उत्तर प्रदेश

E20 पेट्रोल पर MNNIT के शोध ने बढ़ाई बहस: 15% तक एथेनॉल मिश्रण बेहतर, ज्यादा ब्लेंडिंग पर स्पार्क प्लग और इंजन ऑयल में बदलाव की जरूरत!

प्रयागराज। देशभर में E20 Petrol यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिए जाने के बीच मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी), प्रयागराज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग का एक महत्वपूर्ण शोध चर्चा में आ गया है। इस शोध में पेट्रोल में अलग-अलग मात्रा में एथेनॉल मिलाने और उसके स्पार्क इग्निशन इंजन, स्पार्क प्लग तथा इंजन ऑयल पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया गया था।

एमएनएनआईटी की शोधकर्ता डॉ. गरिमा कुशवाहा द्वारा प्रो. समीर सरस्वती और डॉ. बिरेश्वर पॉल के निर्देशन में किए गए अध्ययन में 25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का परीक्षण किया गया। शोध के निष्कर्षों के अनुसार 15 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण से इंजन के प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव सामने नहीं आया, जबकि इससे अधिक मात्रा में एथेनॉल मिलाने पर इंजन के कुछ महत्वपूर्ण घटकों और लुब्रिकेंट की कार्यक्षमता प्रभावित होने की संभावना सामने आई।

वर्ष 2021 में सामने आए इस शोध में यह संकेत भी दिया गया था कि E20 Petrol जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग करने की स्थिति में स्पार्क प्लग और इंजन ऑयल से जुड़ी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है। शोध को प्रसिद्ध संस्था एसएई इंटरनेशनल द्वारा प्रकाशित किया गया है।

देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर चल रही व्यापक चर्चा के बीच एमएनएनआईटी का यह शोध तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि शोध के निष्कर्षों को किसी राष्ट्रीय ईंधन नीति के पक्ष या विरोध के रूप में देखने के बजाय इंजन प्रदर्शन, दहन प्रक्रिया और लुब्रिकेशन से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन के रूप में समझना आवश्यक है।


क्या है E20 पेट्रोल और क्यों हो रही देशभर में इसकी चर्चा?

E20 पेट्रोल का अर्थ ऐसे ईंधन से है जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण होता है। देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के पीछे पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे कई उद्देश्य बताए जाते हैं।

लेकिन जैसे-जैसे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, वैसे-वैसे यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि पुराने और नए वाहनों के इंजनों पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।

इंजन की डिजाइन, फ्यूल सिस्टम, स्पार्क प्लग, लुब्रिकेशन सिस्टम और अन्य तकनीकी घटकों की अनुकूलता इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यही कारण है कि E20 पेट्रोल को लेकर इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगातार तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं।


MNNIT प्रयागराज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में हुआ महत्वपूर्ण शोध

मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर किया गया यह अध्ययन कई मायनों में महत्वपूर्ण है।

डॉ. गरिमा कुशवाहा ने प्रो. समीर सरस्वती और डॉ. बिरेश्वर पॉल के निर्देशन में स्पार्क इग्निशन यानी एसआई इंजन में गैसोलीन-एथेनॉल मिश्रण और लुब्रिकेंट के प्रभावों का अध्ययन किया।

शोध का उद्देश्य यह समझना था कि पेट्रोल में एथेनॉल की अलग-अलग मात्रा इंजन के प्रदर्शन और उसके महत्वपूर्ण घटकों को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

इसके लिए पेट्रोल में 25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण का परीक्षण किया गया।

अध्ययन में इंजन के प्रदर्शन के साथ स्पार्क प्लग पर बनने वाले डिपॉजिट, दहन प्रक्रिया, इग्निशन दक्षता और इंजन ऑयल की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण किया गया।


25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण पर किया गया परीक्षण

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा को अलग-अलग स्तर पर रखकर उसके प्रभावों का अध्ययन किया।

परीक्षण को केवल E20 पेट्रोल तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि 25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विश्लेषण किया गया।

इससे शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि एथेनॉल की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ने के साथ इंजन के व्यवहार में किस प्रकार के बदलाव हो सकते हैं।

शोध में सामने आया कि 15 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण इंजन के प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता।

लेकिन 15 प्रतिशत की सीमा से आगे बढ़ने पर कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी प्रभाव दिखाई देने की संभावना सामने आई।


15 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण को लेकर क्या सामने आया?

