भंग किए जाने का मुद्दा उठाया। पार्षदों का कहना था कि समितियों से जुड़ा फैसला इतना महत्वपूर्ण है कि इसे कार्यकारिणी की जानकारी और अनुमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक में इस बात को लेकर नाराजगी दिखाई दी कि नगर निगम के स्तर पर लिए गए इस फैसले में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज किया गया। पार्षदों ने अधिकारियों से इस फैसले की प्रक्रिया और उसके आधार के बारे में जवाब मांगा।
मामला बढ़ने के साथ बैठक का माहौल भी गर्म होता चला गया। पार्षद अपनी बात रखने पर जोर देते रहे, जबकि अधिकारियों की ओर से बैठक की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मुद्दे उठाने की बात कही गई।
सपा पार्षद नक्शा लेकर पहुंचे, विकास कार्यों पर लगाया आरोप
हंगामे के बीच सपा पार्षद रजत कौशिक ने अपने वार्ड से जुड़ा नक्शा बैठक में दिखाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के विकास कार्य दूसरे इलाके में कराए जा रहे हैं।
पार्षद ने नक्शे के जरिए यह बताने की कोशिश की कि जिस क्षेत्र के लिए विकास कार्य स्वीकृत या प्रस्तावित हैं, वहां के बजाय दूसरे इलाके में काम कराया जा रहा है। इससे बैठक में एक और मुद्दा जुड़ गया और पार्षदों की ओर से अधिकारियों से जवाब मांगने का सिलसिला तेज हो गया।
हालांकि नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने इस पर बैठक की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट किया कि कार्यकारिणी की बैठक में एजेंडे में शामिल प्रस्तावों से संबंधित सवाल ही पूछे जाएं, ताकि उनका जवाब दिया जा सके।
नगर आयुक्त बोले- एजेंडे से अलग सवाल पर अलग समय लेना होगा
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने पार्षदों से कहा कि बैठक के एजेंडे से जुड़े विषयों पर सवाल किए जाने पर उनका जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई ऐसा मुद्दा उठाया जाता है जो एजेंडे में शामिल नहीं है, तो उसका तत्काल जवाब देना संभव नहीं होगा।
ऐसे मामलों के लिए अलग से समय लिया जाना चाहिए। नगर आयुक्त के इस जवाब के बाद भी पार्षदों की नाराजगी पूरी तरह शांत नहीं हुई। कई पार्षद अपनी समस्याओं और क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर तत्काल जवाब चाहते दिखाई दिए।
बैठक में पार्षदों की ओर से अधिकारियों का घेराव किए जाने और तीखी बहस की स्थिति भी बनी। माहौल गर्म होता देख नगर आयुक्त ने व्यक्तिगत टिप्पणियां नहीं करने की अपील की।
तीखी बहस के बीच नगर आयुक्त ने की अपील
बैठक के दौरान जिस तरह पार्षदों और अधिकारियों के बीच बहस बढ़ी, उससे स्थिति काफी तनावपूर्ण नजर आई। नगर आयुक्त ने बातचीत के दौरान व्यक्तिगत टिप्पणी से बचने की अपील की।
उनका जोर इस बात पर था कि बैठक में प्रस्तावों और नगर निगम के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो तथा व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचते हुए प्रक्रिया के अनुसार सवाल किए जाएं।
लेकिन पार्षदों की ओर से अपने-अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाने का सिलसिला जारी रहा। मंगल भवन की समितियों से शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे वार्डों के विकास कार्यों और नगर निगम के कामकाज से जुड़े दूसरे सवालों तक पहुंच गया।
महापौर प्रमिला पांडेय भी अधिकारियों से नाराज
बैठक में महापौर प्रमिला पांडेय का रुख भी कई मुद्दों पर सख्त नजर आया। उन्होंने नगर आयुक्त से विभिन्न मामलों को लेकर नाराजगी जताई और जवाब मांगा।
इससे साफ रहा कि बैठक में केवल पार्षद ही सवाल नहीं उठा रहे थे, बल्कि महापौर ने भी अधिकारियों के सामने कई मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की कोशिश की। कार्यकारिणी की बैठक में एक के बाद एक मुद्दे सामने आने के कारण माहौल लगातार गर्म बना रहा।
एक बैठक, कई सवाल और बढ़ता टकराव
कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में हुआ हंगामा केवल मंगल भवन की समितियों तक सीमित नहीं रहा। पार्षदों ने अपने वार्डों के विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए और अधिकारियों से जवाब मांगा।
दूसरी ओर नगर आयुक्त ने बैठक की निर्धारित प्रक्रिया का हवाला देते हुए एजेंडे से जुड़े सवालों पर जवाब देने की बात कही। इस खींचतान के बीच बैठक में तीखी बहस और घेराव की स्थिति बनी।

