म्यांमार में तख्तापलट: हम किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं- विदेश मंत्रालय
म्यांमार में तख्तापलट के बाद बने हालात को लेकर मंत्रालय ने कहा कि हम किसी भी तरह की हिंसा की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि कानून का शासन होना चाहिए।
हमने राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का अनुरोध किया है और आसियान के माध्यम से वर्तमान स्थिति का हल ढूंढने के लिए हर प्रयास को समर्थन दिया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम संतुलित और रचनात्मक भूमिका निभाने के प्रयास में अपने अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों और यूएनएससी के साथ इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं। वहीं, म्यांमार से लोगों के सीमा पार कर भारत में आने के मामले पर मंत्रालय की ओर से अरिंदम बागची ने कहा कि हम इस पर अपने नियमों और मानवाधिकारों के मुताबिक काम कर रहे हैं।
म्यांमार में जारी हिंसा की भारत निंदा करता है : विदेश मंत्रालय pic.twitter.com/pKr1qsw3r6
— News & Features Network (@mzn_news) April 2, 2021
असम से रोहिंग्याओं की वापसी के प्रयासों को उस वक्त धक्का लगा जब पड़ोसी देश म्यांमार ने 14 वर्षीय एक रोहिंग्या लड़की को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। असम पुलिस की एक टीम उसे म्यांमार के अधिकारियों को सौंपने के लिए मणिपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पहुंची थी।
शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया कि केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद लड़की को असम के सिलचर से मणिपुर में अंतरराष्ट्रीय जांच चौकी पर प्रत्यर्पण के लिए बृहस्पतिवार को ले जाया गया। बहरहाल, म्यांमार के आव्रजन अधिकारियों ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया और कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण जांच चौकी पिछले एक वर्ष से बंद है।
पुलिस के मुताबिक, म्यांमार के अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों से कहा कि उनके देश की स्थिति किसी भी तरह के प्रत्यर्पण के लिए फिलहाल उपयुक्त नहीं है। पुलिस टीम लड़की को लेकर सिलचर लौट गई और उसे आश्रय गृह को सौंप दिया जहां वह रह रही है।
अधिकारियों ने बताया कि दो वर्ष पहले लड़की कछार जिले के सिलचर के रंगपुर इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में एक घर के अंदर अचेतावस्था में मिली थी। उन्होंने बताया कि बाद में पता चला कि उसके माता-पिता बांग्लादेश में कॉक्स बाजार के शरणार्थी शिविर में हैं।
पुलिस ने बताया कि चूंकि वह नाबालिग है इसलिए उसे हिरासत केंद्र में नहीं भेजा गया और उजाला आश्रय केंद्र में भेजा गया जहां से उसे फिर निवेदिता नारी केंद्र में रखा गया। भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने पर पिछले कुछ वर्षों में रोहिंग्या मूल के म्यांमार के कई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है।

