Bijnor- Honey Trap कांड से मचा हड़कंप: पेट्रोल पंप मालिक को प्रेमजाल में फंसाकर ब्लैकमेलिंग, पुलिसकर्मियों और सपा सभासद की भूमिका पर उठे सवाल
Bijnor honey trap case ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में कानून व्यवस्था और राजनीतिक-सामाजिक तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किरतपुर थाना क्षेत्र से सामने आए इस सनसनीखेज मामले में एक पेट्रोल पंप मालिक को कथित तौर पर प्रेमजाल में फंसाकर उसकी आपत्तिजनक वीडियो बनाई गई और फिर उसी वीडियो के जरिए उससे 10 लाख रुपये की मांग की गई। इस प्रकरण में जहां एक ओर सपा के मौजूदा सभासद की गिरफ्तारी हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर दो पुलिसकर्मियों और अन्य प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने से पूरा मामला और संवेदनशील बन गया है।
🔴 जिले में मचा हड़कंप, हरकत में पुलिस प्रशासन
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही आरोपों में पुलिसकर्मियों और राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों के नाम सामने आए, जिले के पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की निगरानी अपने हाथ में ले ली है और दावा किया जा रहा है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
🔴 सपा सभासद शाहवेज की गिरफ्तारी से खुलीं परतें
इस केस में किरतपुर के सपा कार्यकर्ता और मौजूदा सभासद शाहवेज की गिरफ्तारी ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। पुलिस के अनुसार, शाहवेज इस ब्लैकमेलिंग की साजिश में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद यह साफ हुआ कि यह केवल व्यक्तिगत स्तर का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा खेल हो सकता है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शाहवेज से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
🔴 प्रेमजाल से होटल तक: कैसे फंसा पीड़ित
पीड़ित पेट्रोल पंप मालिक अर्सलान ने अपनी शिकायत में बताया कि जनवरी की शुरुआत में उसे फौजिया नाम की एक महिला का फोन आया। पहले सामान्य बातचीत हुई, फिर धीरे-धीरे मैसेज और कॉल के जरिए भरोसे का माहौल बनाया गया।
कुछ दिनों बाद महिला ने उसे बिजनौर बुलाया, जहां एक होटल में मुलाकात हुई। वहीं शारीरिक संबंध बनाने के दौरान गुप्त रूप से उसकी आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर ली गई। पीड़ित का आरोप है कि उसे इसकी भनक तक नहीं लगी कि उसकी निजी पलों को कैमरे में कैद किया जा रहा है।
🔴 वीडियो बना हथियार, शुरू हुई ब्लैकमेलिंग
होटल से निकलने के कुछ ही समय बाद पीड़ित के पास धमकी भरे कॉल आने लगे। वीडियो को वायरल करने और गंभीर मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर उससे मोटी रकम की मांग की जाने लगी।
पीड़ित के अनुसार, लगातार दबाव और धमकियों के कारण वह मानसिक तनाव में आ गया। हर कॉल और मैसेज उसके लिए डर का कारण बन गया। आरोप है कि ब्लैकमेलिंग की यह पूरी प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध तरीके से चलाई गई।
🔴 दो पुलिसकर्मियों के नाम से बढ़ी गंभीरता
मामला तब और चौंकाने वाला हो गया, जब जांच के दौरान दो पुलिसकर्मियों—लालू और पुनीत त्यागी—के नाम सामने आए। आरोप है कि दोनों ने पीड़ित पर समझौते का दबाव बनाया और 10 लाख रुपये देकर मामला निपटाने की सलाह दी।
इस कथित भूमिका ने पूरे पुलिस तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और अगर पुलिसकर्मियों की संलिप्तता साबित होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
🔴 राजनीतिक और सामाजिक रसूख का इस्तेमाल
इस केस में भाकियू टिकैत के मंडल प्रवक्ता आदिल जैदी का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उसने भी पीड़ित पर दबाव बनाने और ब्लैकमेलिंग की प्रक्रिया में भूमिका निभाई।
पीड़ित का कहना है कि राजनीतिक और सामाजिक पहचान का इस्तेमाल कर उसे डराया गया, ताकि वह शिकायत दर्ज न करा सके। इस पहलू ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
🔴 एसपी तक पहुंचा मामला, दर्ज हुआ मुकदमा
लगातार धमकियों से परेशान होकर पीड़ित अर्सलान ने सीधे पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें आरोपों में दम पाया गया।
इसके बाद किरतपुर थाने में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने औपचारिक जांच शुरू की। यहीं से पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
🔴 एक आरोपी जेल में, कई फरार
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सपा सभासद शाहवेज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि महिला फौजिया, आदिल जैदी और दोनों पुलिसकर्मी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जो संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को कानून के शिकंजे में लिया जाएगा।
🔴 डिजिटल सबूत और कॉल डिटेल की जांच
जांच एजेंसियां अब इस केस में डिजिटल साक्ष्यों पर विशेष ध्यान दे रही हैं। पीड़ित और आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मैसेज, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक लेनदेन की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों का मानना है कि इन तकनीकी सबूतों से पूरे नेटवर्क और ब्लैकमेलिंग की योजना का पूरा खाका सामने आ सकता है।
🔴 पुलिस विभाग में खलबली
दो पुलिसकर्मियों के नाम आने के बाद विभाग के भीतर भी हड़कंप मचा हुआ है। उच्च अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
विभागीय स्तर पर भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी लोग इस रैकेट से जुड़े तो नहीं हैं।
🔴 समाज में बढ़ती चिंता और सवाल
Bijnor honey trap case ने समाज में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि निजी रिश्तों और डिजिटल तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकता है।
सामाजिक संगठनों ने जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है, ताकि लोग हनी ट्रैप और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों से सतर्क रह सकें।
🔴 आगे और बड़े खुलासों की संभावना
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जैसे-जैसे डिजिटल और वित्तीय जांच आगे बढ़ेगी, नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
जिले में यह केस अब सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया है और हर किसी की नजर अगली गिरफ्तारी और खुलासों पर टिकी है।

