Muzaffarnagar नगरपालिका परिषद् में कथित भ्रष्टाचार को लेकर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल की परेशानी बढी
मुजफ्फरनगर। Muzaffarnagar नगरपालिका परिषद् में कथित भ्रष्टाचार को लेकर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के खिलाफ हाईकोर्ट तक चल रही लड़ाई में पिछले दिनों हाईकोर्ट से आये एक फैसले को लेकर विरोधी खेमे ने खुशी जाहिर करते हुए चेयरपर्सन पर जल्द ही गाज गिरने का दावा किया था। इस मामले में चेयरपर्सन ने अब शासन को अपना जवाब भेजा है।
इसमें तीनों बिन्दुओं पर लगाये गये भ्रष्टाचार करने के आरोपों को लेकर विस्तापूर्वक जवाब दिया गया है। चेयरपर्सन ने कहा कि किसी भी मामले में भ्रष्टाचार नहीं किया गया, बल्कि भ्रष्टाचार करने से रोकने का काम किया गया है। कोई भी निर्णय नियम विपरीत नहीं लिया गया है। शासन से उन्होंने हाईकोर्ट में स्वयं पैरवी करने की अनुमति भी मांगी है ताकि वह इस लड़ाई को और मजबूती के साथ लड़ते हुए कोर्ट में अपना पक्ष भी रख सकें।
बता दें कि जन विकास सोसायटी के अध्यक्ष मौ. खालिद ने हाईकोर्ट में पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के खिलाफ एक रिट दायर की, जिसमें तीन बिन्दुओं पर उनके खिलाफ शिकायत की गयी है। इसमें नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरएस राठी को वित्तीय चार्ज देने, ऑटो-टैम्पू का ठेका निरस्त कर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप शामिल रहे।
इसको लेकर हाईकोर्ट ने पूर्व में शासन को ६ सप्ताह में कार्यवाही करने के आदेश जारी किये थे। यह भी दावा किया गया कि डीएम सेल्वा कुमारी जे. ने इन आरोपों पर कराई जांच में अनियमितता पाई और अंजू अग्रवाल को दोषी ठहराया था। शासन से कोई कार्यवाही नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गयी, जिसमें हाल ही में हाईकोर्ट ने शासन को फिर से आदेश दिये हैं और नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव से १ माह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा है।
इस आदेश के जारी होने के बाद विरोधी खेमे में उत्साह बन गया और इसे अपनी जीत के रूप में प्रदर्शित किया।सूत्रों के अनुसार इस मामले में चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने शासन को अपना जवाब भेजा है। तीनों बिन्दुओं पर विस्तार से अपना पक्ष रखा और दावा किया है कि किसी भी प्रकरण में न तो नियमों की अनदेखी कर निर्णय लिये गये और न ही कोई भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितता की गयी है।
चेयरपर्सन का दावा है कि उन्होंने यह निर्णय लेकर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम किया है, जोकि विरोधियों को पसंद नहीं आया और वह हर हथकंडा उनके खिलाफ अपना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अपने जवाब में शासन से चेयरपर्सन ने इस याचिका के लिए उनको अपनी पैरवी स्वयं करने का अधिकारी दिये जाने का आग्रह किया है, ताकि वह मजबूती से लड़ाई लड़ें और न्याय हासिल कर पायें।
बता दें कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरएस राठी को वित्तीय चार्ज दिये जाने का अधिकारी पालिका अध्यक्ष को पालिका अधिनियम ने दिया है। व्यवस्था के अनुसार किसी विपरीत परिस्थिति में पालिका अध्यक्ष ५८ दिनों के लिए यह चार्ज दे सकती हैं। जबकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. राठी इस चार्ज पर मात्र ११ दिन रहे हैं, तो यह नियमों के विपरीत नहीं बनता है। इसी के साथ ऑटो-टैम्पो ठेका निरस्त करने के मामले में भी कोई वित्तीय अनियमितता नहीं होने का दावा चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने किया है।
उनका कहना है कि पूर्व के वर्ष में यह ठेका १ लाख ७० हजार रुपये से अधिक का छोड़ा गया था, लेकिन जिस समय यह ठेका नीलाम किया गया तो अंतिम बोली १ लाख ४० हजार पर ही छोड़ दिया गया। जबकि शासन का नियम है कि बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले आगामी वर्ष के लिए कोई भी ठेका १५ से २० प्रतिशत अधिक धनराशि पर छोड़ा जाये।
इसी कारण उन्होंने ठेका निरस्त किया। इसके बाद ठेका नहीं हुआ, उन्होंने टैक्स विभाग के अधिकारियों को विभागीय कर्मचारियों को लगाकर शुल्क वसूलने की व्यवस्था करने के आदेश दिये, लेकिन उनके आदेशों का कार्यान्वयन नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि हमने पूर्व में भी इस मामले में हाईकोर्ट में स्वयं पैरवी करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन शासन का जवाब आने से पहले ही लाकडाउन लग गया और अदालत बन्द हो गयी। अब हम फिर से शासन को यह आग्रह कर रहे हैं कि हमें स्वयं पैरवी की अनुमति प्रदान करें।

