Agra में ठगी के केस ने लिया नया मोड़: BJP विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई बोले- ‘हम खुद ठगी के शिकार’, पुलिस आयुक्त को वीडियो समेत सौंपे सबूत
News-Desk
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विजयपाल सिंह का कहना है कि जिस मामले में उन्हें और उनकी पत्नी को आरोपी बनाया गया है, उसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने पुलिस आयुक्त के सामने अपनी बात रखते हुए वीडियो सहित कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। इन वीडियो में कथित तौर पर अमर सिंह और उनके परिजन राजेश बघेल को नौकरी लगवाने के लिए रुपये देते हुए दिखाई दे रहे हैं।
पुलिस आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अलग-अलग पक्षों की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों की वास्तविक स्थिति क्या है।
सरकारी नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप
शाहगंज क्षेत्र के नगला भोजा निवासी विजयपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी मंजू कुशवाह के मायके के आसपास रहने वाले सिरसागंज निवासी राजेश बघेल, उनके बेटे योगेश बघेल, सुदेश और अन्य लोगों ने परिचय का फायदा उठाकर उन्हें अपने झांसे में लिया।
विजयपाल सिंह के अनुसार, आरोपित पक्ष ने उनके बेटों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और इसी नाम पर उनसे रकम ली गई।
उनका दावा है कि मामला केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं था। उनके परिचय का इस्तेमाल करते हुए स्थानीय पार्षद सहित कई अन्य रिश्तेदारों के बच्चों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का कथित भरोसा दिया गया और उनसे भी लाखों रुपये लिए गए।
विजयपाल सिंह का कहना है कि इस कथित ठगी को लेकर उन्होंने स्वयं 20 जून को प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पहले खुद शिकायतकर्ता, फिर दूसरे मामले में आरोपी बनने का दावा
विजयपाल सिंह की ओर से सामने रखी गई कहानी का सबसे अहम हिस्सा यही है कि वह स्वयं को ठगी का शिकार बताते हैं, लेकिन बाद में उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ ही ठगी की प्राथमिकी दर्ज हो गई।
उनके मुताबिक, उनके रिश्तेदार अमर सिंह की शिकायत पर लोहामंडी थाने में उन्हें और उनकी पत्नी को भी आरोपी बनाया गया है।
विजयपाल सिंह का आरोप है कि इस मुकदमे में उन्हें राजेश बघेल और अन्य लोगों के साथ मिलकर ठगी करने वाला बताया गया, जबकि वास्तविकता में वे खुद उन लोगों से कथित तौर पर ठगी का शिकार हुए हैं।
इसी दावे को मजबूत करने के लिए उन्होंने पुलिस आयुक्त को वीडियो और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है।
पुलिस आयुक्त के सामने रखे वीडियो ने बढ़ाई मामले की पेचीदगी
विजयपाल सिंह ने पुलिस आयुक्त को जो वीडियो सौंपे हैं, उन्हें वह अपने पक्ष का महत्वपूर्ण साक्ष्य बता रहे हैं।
उनका दावा है कि वीडियो में अमर सिंह और उनके परिजन किसी स्थान पर राजेश बघेल को नौकरी लगवाने के लिए रुपये देते दिखाई दे रहे हैं।
विजयपाल सिंह का तर्क है कि यदि वीडियो में दिखाई दे रही घटना की जांच से यह साबित होता है कि रकम नौकरी लगवाने के नाम पर दी गई थी, तो इससे यह सवाल उठता है कि उन्हें इस कथित लेनदेन या ठगी से किस आधार पर जोड़ा गया।
हालांकि, किसी वीडियो की मौजूदगी अपने आप में आरोपों को अंतिम रूप से साबित नहीं करती। वीडियो की तारीख, स्थान, उसमें मौजूद लोगों की पहचान, बातचीत का संदर्भ और रकम के लेनदेन की प्रकृति की जांच जरूरी होगी।
यही कारण है कि अब पुलिस की जांच इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विजयपाल बोले- मेरे परिचय का फायदा उठाया गया
विजयपाल सिंह का आरोप है कि आरोपितों ने उनके परिचय और सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल किया।
उनके अनुसार, सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर उनके परिवार को पहले विश्वास में लिया गया। इसके बाद परिचित लोगों के बच्चों की नौकरी लगवाने की बात भी उनके माध्यम से आगे बढ़ाई गई।
उन्होंने दावा किया कि स्थानीय पार्षद सहित कई रिश्तेदारों के बच्चों के लिए भी सरकारी नौकरी का झांसा दिया गया और इस प्रक्रिया में लाखों रुपये लिए गए।
विजयपाल सिंह का कहना है कि उनके परिचय के कारण दूसरे लोगों ने भी भरोसा किया, लेकिन बाद में मामला विवाद में बदल गया।
20 जून की शिकायत से शुरू हुआ एक अलग पक्ष
