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Afghanistan Pakistan Border Conflict: नूर खान एयरबेस पर हमले का दावा, डूरंड लाइन पार घुसपैठ से जंग जैसे हालात

Afghanistan Pakistan Border Conflict ने दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण को झकझोर दिया है। बीते चार दिनों से अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर लगातार हवाई हमले, तोपों की गड़गड़ाहट और गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। दोनों देशों के बीच हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि सीमावर्ती इलाकों में जंग जैसे दृश्य सामने आ रहे हैं।

तालिबान सरकार का दावा है कि उसने पाकिस्तान के अत्यंत संवेदनशील नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में स्थित है और पाकिस्तान की सैन्य संरचना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।


🔴 नूर खान एयरबेस और अन्य सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा

तालिबान के एक मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की जमीन में प्रवेश कर चुके हैं। उनके अनुसार, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

Afghanistan Pakistan Border Conflict के बीच तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, बगराम और अन्य क्षेत्रों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है।

पाकिस्तानी वायुसेना ने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों पर हमले का दावा किया है। हालांकि तालिबान का कहना है कि उसके केवल 8 से 13 लड़ाके मारे गए हैं और कुछ घायल हुए हैं।


🔴 पाकिस्तान का ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया है। इसका अर्थ है – अपने हक के लिए खड़े होना। इस ऑपरेशन के तहत काबुल सहित कई प्रांतों में हमले किए गए।

पाकिस्तानी सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक, अब तक 400 से अधिक अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।

दूसरी ओर तालिबान का दावा है कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया।


🔴 संघर्ष की शुरुआत: 22 फरवरी से बढ़ता तनाव

Afghanistan Pakistan Border Conflict की शुरुआत 22 फरवरी को हुई, जब पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबारों ने यह संख्या 80 तक बताई।

इसके जवाब में 27 फरवरी को अफगानिस्तान ने पलटवार किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा।


🔴 TTP विवाद: आरोप और इनकार

इस पूरे Afghanistan Pakistan Border Conflict के केंद्र में TTP यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का मुद्दा है। इस्लामाबाद लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि TTP अफगानिस्तान की जमीन से संचालित हो रहा है।

तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। उसका कहना है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को नहीं करने देती।


🔴 पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव

तनाव के बीच पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी उकसावे पर कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया।


🔴 डूरंड लाइन: विवाद की ऐतिहासिक जड़

Afghanistan Pakistan Border Conflict की पृष्ठभूमि में डूरंड लाइन का दशकों पुराना विवाद भी शामिल है। यह सीमा रेखा औपनिवेशिक काल में तय की गई थी, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से तनाव और बढ़ गया। सीमा पर अक्सर झड़पें, गोलीबारी और आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।


🔴 आगे क्या? क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा

विश्लेषकों का मानना है कि यदि Afghanistan Pakistan Border Conflict लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच अविश्वास गहराता जा रहा है और सैन्य बयानबाजी भी तेज होती दिख रही है।

तालिबान ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने आगे हमला किया तो और कड़ा जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान ने भी स्पष्ट किया है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।


Afghanistan Pakistan Border Conflict ने दोनों पड़ोसी देशों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। नूर खान एयरबेस पर हमले के दावे, ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन और डूरंड लाइन पार घुसपैठ के आरोपों के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास होते हैं या सैन्य टकराव और तेज होता है, यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होगा।

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