उत्तर प्रदेश

Jhansi अग्निकांड: मासूमों की चीखों के बीच मां-बाप का सब्र टूटा, सड़क पर उतरे लोग

Jhansi के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार रात हुई दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में अचानक लगी आग से 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे गंभीर हालत में हैं। इस हृदय विदारक घटना के बाद माता-पिता अपने बच्चों को देखने और उनकी सुरक्षा की गुहार लगाते नजर आए।


घटनास्थल पर मची अफरा-तफरी

शुक्रवार रात करीब 10 बजे अचानक एसएनसीयू से धुआं निकलता देखा गया। आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों ने बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन दमकल विभाग के आने से पहले ही 10 मासूम अपनी जान गंवा चुके थे। कई घायल बच्चों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “एसएनसीयू में आग लगने पर हमें अपनी जान बचाने की जल्दी थी, लेकिन वहां मौजूद बच्चों को निकालने का समय ही नहीं मिला।” वहीं, एक पिता ने कहा, “मैंने अपने हाथों से छह-सात बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन अब मेरा खुद का बच्चा गायब है।”


माता-पिता का गुस्सा सड़कों पर फूटा

घटना के बाद से माता-पिता और परिजन अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं। 18 घंटे से अधिक का समय बीतने के बाद भी कई माता-पिता अपने बच्चों का हाल जानने के लिए अस्पताल के गेट पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज के गेट नंबर 2 पर परिजनों को रोक दिया गया, जिसके बाद उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया। एक महिला ने कहा, “मुझे हर दो घंटे पर अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए बुलाया जाता था, लेकिन अब 18 घंटे हो गए, मेरा बच्चा कहां है, कोई बताने को तैयार नहीं है।”

वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने आंसू भरी आंखों से कहा, “अगर प्रशासन ने सही समय पर कदम उठाया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।”


डीएनए परीक्षण से होगी पहचान

अस्पताल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि हादसे में जिन बच्चों की पहचान नहीं हो पाई है, उनका डीएनए परीक्षण किया जाएगा। एडीएम वरुण कुमार पांडेय ने कहा, “हम जल्द से जल्द सभी बच्चों के परिजनों को सूचित करेंगे और डीएनए के जरिए पहचान की पुष्टि की जाएगी।”

इसके साथ ही, एसपी सिटी ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे परिजनों को शांत किया और जांच के आदेश दिए। अधिकारियों ने इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना उत्तर प्रदेश में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऐसी घटनाएं केवल प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चूक को दर्शाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए आपातकालीन उपायों की सख्त जरूरत है।

अस्पताल प्रबंधन पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आग लगने के समय सुरक्षा उपकरण, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन निकासी योजना क्यों कारगर नहीं हुई।


पिछले हादसे जो सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं

झांसी अग्निकांड अकेली घटना नहीं है। भारत में अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की कमी पहले भी कई बार जानलेवा साबित हुई है:

  1. मुंबई, 2021: एक सरकारी अस्पताल में आईसीयू में आग लगने से 13 मरीजों की मौत।
  2. भोपाल, 2020: एक प्राइवेट अस्पताल में आग से 10 नवजात बच्चों की मौत।
  3. कोलकाता, 2011: एक बड़े अस्पताल में आग से 90 लोगों की जान गई।

इन घटनाओं के बाद भी प्रशासनिक सुधार न होना एक बड़ी चिंता का विषय है।


परिजनों की मांग और प्रशासन की जवाबदेही

झांसी में प्रदर्शन कर रहे परिजनों की मांग है कि घटना की विस्तृत जांच हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। वहीं, प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

इस घटना ने न केवल झांसी बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया है। यह एक चेतावनी है कि अस्पतालों में सुरक्षा के प्रति लापरवाही जानलेवा हो सकती है।


झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुई यह घटना न केवल प्रशासन और प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि हमारे देश में चिकित्सा सुविधाओं और सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि अस्पतालों में सुरक्षा के मापदंड कड़े हों, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। झांसी का यह दर्दनाक हादसा उन मासूमों की याद दिलाता रहेगा, जो लापरवाही का शिकार बन गए।

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