उत्तर प्रदेश

Sambhal सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा आदमी ‘मृत’ घोषित! 12 बीघा जमीन के लालच में रची गई साजिश, तख्ती लेकर खुद को जिंदा साबित करता फिर रहा पीड़ित

Sambhal जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की गंभीर लापरवाही और कथित साजिशों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक पूरी तरह जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया, और हैरानी की बात यह है कि बाकायदा उसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया।
अब हालात ऐसे हैं कि पीड़ित व्यक्ति को खुद को जिंदा साबित करने के लिए तख्ती हाथ में लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यह मामला Sambhal news में प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन गया है।


कुढ़फतेहगढ़ थाना क्षेत्र का मामला, जहांगीरपुर गांव से उठा सवाल

पूरा मामला कुढ़फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के गांव जहांगीरपुर का है।
यहां के निवासी तेजपाल को ब्लॉक स्तर के सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। सरकारी कागजों में उनका नाम मृतकों की सूची में दर्ज कर दिया गया और इसके आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो गया।
जब तेजपाल को इस बारे में जानकारी मिली, तो वह स्तब्ध रह गया। उसका कहना है कि वह न सिर्फ जिंदा है, बल्कि रोजमर्रा का जीवन भी सामान्य रूप से जी रहा है—फिर भी सरकारी सिस्टम उसे मृत मान चुका है।


पत्नी पर गंभीर आरोप, 12 बीघा जमीन के लिए रची साजिश

पीड़ित तेजपाल ने इस पूरे प्रकरण के पीछे अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं
तेजपाल का दावा है कि उसकी पत्नी ने—

  • 12 बीघा जमीन हड़पने के लालच में

  • अपने कथित प्रेमी

  • और कुछ ब्लॉक कर्मचारियों की सांठगांठ से

उसे कागजों में मृत घोषित करवा दिया।
तेजपाल का कहना है कि इस साजिश का मकसद जमीन को अपने नाम करवाना था, जिसके लिए उसे कागजों में ‘मृत’ दिखाना जरूरी समझा गया। यह आरोप Sambhal news को और ज्यादा सनसनीखेज बना रहा है।


‘मैं जिंदा हूं साहब’: तख्ती लेकर न्याय की गुहार

खुद को जिंदा साबित करने के लिए तेजपाल को जो करना पड़ रहा है, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
तेजपाल हाथ में “मैं जिंदा हूं साहब” लिखी तख्ती लेकर—

  • ब्लॉक कार्यालय

  • तहसील

  • और अन्य सरकारी दफ्तरों

के चक्कर काट रहा है।
उसका कहना है कि हर दफ्तर में उसे एक-दूसरे के पास भेज दिया जाता है, लेकिन कोई भी अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं कि जिंदा आदमी को मृत घोषित करने की गलती कैसे और किसने की


डीएम और एसपी तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य

पीड़ित तेजपाल का कहना है कि उसने इस पूरे मामले की शिकायत—

  • जिला अधिकारी

  • पुलिस अधीक्षक

तक पहुंचाई है।
इसके बावजूद अब तक न तो उसके नाम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र रद्द किया गया है और न ही उसे सरकारी रिकॉर्ड में जीवित घोषित किया गया है
तेजपाल का आरोप है कि सिस्टम की यही उदासीनता उसकी सबसे बड़ी लड़ाई बन गई है। यह स्थिति Sambhal news में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल

इस पूरे मामले ने सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
अगर बिना उचित सत्यापन के किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किया जा सकता है, तो—

  • जमीन-जायदाद

  • पेंशन

  • राशन कार्ड

  • बैंक खाते

  • और अन्य सरकारी योजनाओं

में कितनी बड़ी गड़बड़ी संभव है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की खामी को उजागर करता है।


निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

तेजपाल ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि—

  • इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

  • जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही या साजिश सामने आए

  • उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए

साथ ही तेजपाल ने यह भी मांग की है कि उसे जल्द से जल्द सरकारी दस्तावेजों में जीवित घोषित किया जाए, ताकि वह सामान्य जीवन जी सके और उसकी संपत्ति सुरक्षित रह सके।


न्याय की प्रतीक्षा में जिंदा ‘मृतक’

फिलहाल तेजपाल न तो पूरी तरह जीवित माना जा रहा है और न ही उसे मृत होने का कोई लाभ मिला है।
वह सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि सरकारी कागजों की गलती का शिकार बन चुका है।
उसकी लड़ाई अब सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि अपनी पहचान और अस्तित्व को वापस पाने की है।
यह मामला Sambhal news में आम नागरिकों के लिए चेतावनी और प्रशासन के लिए आईना बनकर सामने आया है।


संभल जिले का यह मामला Sambhal news के रूप में सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम की गंभीर खामी को उजागर करता है। एक जिंदा आदमी का कागजों में मृत होना बताता है कि अगर समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो आम नागरिक की पहचान, संपत्ति और अधिकार कभी भी खतरे में पड़ सकते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और तेजपाल को उसका सबसे बुनियादी अधिकार—“जिंदा होने की पहचान”—कब वापस मिलती है।

 

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