विजयपाल सिंह के मुताबिक, उन्होंने कथित ठगी को लेकर 20 जून को स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इस शिकायत में उन्होंने राजेश बघेल, योगेश बघेल, सुदेश और अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए।
उनकी शिकायत का आधार कथित तौर पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेना था।
अब इसी घटनाक्रम के दूसरे हिस्से में उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ लोहामंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज होने से मामला और उलझ गया है।
एक तरफ विजयपाल स्वयं को पीड़ित बताते हैं, जबकि दूसरी ओर रिश्तेदार अमर सिंह की शिकायत के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है।
एक ही कहानी में दो पक्ष, दोनों के आरोप अलग
मामले में सामने आए विवरण से स्पष्ट है कि विवाद के केंद्र में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित पैसों का लेनदेन है, लेकिन दोनों पक्षों की कहानी अलग-अलग है।
विजयपाल सिंह का कहना है कि वह और उनकी पत्नी खुद ठगी के शिकार हैं और उन्हें गलत तरीके से आरोपी बनाया गया।
वहीं, अमर सिंह की शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में विजयपाल और उनकी पत्नी को आरोपी बनाए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में जांच के दौरान पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह होगा कि पैसे किसने दिए, किसे दिए गए, किस उद्देश्य से दिए गए और इस पूरे लेनदेन में विजयपाल सिंह तथा उनकी पत्नी की वास्तविक भूमिका क्या थी।
मामले में कई लोगों के नाम आने से बढ़ी जांच की जरूरत
विजयपाल सिंह ने अपने आरोपों में राजेश बघेल के साथ उनके बेटे योगेश बघेल, सुदेश और अन्य लोगों का भी उल्लेख किया है।
उनका दावा है कि इस नेटवर्क ने कई लोगों को सरकारी नौकरी का भरोसा देकर रकम हासिल की।
यदि जांच में कई शिकायतकर्ताओं या संभावित पीड़ितों की बात सामने आती है, तो पुलिस के लिए प्रत्येक व्यक्ति के बयान और आर्थिक लेनदेन को अलग-अलग जांचना जरूरी होगा।
ऐसे मामलों में केवल मौखिक आरोपों के बजाय बैंक लेनदेन, नकद भुगतान, मोबाइल बातचीत, संदेश, वीडियो और अन्य दस्तावेजी सामग्री की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
नौकरी का लालच और लाखों रुपये का खेल
सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं और उनके परिवारों को कथित तौर पर नौकरी लगवाने का भरोसा देकर रकम मांगना ठगी के मामलों में एक गंभीर आरोप होता है।
सरकारी नौकरी पाने की इच्छा कई परिवारों के लिए जीवन बदलने वाले अवसर से जुड़ी होती है। इसी उम्मीद का फायदा उठाकर यदि कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने का दावा करे और पैसे ले, तो इससे परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी हो सकती है।
आगरा के इस मामले में भी सरकारी नौकरी दिलाने के कथित वादे को लेकर बड़ी रकम के लेनदेन का आरोप सामने आया है।
लेकिन किसने किससे कितनी रकम ली और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
विजयपाल और मंजू ने कहा- प्राथमिकी खत्म होनी चाहिए
पुलिस आयुक्त से मुलाकात के दौरान विजयपाल सिंह और उनकी पत्नी मंजू कुशवाह ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खत्म कराने की मांग रखी।
उनका कहना है कि उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है।
विजयपाल ने अपने पक्ष में वीडियो सहित साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उनके मुताबिक, यदि प्रस्तुत सामग्री की जांच की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि वह स्वयं कथित ठगी के पीड़ित हैं और जिस लेनदेन को लेकर उन पर आरोप लगाया गया है, उससे उनका कोई संबंध नहीं है।
पुलिस ने जांच के दिए निर्देश
मामला पुलिस आयुक्त के सामने पहुंचने के बाद जांच के निर्देश दिए गए हैं।
अब जांच में दोनों प्राथमिकी और दोनों पक्षों के दावों को सामने रखकर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना होगा।
पुलिस के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 20 जून को विजयपाल सिंह की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में क्या आरोप थे और बाद में अमर सिंह की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में विजयपाल तथा उनकी पत्नी के खिलाफ क्या विशिष्ट आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा दोनों मामलों में नामजद अन्य लोगों की भूमिका और कथित रकम के लेनदेन की भी जांच की जा सकती है।
वीडियो की जांच से खुल सकते हैं कई राज
मामले में प्रस्तुत वीडियो फिलहाल विजयपाल सिंह के दावे का महत्वपूर्ण आधार हैं।
यदि वीडियो में वास्तव में पैसे के लेनदेन की घटना रिकॉर्ड हुई है, तो जांच एजेंसियां यह पता लगा सकती हैं कि वीडियो कब बनाया गया, किस स्थान पर बनाया गया और उसमें मौजूद लोग कौन हैं।
इसके अलावा यह भी देखा जाना जरूरी होगा कि वीडियो में दिखाई दे रही रकम किस उद्देश्य से दी जा रही थी।
यदि वीडियो सरकारी नौकरी के नाम पर रकम देने की घटना को प्रमाणित करता है, तो इससे मामले के घटनाक्रम की एक अहम कड़ी सामने आ सकती है। लेकिन यदि वीडियो का संदर्भ अलग निकलता है, तो उसका प्रभाव भी उसी आधार पर तय होगा।
सिर्फ वीडियो नहीं, पूरे आर्थिक लेनदेन की जांच जरूरी
ठगी के आरोपों की जांच में केवल एक वीडियो पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।
यदि लाखों रुपये के लेनदेन का आरोप है तो बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, नकद रकम, कॉल डिटेल, संदेश और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
किसी व्यक्ति ने किसके कहने पर रकम दी और रकम आखिरकार किसके पास पहुंची, इससे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने में मदद मिल सकती है।
यदि नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप है तो कथित नौकरी की प्रक्रिया, संबंधित संस्थान या विभाग का नाम और नौकरी दिलाने का दावा किस आधार पर किया गया था, इसकी भी जांच आवश्यक होगी।
परिचय का फायदा उठाने के आरोप की भी होगी पड़ताल
विजयपाल सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके परिचय का फायदा उठाया गया।
उनके अनुसार, लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा उनके माध्यम से दिलाया गया और उनके सामाजिक संपर्कों के कारण दूसरे परिवार भी इस कथित व्यवस्था से जुड़े।
यदि ऐसा हुआ है तो पुलिस के सामने यह पता लगाने की जरूरत होगी कि विजयपाल सिंह की भूमिका वास्तव में क्या थी।
क्या वह स्वयं किसी को नौकरी दिलाने का भरोसा दे रहे थे, क्या वह केवल अपने परिचितों को दूसरे लोगों से मिलवा रहे थे या उन्हें भी नौकरी के नाम पर पैसे देने के लिए विश्वास में लिया गया था—इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आएंगे।
रिश्तेदार अमर सिंह की शिकायत ने बदली दिशा
मामले में अमर सिंह की शिकायत महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आई है।
विजयपाल सिंह के अनुसार, अमर सिंह की शिकायत के आधार पर लोहामंडी थाने में उनके और उनकी पत्नी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
विजयपाल का कहना है कि वह इस मामले में आरोपी बनाए जाने के बावजूद स्वयं कथित ठगी के पीड़ित हैं।
अब जांच में अमर सिंह की शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल होगी और यह देखा जाएगा कि उनके पास उपलब्ध साक्ष्य क्या हैं।
इसी के साथ विजयपाल द्वारा प्रस्तुत वीडियो और अन्य सामग्री की तुलना भी की जा सकती है।
लोहामंडी थाना मामले की जांच का अहम केंद्र
क्योंकि विजयपाल और उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी लोहामंडी थाने से संबंधित बताई गई है, इसलिए इस मामले की पुलिस जांच का केंद्र भी यही रहेगा।
जांच अधिकारियों के सामने दोनों पक्षों से बयान लेने के अलावा संबंधित दस्तावेज जुटाने की चुनौती होगी।
यदि कई लोगों से रकम लिए जाने का आरोप है तो संभावित शिकायतकर्ताओं की संख्या और उनके बयान भी मामले की दिशा तय कर सकते हैं।
पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग लोगों के आरोपों में कोई समान पैटर्न दिखाई देता है या नहीं।
राजेश बघेल और अन्य पर भी आरोप
विजयपाल सिंह ने राजेश बघेल, उनके बेटे योगेश बघेल, सुदेश और अन्य लोगों पर सरकारी नौकरी के नाम पर कथित ठगी का आरोप लगाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों के खिलाफ अन्य स्थानों पर भी मामले दर्ज हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है। प्रत्येक मामले में आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
इस मामले में भी आरोपित पक्ष का जवाब और जांच में सामने आने वाले तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।
भाजपा विधायक से जुड़े होने के कारण भी मामला चर्चा में
इस पूरे विवाद का एक राजनीतिक पहलू भी है क्योंकि विजयपाल सिंह भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई बताए जा रहे हैं।
हालांकि, किसी आरोपी या शिकायतकर्ता का किसी राजनीतिक व्यक्ति से रिश्तेदारी में होना अपने आप में मामले की कानूनी सच्चाई तय नहीं करता।
फिर भी जब किसी जनप्रतिनिधि के परिवार से जुड़े व्यक्ति का नाम किसी आपराधिक मुकदमे में आता है, तो मामला स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक चर्चा में आ जाता है।
