Muzaffarnagar में दिव्यांगजन सशक्तीकरण की बड़ी पहल: 7 परियोजनाओं के लिए स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान, जिला कार्यालय ने आमंत्रित किए प्रस्ताव
Divyangjan Empowerment Scheme Uttar Pradesh के तहत Muzaffarnagar में दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास और पुनर्वासन को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल सामने आई है। निदेशालय, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा जारी पत्र के माध्यम से स्वैच्छिक संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों को सहायता अनुदान योजना के अंतर्गत परियोजनाएं संचालित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को शिक्षा, कौशल, प्रशिक्षण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
यह योजना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 में परिभाषित 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिसमें मानसिक मंदित और मानसिक रूप से रूग्ण दिव्यांगजनों को छोड़कर अन्य सभी श्रेणियों के लिए पुनर्वासन और विकास कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है।
🔴 7 प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगा अनुदान, व्यापक स्तर पर होगी पहल
सरकारी आदेश के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत कुल सात प्रकार की परियोजनाओं और कार्यक्रमों को सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। इन परियोजनाओं का लक्ष्य दिव्यांगजनों की शुरुआती पहचान से लेकर उच्च शिक्षा और कौशल विकास तक हर चरण में सहयोग सुनिश्चित करना है।
इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
अर्ली इंटरवेंशन सेंटर
डे केयर सेंटर और प्री-प्राइमरी स्कूल का संचालन
प्राइमरी स्तर से विशेष विद्यालयों का संचालन
जूनियर हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालयों का संचालन
हाईस्कूल स्तर तक विशेष विद्यालयों का संचालन
कौशल विकास कार्यक्रम (न्यूनतम 2 और अधिकतम 4 ट्रेड में प्रशिक्षण)
पाठ्य सामग्री विकास और पुस्तकालयों का संचालन
इन सभी कार्यक्रमों के जरिए दिव्यांग बच्चों और युवाओं को शैक्षिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
🔴 योजना का उद्देश्य: मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति
इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत परिभाषित दिव्यांगजनों के समग्र विकास और पुनर्वासन को सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत स्वैच्छिक संस्थाओं को आर्थिक सहायता देकर ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, जो दिव्यांगजनों की शिक्षा, प्रशिक्षण, जागरूकता, संवेदनशीलता, कौशल विकास और शीघ्र पहचान पर केंद्रित हों।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह पहल केवल सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक सामाजिक बदलाव की दिशा में कदम है, जिससे दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
🔴 पात्रता मानदंड: कौन कर सकता है आवेदन
Divyangjan Empowerment Scheme Uttar Pradesh के तहत सहायता अनुदान पाने के लिए संस्थाओं को कुछ अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी।
संस्था सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860, भारतीय न्यास अधिनियम 1882, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा-8 या किसी अन्य समकक्ष कानून के तहत पंजीकृत होनी चाहिए।
संस्था का दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी से पंजीकरण अनिवार्य है।
संस्था का नीति आयोग पोर्टल पर पंजीकरण और विशिष्ट पहचान संख्या होना जरूरी है।
दिव्यांगता के क्षेत्र में कम से कम 2 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है।
परियोजना संचालन के लिए संस्था के पास प्रबंधन निकाय, संसाधन, अवसंरचना और प्रशिक्षित मानव संसाधन होना चाहिए।
प्रस्तावित परियोजना के लिए किसी अन्य सरकारी या निजी स्रोत से वित्त पोषण नहीं मिल रहा होना चाहिए।
संस्था को पूर्णतः गैर-लाभकारी होना चाहिए और इसका शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा।
संस्था या संगठन किसी भी सरकारी विभाग द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं होना चाहिए।
🔴 जिला स्तर पर आवेदन प्रक्रिया शुरू
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इच्छुक स्वैच्छिक संस्थाएं और गैर-सरकारी संगठन, जो सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, वे अपनी परियोजना का प्रस्ताव कार्यालय जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, विकास भवन, मुजफ्फरनगर में किसी भी कार्यदिवस में जमा कर सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावों की जांच के बाद योग्य संस्थाओं को सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा, ताकि परियोजनाओं का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से संचालन हो सके।
🔴 शिक्षा से लेकर रोजगार तक, सशक्तिकरण की पूरी श्रृंखला
इस योजना के अंतर्गत केवल शैक्षणिक संस्थानों पर ही नहीं, बल्कि रोजगार और कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से दिव्यांग युवाओं को विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकें।
इसके साथ ही, पाठ्य सामग्री विकास और पुस्तकालयों के संचालन से दिव्यांग बच्चों और छात्रों को सुलभ और अनुकूल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना है।
🔴 सामाजिक संगठनों की भूमिका और जिम्मेदारी
सरकार का मानना है कि स्वैच्छिक संस्थाएं और एनजीओ जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके से काम कर सकती हैं। यही वजह है कि इस योजना में उन्हें प्रमुख भागीदार बनाया गया है। प्रशासन ने संगठनों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं।
🔴 दिव्यांगजनों के लिए नया अवसर
Muzaffarnagar disability rehabilitation projects के तहत शुरू की गई यह पहल न केवल दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण के नए रास्ते खोलेगी, बल्कि उनके परिवारों को भी राहत और समर्थन प्रदान करेगी।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह जिले में दिव्यांग सशक्तीकरण के क्षेत्र में एक मिसाल बन सकती है।

