उत्तर प्रदेश

Sonbhadra News: लेखपालों को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस

Sonbhadra News: कोर्ट से मिले आदेश के क्रम में 1995 से अब तक का रिकर्ड मेंटेन करने का काम तेज कर दिया गया है। वहीं इस अवधि (1995 से अब तक) में रिकॉर्ड मेंटेन ना करने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की भी तैयारी शुरू कर दी गई है।राबर्ट्सगंज तहसील प्रशासन की प्रारंभिक जांच में इसके लिए 12 लेखपालों की जिम्मेदारी तय की गई है। जिसमें तीन की मृत्यु हो चुकी है। एक को बर्खास्त किया जा चुका है। एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। शेष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

उप जिलाधिकारी दुद्धी, उपजिलाधिकारी ओबरा और उप जिलाधिकारी घोरावल को भी पत्र जारी कर कार्रवाई के लिए कहा गया है। उधर, हाईकोर्ट ने इसी आधार पर मामला निर्णित करते हुए दो माह के भीतर सारा अभिलेख अपडेट करने का आदेश दिया है। ऐसा न करने पर वादी के पास अवमानना याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला रहेगा।

टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज में अपने को अमरनाथ महाल का जमींदार बताने वाले पारसनाथ अग्रहरी ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कहा कि राबर्ट्सगंज के एक हिस्से में जमींदारी विनाश कानून के प्रावधान लागू नहीं है। बावजूद जिला प्रशासन 1995 से अब तक इससे जुड़ा रिकॉर्ड मेंटेन नहीं कर रहा है। उन्होंने इसके लिए डीएम को निर्देश दिए जाने की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से जानकारी मांगी। इसमें 1995 से अब तक जमींदारी से जुड़ी प्रक्रिया के तहत खतौनी का लेखन कार्य ना होने का मामला सामने आया। इस पर हाईकोर्ट ने डीएम से अब तक खतौनी अपडेट क्यों नहीं की गई? इसको लेकर की जा रही कार्रवाई और अद्यतन स्थिति का विवरण मांगा।

इसके क्रम में डीएम की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल के जरिए कोर्ट को जानकारी दी गई कि तत्कालीन जिलाधिकारी की तरफ से 25 अगस्त 2020 को ग्राम टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज के जमींदारी की खतौनी खसरा एवं अन्य अभिलेखों की पड़ताल एवं अद्यतन करने के लिए टीम गठित की गई है। कोरोना व्यस्तता के कारण नानजेडए के खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। डीएम ने दो माह के भीतर नानजेडए खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण करा देने की बात कही।

वहीं 1995 के बाद से अब तक खसरा खतौनी के लेखन का कार्य नहीं किया गया? इस मसले पर डीएम की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि इसको लेकर की गई जांच में 1995 से अब तक कार्यरत लेखपालों की प्रथमदृष्टया शिथिलता पाई गई है। नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।

इस संबंध में लेखपालों को कारण बताओ नोटिस जारी की गई है। उधर, उप जिलाधिकारी राबर्ट्सगंज की तरफ से एसडीएम दुद्धी, ओबरा और एसडीएम घोरावल को पत्र जारी कर पूर्व में राबर्टसगंज में तैनात रहे लेखपालों (वर्तमान में उनके तहसील में तैनात) के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई के लिए कहा गया है। बताया गया है कि टांड के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज के काफी क्षेत्रफल ऐसे हैं जहां पर उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम लागू नहीं है। इस एरिया की वर्ष में तीन बार पड़ताल करते हुए नानजेडए खसरा-खतौनी तैयार करना तथा अभिलेख अद्यतन रखना लेखपाल की जिम्मेदारी है।

अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि डीएम द्वारा हाई कोर्ट के समक्ष दाखिल किए शपथपत्र में 1995 से अब तक कार्यरत लेखपाल प्रमोद कुमार सिंह, विक्रमादित्य (मृतक), रामकेश (मृतक), अंबा प्रसाद शुक्ला (मृतक), अवधेश कुमार तिवारी, जगदीश दुबे, रामधनी, प्रभु नारायण मिश्र (सेवानिवृत्त), सुदीप श्रीवास्तव, विष्णु चंद्र द्विवेदी (बर्खास्त), राममूरत, रत्नेश कुमार शुक्ला को प्रथम दृष्टया खतौनी-खसरा लेखन न करने के लिए जिम्मेदार माना गया है। और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी गई है।

News-Desk

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