ऐसी स्थिति में जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता का महत्व और बढ़ जाता है, ताकि किसी भी पक्ष को केवल राजनीतिक या पारिवारिक पहचान के आधार पर लाभ या नुकसान न हो।
अब जांच के नतीजे पर टिकी निगाहें
पुलिस आयुक्त द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब मामले की अगली दिशा जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
जांच में यह पता लगाया जाना होगा कि किस पक्ष के आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं।
विजयपाल सिंह द्वारा दिए गए वीडियो और अन्य सामग्री की जांच के साथ उनकी 20 जून की प्राथमिकी तथा अमर सिंह की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी को भी सामने रखकर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़नी होंगी।
यदि दोनों मामलों में एक ही व्यक्तियों और लेनदेन का उल्लेख है, तो पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि उस लेनदेन में किसकी क्या भूमिका थी।
सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी के मामलों में सावधानी जरूरी
यह मामला एक व्यापक सामाजिक समस्या की ओर भी ध्यान खींचता है। सरकारी नौकरी की चाह में कई परिवार बिचौलियों या कथित संपर्कों पर भरोसा कर लेते हैं।
नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे की मांग अपने आप में गंभीर चेतावनी हो सकती है। किसी भी नौकरी के लिए नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची और आधिकारिक आदेश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
किसी परिचित व्यक्ति की सिफारिश या किसी प्रभावशाली व्यक्ति से कथित संपर्क होने के आधार पर बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है।
आगरा के मामले में भी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यही होगा कि कथित नौकरी के वादे का आधार क्या था और रकम लेने वालों ने किस प्रकार का भरोसा दिलाया था।
एक तरफ ठगी का आरोप, दूसरी तरफ खुद को पीड़ित बताने का दावा
Agra Fraud Case की मौजूदा तस्वीर में सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू यही है कि एक पक्ष दूसरे को ठगी का आरोपी बता रहा है, जबकि विजयपाल सिंह स्वयं को उसी कथित ठगी का पीड़ित बता रहे हैं।
उनकी पत्नी मंजू कुशवाह भी इस विवाद में आरोपी बनाए जाने के बाद उनके साथ पुलिस आयुक्त से मिलीं।
दोनों ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में उन्हें गलत तरीके से शामिल किया गया है और उनके पास अपने दावे के समर्थन में वीडियो सहित साक्ष्य हैं।
अब यह देखना होगा कि पुलिस की जांच इन दावों को किस तरह परखती है।
मामला अभी आरोपों और जांच के चरण में
इस समय मामले के विभिन्न पक्षों की ओर से आरोप लगाए गए हैं। इसलिए किसी भी पक्ष को अंतिम रूप से दोषी या निर्दोष बताना जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष से पहले उचित नहीं होगा।
विजयपाल सिंह का दावा है कि वह और उनकी पत्नी ठगी के पीड़ित हैं। दूसरी ओर, अमर सिंह की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है।
पुलिस अब दोनों पक्षों के आरोपों, दस्तावेजों और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच करेगी। इसी प्रक्रिया से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी नौकरी के नाम पर कथित रकम का लेनदेन किसके बीच हुआ और उसमें किसकी क्या भूमिका थी।
पुलिस जांच से सामने आएगा असली घटनाक्रम
आगरा में सामने आए इस मामले ने सरकारी नौकरी के नाम पर कथित ठगी, परिचय के इस्तेमाल और एक ही विवाद में अलग-अलग प्राथमिकी के कारण कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विजयपाल सिंह और मंजू कुशवाह ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खत्म कराने की मांग की है। विजयपाल ने स्वयं को ठगी का शिकार बताते हुए राजेश बघेल और अन्य लोगों पर आरोप लगाए हैं तथा 20 जून को अपनी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।
वहीं, अमर सिंह की शिकायत पर लोहामंडी थाने में विजयपाल और उनकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज होने का उल्लेख सामने आया है।
अब वीडियो, दस्तावेज, आर्थिक लेनदेन, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच से ही यह तय हो सकेगा कि घटनाक्रम वास्तव में क्या था। फिलहाल पुलिस आयुक्त के निर्देश के बाद जांच आगे बढ़ रही है और इसी जांच के परिणाम पर इस विवाद की अगली तस्वीर निर्भर करेगी।

