नाबालिग लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों के खिलाफ सख्त कानून के तहत मामला दर्ज करने का फैसला- Himanta Biswa Sarma
Himanta Biswa Sarma ने सोमवार को कहा कि असम कैबिनेट ने नाबालिग लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों के खिलाफ सख्त कानून के तहत मामला दर्ज करने का फैसला किया है. इसके तहत दो साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान होगी.
उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -5 रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि असम में औसतन 31.8% लड़कियों की शादी “निषिद्ध उम्र”/18 साल से कम उम्र में हो जाती है और उनमें से 11.7% बालिग होने से पहले मां बन जाती हैं जबकि इनका राष्ट्रीय औसत क्रमशः 23.3% और 6.8% है.
क़ानूनतः शादी के लिए पुरुषों की उम्र 21 साल और महिलाओं की उम्र 18 साल है. Himanta Biswa Sarma ने कैबिनेट के मीटिंग बाद मीडिया से बात करते हुए बताया, ‘स्वास्थ्य विशेषज्ञ असम में मातृ और शिशु मृत्यु दर की उच्च दर को मुख्य रूप से बाल विवाह के लिए जिम्मेदार मानते हैं, इसलिए नाबालिगों से शादी करने वाले पुरुषों को दंडित करने का निर्णय लिया है.’
मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया कि पश्चिमी असम के धुबरी की स्थिति बहुत ही ख़राब है. 2011 की जनगणना के अनुसार धुबरी की मुस्लिम आबादी 79.67% है. धुबरी उन जिलों में जहां 50 प्रतिशत लड़कियों की शादी कानूनी उम्र से पहले ही कर दी जाती है, जबकि उनमें से 22 प्रतिशत लड़कियां 18 साल से पहले ही मां बन जाती हैं.
Himanta Biswa Sarma ने कहा कि ये “भयावह स्थिति” कैबिनेट को 14 साल से कम उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत उम्रकैद की सजा देने का फैसला करने के लिए मजबूर किया है. सरमा मीडिया को बताया, ’14 से 18 साल की उम्र की लड़कियों से शादी करने वाले पुरुषों के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, जिसमे कम से कम दो साल की सजा की प्रावधान है.’

