Aligarh ईदगाह में बैरिकेडिंग पर बवाल: नमाजियों को रोके जाने से हंगामा, हजारों लोगों ने नमाज पढ़ने से किया इनकार












Aligarh शाहजमाल ईदगाह में नमाज से पहले अचानक हुए पुलिस प्रशासन के बैरिकेडिंग फैसले ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। बुधवार सुबह ईदगाह पहुंचने वाले हजारों नमाजियों को रास्ते में रोक दिए जाने के बाद भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ईदगाह के भीतर मौजूद लोगों ने भी विरोध स्वरूप नमाज पढ़ने से इनकार कर दिया और लोग उठकर बाहर जाने लगे।
घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में हालात को संभालने की कोशिश की गई, जिसके बाद बैरिकेडिंग हटाई गई और नमाजियों को अंदर जाने की अनुमति दी गई। इस पूरे विवाद के कारण तय समय से करीब 20 मिनट देरी से नमाज शुरू हो सकी।
सुबह-सुबह बैरिकेडिंग से रोके गए हजारों नमाजी
जानकारी के अनुसार पुलिस प्रशासन ने सड़क पर नमाज पढ़े जाने की आशंका को देखते हुए सुबह ही शाहजमाल ईदगाह की ओर जाने वाले अकबरी मस्जिद मार्ग पर पानी की टंकी के पास भारी बैरिकेडिंग कर दी थी। प्रशासन का तर्क था कि यह कदम केवल सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था।
हालांकि, स्थानीय लोगों और नमाजियों का कहना था कि अचानक रास्ता बंद कर देने से हजारों लोग ईदगाह तक नहीं पहुंच पाए। बताया गया कि सुबह 6:15 बजे पहली नमाज का समय तय था, लेकिन छह बजे से पहले ही लोगों को रोक दिया गया।
ईदगाह के दाहिनी ओर बने दो मुख्य प्रवेश द्वार भी बंद करा दिए गए थे। इससे सराय मियां, जंगलगढ़ी, तुर्कमान गेट, एडीए कॉलोनी शाहजमाल और रोरावर जैसे इलाकों से आने वाले लोग बाहर ही फंस गए।
ईदगाह के अंदर भी शुरू हुआ विरोध, लोगों ने कहा- ‘सब आएंगे तभी नमाज होगी’
जब बाहर रोके गए लोगों की सूचना ईदगाह के भीतर मौजूद नमाजियों तक पहुंची तो माहौल अचानक बदल गया। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों ने कहा कि यदि सभी नमाजियों को आने नहीं दिया जाएगा तो अंदर मौजूद लोग भी नमाज नहीं पढ़ेंगे। देखते ही देखते विरोध तेज हो गया और ईदगाह परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
कुछ लोग अपनी जगह से उठकर बाहर जाने लगे, जबकि कई लोगों ने प्रशासनिक फैसले पर नाराजगी जाहिर की। स्थिति बिगड़ती देख ईदगाह कमेटी ने तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया और इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
प्रशासन के हाथ-पांव फूले, तुरंत हटानी पड़ी बैरिकेडिंग
मामला बढ़ता देख प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश शुरू की। सूत्रों के मुताबिक जैसे ही अधिकारियों को पता चला कि ईदगाह के अंदर मौजूद हजारों लोग नमाज पढ़ने से इनकार कर रहे हैं, अफसरों में बेचैनी बढ़ गई।
इसके बाद बैरिकेडिंग हटाई गई और रोके गए लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी गई। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी और नमाज का निर्धारित समय निकल चुका था।
सुबह 6:15 बजे शुरू होने वाली नमाज आखिरकार करीब 6:35 बजे शुरू हो सकी।
शहर मुफ्ती भी हुए नाराज, पहली नमाज के बाद लौट गए घर
इस पूरे घटनाक्रम से शहर मुफ्ती खालिद हमीद भी नाराज बताए गए। जानकारी के अनुसार उन्होंने व्यवस्थाओं पर अप्रसन्नता जाहिर की और पहली नमाज के बाद ही वहां से अपने घर लौट गए।
स्थिति को देखते हुए नमाज से पहले दिया जाने वाला खुतबा भी जल्द समाप्त किया गया। शहर मुफ्ती ने इमाम कारी सागिल से कहा कि रस्म अदायगी को संक्षिप्त रखते हुए जल्दी नमाज अदा कराई जाए ताकि दूसरी नमाज भी समय पर संपन्न हो सके।
इसके बाद इमाम कारी सागिल ने संक्षिप्त प्रक्रिया के साथ नमाज पढ़वाई।
प्रशासन का पक्ष- सड़क पर नमाज रोकने के लिए उठाया गया कदम
पुलिस प्रशासन का कहना है कि बैरिकेडिंग का उद्देश्य केवल सड़क पर नमाज को रोकना और यातायात व्यवस्था बनाए रखना था। अधिकारियों के मुताबिक त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जाते हैं।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि व्यवस्था बनाने के नाम पर अचानक रास्ते बंद करना उचित नहीं था। उनका कहना है कि अगर पहले से स्पष्ट सूचना और समन्वय किया जाता तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना मामला
Shahjamal Eidgah विवाद अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे अव्यवस्थित प्रबंधन बता रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन और आयोजन समितियों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।
त्योहारों के दौरान सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी होती है, लेकिन इसके साथ संवेदनशीलता और संवाद भी उतना ही अहम होता है। अचानक लिए गए फैसले कई बार गलतफहमियों और तनाव की स्थिति पैदा कर देते हैं।
अलीगढ़ जैसे संवेदनशील शहरों में प्रशासनिक सतर्कता के साथ-साथ सामुदायिक समन्वय को भी प्राथमिकता देना आवश्यक माना जा रहा है।