शोध के प्रमुख निष्कर्षों में यह बात सामने आई कि पेट्रोल में 15 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने पर इंजन के प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक असर नहीं देखा गया।

तकनीकी दृष्टिकोण से यह निष्कर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के साथ उसके दहन व्यवहार और इंजन के विभिन्न घटकों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना आवश्यक होता है।

शोध में 15 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण तक इंजन प्रदर्शन में महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं मिलने की बात कही गई।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रकार के वाहनों और सभी इंजन डिजाइनों पर समान परिणाम अनिवार्य रूप से लागू होंगे। अलग-अलग वाहन और इंजन तकनीकी रूप से अलग हो सकते हैं।

फिर भी अध्ययन के परिणाम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और इंजन के बीच तकनीकी संबंध को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराते हैं।


15 प्रतिशत से ज्यादा एथेनॉल पर क्यों बढ़ सकती हैं तकनीकी चुनौतियां?

एमएनएनआईटी के शोध में सामने आया कि पेट्रोल में 15 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण होने पर स्पार्क प्लग, दहन प्रक्रिया, इग्निशन दक्षता और इंजन ऑयल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

यहां यह समझना आवश्यक है कि वाहन का इंजन कई अलग-अलग प्रणालियों के आपसी तालमेल से काम करता है।

फ्यूल और हवा का मिश्रण इंजन के कम्बशन चैंबर में पहुंचता है। स्पार्क प्लग के माध्यम से इग्निशन होता है और इसके बाद दहन प्रक्रिया इंजन को आवश्यक शक्ति प्रदान करती है।

यदि ईंधन की संरचना में बदलाव होता है तो इसका प्रभाव दहन व्यवहार पर भी पड़ सकता है।

इसी कारण पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने के साथ इंजन के अलग-अलग घटकों की तकनीकी अनुकूलता महत्वपूर्ण हो जाती है।


स्पार्क प्लग पर बनने वाले डिपॉजिट का हुआ अध्ययन

एमएनएनआईटी के शोध में स्पार्क प्लग पर बनने वाले डिपॉजिट का भी विश्लेषण किया गया।

स्पार्क प्लग किसी भी स्पार्क इग्निशन इंजन का महत्वपूर्ण घटक होता है। पेट्रोल इंजन में दहन प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्पार्क प्लग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

शोध में यह सामने आया कि 15 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण स्पार्क प्लग पर बनने वाले डिपॉजिट को प्रभावित कर सकता है।

स्पार्क प्लग पर जमा होने वाले पदार्थ उसके प्रदर्शन और इग्निशन व्यवहार से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू हैं।

यदि ईंधन की संरचना बदलती है तो दहन के बाद बनने वाले अवशेषों की प्रकृति में भी बदलाव हो सकता है।

इसी कारण शोधकर्ताओं ने स्पार्क प्लग की स्थिति को अध्ययन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया।


अधिक एथेनॉल पर स्पार्क प्लग को चाहिए हो सकती है ज्यादा इग्निशन एनर्जी

शोध में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया कि अधिक एथेनॉल मिश्रण की स्थिति में स्पार्क प्लग को अधिक इग्निशन ऊर्जा की आवश्यकता पड़ सकती है।

इंजन में दहन प्रक्रिया को शुरू करने के लिए स्पार्क का प्रभावी होना बेहद आवश्यक है।

यदि ईंधन मिश्रण के गुणों में बदलाव होता है तो इग्निशन सिस्टम की आवश्यकताएं भी बदल सकती हैं।

ऐसे में अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए स्पार्क प्लग की तकनीकी विशेषताओं और इग्निशन सिस्टम की अनुकूलता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है।

यही कारण है कि शोध में E20 ईंधन के उपयोग की स्थिति में स्पार्क प्लग में बदलाव की आवश्यकता की संभावना पर ध्यान आकर्षित किया गया।


इंजन ऑयल की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है असर

शोध का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा इंजन ऑयल यानी लुब्रिकेंट पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के प्रभाव का अध्ययन था।

इंजन ऑयल किसी भी वाहन के इंजन के सुचारु संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इंजन के अंदर कई धातु के हिस्से लगातार गति करते हैं। लुब्रिकेंट इन हिस्सों के बीच घर्षण कम करने और इंजन के सुरक्षित संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एमएनएनआईटी के अध्ययन में यह सामने आया कि 15 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण इंजन ऑयल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

ऐसी स्थिति में इंजन ऑयल की विशेषताओं और उसके उपयोग की अवधि को लेकर अतिरिक्त तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता महत्वपूर्ण हो जाती है।


E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर क्यों पड़ सकती है बदलाव की जरूरत?

शोध में यह संकेत दिया गया कि E20 ईंधन के इस्तेमाल की स्थिति में स्पार्क प्लग और इंजन ऑयल में बदलाव करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

इसका तकनीकी आधार ईंधन की बदलती संरचना और उसके कारण दहन तथा लुब्रिकेशन सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभावों से जुड़ा है।

वाहन निर्माता किसी इंजन को डिजाइन करते समय उसके लिए निर्धारित ईंधन, दहन प्रक्रिया, तापमान, इग्निशन सिस्टम और लुब्रिकेंट की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हैं।

यदि ईंधन में एथेनॉल की मात्रा बढ़ती है तो इंजन की कुछ परिचालन स्थितियां बदल सकती हैं।

इसी कारण अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल के साथ इंजन घटकों और लुब्रिकेंट की अनुकूलता महत्वपूर्ण तकनीकी विषय बन जाती है।


दहन प्रक्रिया पर भी एथेनॉल मिश्रण का असर

एमएनएनआईटी के शोध में दहन प्रक्रिया पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

स्पार्क इग्निशन इंजन में दहन की गुणवत्ता वाहन के प्रदर्शन, ईंधन दक्षता और इंजन के संचालन को प्रभावित करती है।

एथेनॉल और पेट्रोल के भौतिक एवं रासायनिक गुणों में अंतर होता है।

ऐसे में दोनों के मिश्रण की मात्रा बदलने से दहन व्यवहार में भी बदलाव संभव है।

शोध में 15 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण की स्थिति में दहन प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना सामने आई।

इस निष्कर्ष ने अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन और इंजन अनुकूलता पर आगे के तकनीकी अध्ययन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।


इग्निशन दक्षता भी शोध का महत्वपूर्ण हिस्सा

इंजन की इग्निशन दक्षता उसके प्रदर्शन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

यदि ईंधन सही समय और उचित तरीके से प्रज्वलित नहीं होता तो इसका प्रभाव इंजन के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

एमएनएनआईटी के शोध में पाया गया कि 15 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण इग्निशन दक्षता को प्रभावित कर सकता है।

अधिक एथेनॉल की स्थिति में इग्निशन ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ने की संभावना भी सामने आई।

यही कारण है कि भविष्य के अधिक एथेनॉल अनुकूल इंजनों में इग्निशन सिस्टम की डिजाइन और स्पार्क प्लग की विशेषताओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो सकता है।


पुरानी और नई गाड़ियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चर्चा?

E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका उनकी गाड़ियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

नई पीढ़ी के वाहनों को निर्माता बदलते ईंधन मानकों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन कर सकते हैं।

लेकिन पुराने वाहनों के इंजन, फ्यूल सिस्टम और अन्य घटक अलग तकनीकी मानकों के आधार पर बनाए गए हो सकते हैं।

इसी कारण एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का प्रभाव हर वाहन पर बिल्कुल समान होगा, ऐसा मानना उचित नहीं है।

वाहन की उम्र, इंजन डिजाइन, रखरखाव, स्पार्क प्लग और इस्तेमाल किए जा रहे इंजन ऑयल सहित कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


E20 को लेकर वाहन मालिकों में बढ़ रही जिज्ञासा

देश में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के साथ वाहन मालिकों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं।

क्या E20 पुराने वाहनों के लिए उपयुक्त है?

क्या इससे इंजन की लाइफ प्रभावित होगी?

क्या स्पार्क प्लग बदलने की जरूरत पड़ेगी?

क्या इंजन ऑयल जल्दी खराब हो सकता है?

क्या माइलेज पर कोई प्रभाव पड़ेगा?

ऐसे कई सवाल वाहन मालिकों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।

एमएनएनआईटी का शोध इन सवालों में से कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।


SAE International ने प्रकाशित किया शोध

डॉ. गरिमा कुशवाहा द्वारा प्रो. समीर सरस्वती और डॉ. बिरेश्वर पॉल के निर्देशन में किए गए इस शोध को प्रसिद्ध संस्था एसएई इंटरनेशनल ने प्रकाशित किया है।

ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग क्षेत्र में एसएई इंटरनेशनल का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

ऐसे मंच पर शोध प्रकाशित होना अध्ययन के तकनीकी महत्व को दर्शाता है।

शोध के माध्यम से गैसोलीन-एथेनॉल मिश्रण और लुब्रिकेंट के बीच संबंधों को वैज्ञानिक तरीके से समझने का प्रयास किया गया।


वर्ष 2021 में ही सामने आ गए थे महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत

विशेष बात यह है कि यह शोध वर्ष 2021 में ही सामने आ चुका था।

उस समय किए गए अध्ययन में पेट्रोल में अलग-अलग मात्रा में एथेनॉल मिलाकर इंजन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया था।

आज जब देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा बढ़ी है, तब यह शोध एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गया है।

अध्ययन में 25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण का परीक्षण किए जाने के कारण E20 से जुड़े तकनीकी पहलुओं को समझने में भी इससे महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।


क्या E20 पेट्रोल खराब है? शोध को इस तरह समझना होगा

एमएनएनआईटी के शोध के आधार पर सीधे यह कहना उचित नहीं होगा कि E20 पेट्रोल सभी गाड़ियों के लिए खराब है।

शोध का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग एथेनॉल मिश्रणों का स्पार्क इग्निशन इंजन, स्पार्क प्लग और इंजन ऑयल पर प्रभाव समझना था।

अध्ययन में 15 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण पर महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं मिलने की बात सामने आई।

वहीं 15 प्रतिशत से अधिक मिश्रण की स्थिति में कुछ तकनीकी प्रभावों की पहचान की गई।

इसलिए शोध के निष्कर्षों को वाहन की तकनीकी अनुकूलता और इंजन डिजाइन के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।


वाहन निर्माताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं ऐसे शोध

ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और वैकल्पिक ईंधन आधारित तकनीकों पर काम हो रहा है।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भी इसी बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

लेकिन किसी भी नए या बदले हुए ईंधन मानक के साथ वाहन की तकनीकी अनुकूलता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

ऐसे शोध वाहन निर्माताओं, इंजन डिजाइनरों और लुब्रिकेंट विकसित करने वाली कंपनियों को भविष्य की आवश्यकताओं को समझने में सहायता कर सकते हैं।


स्पार्क प्लग और इंजन ऑयल पर आगे भी गहन शोध की जरूरत

एमएनएनआईटी का अध्ययन बताता है कि एथेनॉल की मात्रा बढ़ने पर केवल इंजन प्रदर्शन देखना पर्याप्त नहीं है।

स्पार्क प्लग, इग्निशन ऊर्जा, इंजन ऑयल और दहन प्रक्रिया जैसे पहलुओं का भी विश्लेषण आवश्यक है।

किसी वाहन की दीर्घकालिक विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके सभी महत्वपूर्ण घटक नए ईंधन के साथ कितनी प्रभावी तरीके से काम करते हैं।

इसी कारण अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर दीर्घकालिक और अलग-अलग प्रकार के इंजनों पर अध्ययन महत्वपूर्ण हो सकते हैं।


E20 Petrol MNNIT Research ने क्यों बढ़ाई तकनीकी चर्चा?

E20 Petrol MNNIT Research ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें केवल इंजन के सामान्य प्रदर्शन पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि स्पार्क प्लग, लुब्रिकेंट, इग्निशन दक्षता और दहन प्रक्रिया का भी अध्ययन किया गया।

अध्ययन में 15 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण को इंजन प्रदर्शन के संदर्भ में महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव से मुक्त पाया गया, जबकि इससे अधिक मिश्रण पर कुछ तकनीकी बदलाव सामने आए।


वैज्ञानिक शोध और ईंधन नीति को जिम्मेदारी से समझना जरूरी

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़ा विषय तकनीकी और नीतिगत दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

एक ओर वैकल्पिक ईंधन और एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इंजन अनुकूलता और वाहन तकनीक पर वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।

एमएनएनआईटी का शोध इस चर्चा में महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी जोड़ता है।

हालांकि किसी एक इंजन पर किए गए अध्ययन के परिणामों को सभी वाहनों पर समान रूप से लागू करने से बचना चाहिए। अलग-अलग इंजन डिजाइन, वाहन तकनीक और परिचालन परिस्थितियां परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।


E20 पेट्रोल की बहस के बीच MNNIT का शोध बना चर्चा का केंद्र

देश में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बीच एमएनएनआईटी प्रयागराज का यह शोध वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाता है।

डॉ. गरिमा कुशवाहा द्वारा प्रो. समीर सरस्वती और डॉ. बिरेश्वर पॉल के निर्देशन में किया गया अध्ययन बताता है कि एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के साथ इंजन के अलग-अलग घटकों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना आवश्यक है।

25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण पर किए गए परीक्षण और 15 प्रतिशत से अधिक मिश्रण पर सामने आए तकनीकी प्रभावों ने E20 ईंधन को लेकर वैज्ञानिक चर्चा को नई दिशा दी है।

देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बीच MNNIT प्रयागराज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग का शोध महत्वपूर्ण तकनीकी सवाल सामने लाता है। डॉ. गरिमा कुशवाहा द्वारा प्रो. समीर सरस्वती और डