शादी का झांसा, चार साल तक दुष्कर्म और सांप से कटवाने की साजिश: Allahabad High Court ने आरोपी पुलिस कांस्टेबल को राहत देने से किया इनकार
Allahabad High Court ने सख्त रुख अपनाते हुए Rape Case में एक गंभीर आपराधिक मामले पर आरोपी पुलिस कांस्टेबल को अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक को सौंप दी है और आदेश दिया है कि 16 मार्च को जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की जाए।
यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने शादी का झांसा देकर एक युवती के साथ कई वर्षों तक दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उसे जान से मारने की साजिश के तहत सांप से कटवाने की कोशिश भी की।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद लिया सख्त फैसला
यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ द्वारा दिया गया। अदालत में यह याचिका आरोपी सिपाही और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें दर्ज मुकदमे को रद्द करने की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को निरस्त किया जाए। हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोप बेहद गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इसी कारण अदालत ने जांच की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को सौंपते हुए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
कानपुर नगर के थाना रैउना से जुड़ा है मामला
यह पूरा घटनाक्रम कानपुर नगर के थाना रैउना क्षेत्र से संबंधित बताया जा रहा है।पीड़िता के अनुसार आरोपी पुलिस कांस्टेबल ने वर्ष 2020 में पहली बार उसके साथ दुष्कर्म किया था। उस समय पीड़िता नाबालिग बताई जा रही है।
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी बहाने चार वर्षों तक उसका शारीरिक और भावनात्मक शोषण करता रहा।
चार साल तक चलता रहा कथित शोषण
पीड़िता के बयान के अनुसार आरोपी ने लगातार कई वर्षों तक शादी का आश्वासन देकर उसका विश्वास हासिल किया और उसी के आधार पर उसके साथ संबंध बनाता रहा।पीड़िता का यह भी आरोप है कि इस दौरान वह गर्भवती हो गई थी। आरोप के मुताबिक आरोपी ने उसे मजबूर करके गर्भपात भी करवाया।
इन आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। अदालत ने भी इस पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सांप से कटवाकर हत्या की कोशिश का आरोप
सबसे चौंकाने वाला आरोप 19 फरवरी 2025 की घटना से जुड़ा है।पीड़िता का आरोप है कि उस दिन आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद दो सपेरों को बुलवाया। आरोप है कि उन सपेरों के माध्यम से पीड़िता को सांप से कटवाया गया।
पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने उसे मरा हुआ समझ लिया और मौके से फरार हो गया। हालांकि किसी तरह उसकी जान बच गई और बाद में यह मामला पुलिस और अदालत तक पहुंचा।यह आरोप सामने आने के बाद मामला और भी सनसनीखेज बन गया।
आरोपी ने मुकदमा रद्द करने की लगाई गुहार
आरोपी पुलिस कांस्टेबल ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।याचिका में आरोपी पक्ष ने दावा किया कि उसके खिलाफ दर्ज मामला गलत है और उसे राहत दी जानी चाहिए।हालांकि अदालत ने याचिका पर विचार करने के बाद तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया और जांच को आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
पीड़िता के वकील ने लगाए गुमराह करने के आरोप
सुनवाई के दौरान पीड़िता के अधिवक्ता ने अदालत में आरोपी पर गंभीर आरोप लगाए।वकील ने कहा कि आरोपी ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। उनके अनुसार आरोपी ने अपने बचाव में पारिवारिक अदालत में एक संपादित फोटो प्रस्तुत किया था।
इस फोटो के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि पीड़िता पहले से शादीशुदा है। पीड़िता के वकील का कहना है कि यह फोटो एडिट किया गया है और इसका उद्देश्य अदालत को भ्रमित करना था।
निष्पक्ष जांच के लिए एसपी बाराबंकी को जिम्मेदारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने जांच की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को सौंप दी है।अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए। इसके साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि जांच की रिपोर्ट 16 मार्च को सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने प्रस्तुत की जाए।
इस आदेश से साफ संकेत मिलता है कि अदालत इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है।
कानूनी प्रक्रिया पर टिकी सबकी नजर
Rape Case ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।इस मामले में एक पुलिसकर्मी पर लगे आरोपों ने समाज में कई सवाल भी खड़े किए हैं। अदालत के आदेश के बाद अब आगे की जांच और रिपोर्ट पर सबकी नजर बनी हुई है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगी।

