खेल जगत

Virat Kohli पर ऑस्ट्रेलियाई मीडिया का हमला: जोकर कहकर की गई आलोचना, भारतीय क्रिकेटरों ने जताया विरोध

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया द्वारा Virat Kohli को जोकर कहे जाने की घटना ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को द वेस्ट ऑस्ट्रेलियन अखबार के पिछले पन्ने पर Virat Kohli को जोकर के रूप में दर्शाया गया, जिसे भारतीय क्रिकेट फैंस और पूर्व क्रिकेटरों ने न केवल गलत बल्कि अपमानजनक भी बताया। दरअसल, कोहली की हाल ही में बॉक्सिंग डे टेस्ट के दौरान सैम कोंस्टास से हुई तीखी झड़प के बाद ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने उन्हें निशाने पर लिया है। यह विवाद उस समय और बढ़ा जब आईसीसी ने कोहली पर 20% मैच फीस का जुर्माना लगाया और एक डिमेरिट पॉइंट भी दिया।

बॉक्सिंग डे पर कोहली और कोंस्टास के बीच हुआ विवाद

मेलबर्न में खेले जा रहे चौथे टेस्ट मैच के पहले दिन, गुरुवार को विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलियाई टीनएजर सैम कोंस्टास को कंधे से टक्कर मार दी थी। यह घटना 10वें ओवर के बाद हुई, जब कोहली ने डेब्यू कर रहे कोंस्टास के साथ मैदान पर टकराव किया। ICC ने इस मामले में अपनी सिफारिश पर कोहली पर 20% मैच फीस का जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट लगाने का फैसला लिया। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई मीडिया इस फैसले को कम मानते हुए कोहली की आलोचना कर रहा है। द वेस्ट ऑस्ट्रेलियन अखबार ने कोहली को जोकर के रूप में दिखाया और शीर्षक दिया “जोकर कोहली”, जो कि भारतीय क्रिकेट फैंस और पूर्व खिलाड़ियों के लिए चौंकाने वाला था।

ICC ने दी सजा, लेकिन क्या वह सही थी?

आस्ट्रेलियाई मीडिया का कहना है कि Virat Kohli को मिली सजा बहुत हल्की थी। ऑस्ट्रेलियाई चैनल 7 पर कमेंट्री कर रहे पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी यह टिप्पणी की कि कोहली को दी गई सजा बहुत कम थी। पोंटिंग ने कहा, “कोहली को छूट देने से आगे चलकर असर पड़ सकता है। यह कोहली जैसे लीजेंड के लिए कोई कठोर सजा नहीं है।” उन्होंने यह भी माना कि अगर कोहली पर कड़ी सजा लगाई जाती तो यह उनके खेल पर सकारात्मक असर डाल सकता था।

भारतीय क्रिकेटरों का आक्रोश

भारतीय क्रिकेटरों ने इस हमले पर नाराजगी जताई है और इसे पूरी तरह से गलत ठहराया है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान ने इस आलोचना को नकारते हुए कहा कि “कोहली को जोकर कहना स्वीकार्य नहीं है।” पठान का मानना है कि कोहली का व्यवहार सही नहीं था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मीडिया को उन्हें इस तरह से निशाना बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “विराट कोहली जैसे लिजेंड क्रिकेटर को इस तरह से टारगेट करना गलत है।”

वहीं, क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी और कहा, “आप अपनी क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए विराट कोहली जैसे लिजेंड खिलाड़ी का इस्तेमाल करते हैं, और फिर उसे जोकर कहते हैं। यह सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि ICC ने विराट को दी गई सजा को पूरी तरह से उचित बताया, क्योंकि यह इस तरह के मामलों में अधिकतम सजा थी।

आस्ट्रेलियाई मीडिया की आलोचना

आस्ट्रेलियाई मीडिया को लेकर भारतीय क्रिकेट जगत में एक बड़ा असंतोष देखने को मिला है। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई मीडिया हमेशा अपने देश के खिलाड़ियों के पक्ष में खड़ा रहता है, और विदेशी खिलाड़ियों के खिलाफ आलोचना करता है। एक ओर जहां भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का नाम इस मामले में प्रमुख था, वहीं मीडिया ने पूर्व कप्तान विराट कोहली को अधिक महत्व दिया। गावस्कर ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा, “एक तरफ आप विराट कोहली के ब्रांड का इस्तेमाल करते हैं और दूसरी ओर उन्हें विलेन बना देते हैं। यह पूरी तरह से गलत है।”

ICC का रवैया और विवाद

गावस्कर ने यह भी बताया कि इस साल ऐसी कई घटनाएं सामने आईं हैं, जिनमें खिलाड़ी विवादों में रहे हैं, लेकिन ICC की कार्रवाई को लेकर कोई सख्ती नहीं दिखाई गई। उदाहरण के लिए, जोश हेजलवुड को इस तरह के विवाद के लिए केवल 15% मैच फीस का जुर्माना लगाया गया था, जबकि जसप्रीत बुमराह को भी इसी प्रकार की सजा दी गई थी। लेकिन विराट कोहली को 20% मैच फीस का जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट दिया गया, जो कि ICC के नियमों के अनुसार अधिकतम सजा थी। फिर भी ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने इसे कोहली के प्रति नरम रवैया बताया है, जो कि गलत है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया का दृष्टिकोण

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के दृष्टिकोण में हमेशा से भारतीय खिलाड़ियों, विशेषकर विराट कोहली के प्रति विरोधात्मक भावनाएं देखने को मिलती हैं। जब भी कोहली और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के बीच कोई विवाद होता है, मीडिया उसे हवा देने का कोई मौका नहीं छोड़ता। यह देखना दिलचस्प है कि इस बार कोहली के खिलाफ मीडिया द्वारा की गई टिप्पणी को भारतीय क्रिकेट जगत ने जिस तरह से उछाला है, वह इस विवाद को और भी बढ़ा रहा है।

विराट कोहली पर सजा और मीडिया की भूमिका

कोहली का व्यवहार इस विवाद के केंद्र में था, लेकिन उनके खिलाफ मीडिया का रवैया कुछ ज्यादा ही कड़ा रहा। ICC ने जितनी सजा दी, वह नियमों के तहत अधिकतम थी, लेकिन फिर भी मीडिया ने इसे हल्का बताया। क्रिकेट का यह विवाद केवल एक खेल से ज्यादा कुछ बन गया है, जिसमें खिलाड़ियों और मीडिया के बीच की जंग साफ नजर आ रही है। यह घटना भारतीय क्रिकेट जगत के लिए एक और सबक है, जहां मीडिया और खिलाड़ियों के बीच संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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