उत्तर प्रदेश

Aligarh: मेयर की फैक्टरी में कर्मचारी की मौत, शव रखरक परिवार ने किया हंगामा, मदद के भरोसे पर माने परिजन

Aligarh महानगर के बरौला इलाके में स्वतंत्रता दिवस की सुबह अचानक फैली सनसनी ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रशांत ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री की यूनिट में 55 वर्षीय कर्मचारी सुशील कुमार की अचानक मौत से माहौल गमगीन हो गया। घटना के बाद परिजनों और फैक्टरी प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बनी रही, लेकिन मेयर प्रशांत सिंघल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।


35 साल से फैक्टरी में कार्यरत थे सुशील कुमार

मृतक सुशील कुमार, नगला मसानी देहली गेट क्षेत्र के रहने वाले थे और करीब 35 वर्षों से प्रशांत ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री की बरौला बाईपास स्थित यूनिट में नौकरी कर रहे थे।
15 अगस्त की सुबह वे हमेशा की तरह फैक्टरी पहुंचे थे। स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के बीच ही अचानक सुबह 8:40 बजे उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ।

सहकर्मियों ने तत्काल अधिकारियों को जानकारी दी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पहले अस्पताल ने इलाज से मना कर दिया, फिर रामघाट रोड स्थित अस्पताल और अंत में जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें हृदयाघात (Heart Attack) से मृत घोषित कर दिया।


शव को फैक्टरी गेट पर रखकर हंगामा

सुशील कुमार की मौत की खबर सुनते ही परिजन और आसपास के लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां से शव को फैक्टरी लेकर लौटे और गेट पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

परिजनों का आरोप था कि फैक्टरी प्रबंधन ने उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया, जिससे उनकी जान नहीं बच सकी। करीब एक घंटे तक हंगामा चलता रहा। शव को फैक्टरी गेट से उठाने नहीं दिया गया।


मेयर प्रशांत सिंघल मौके पर पहुंचे

मामले की गंभीरता को देखते हुए अलीगढ़ नगर निगम के मेयर और फैक्टरी मालिक प्रशांत सिंघल स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को शांत करने की कोशिश की और भरोसा दिलाया कि परिवार को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

मेयर ने कहा –
“सुशील हमारे बहुत पुराने और ईमानदार कर्मचारी थे। उनके परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी। उनकी पत्नी को आजीवन वेतन और परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी।”

मेयर के आश्वासन के बाद परिजन शांत हो गए और शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए।


बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम पहलू यह रहा कि परिजनों ने न तो कोई लिखित शिकायत दी और न ही पोस्टमार्टम करवाया। पुलिस को सूचना जरूर दी गई थी और मौके पर फोर्स भी पहुंची, लेकिन मामला समझौते के बाद शांत हो गया।

एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक ने बताया –
“घटना की सूचना पर पुलिस भेजी गई थी। लेकिन परिवार ने किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई और न ही पोस्टमार्टम कराया गया।”


स्वतंत्रता दिवस पर फैक्टरी में छाया मातम

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब सभी कर्मचारी समारोह मनाने जुटे थे, तभी यह दर्दनाक हादसा हुआ। सुशील कुमार फैक्टरी परिसर में सफाई कार्य कर रहे थे, तभी अचानक तबीयत बिगड़ गई।
सभी तैयारियां थम गईं और माहौल मातम में बदल गया। सहकर्मी और कर्मचारी गहरे सदमे में हैं।


फैक्टरी कर्मियों में आक्रोश और चिंता

हालांकि मेयर ने आर्थिक मदद और आजीवन वेतन का भरोसा देकर परिजनों को शांत कर दिया, लेकिन फैक्टरी के अन्य कर्मचारी अब सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि फैक्टरी में कोई स्थायी मेडिकल टीम नहीं है, और ऐसी स्थितियों में देरी से इलाज की वजह से जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।


शहर में चर्चा और सियासी रंग

चूंकि यह फैक्टरी मेयर प्रशांत सिंघल की है, इसलिए घटना ने सियासी हलचल भी पैदा कर दी है। विपक्ष इस मुद्दे को उठाकर फैक्टरी प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े कर सकता है।
हालांकि परिजन की चुप्पी और समझौते से विवाद बढ़ने से पहले ही थम गया।


अलीगढ़ की इस घटना ने एक बार फिर से फैक्टरी कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मेयर प्रशांत सिंघल का परिवार को आजीवन वेतन देने का ऐलान सराहनीय जरूर है, लेकिन यह भी देखना होगा कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए फैक्ट्रियों में क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

News-Desk

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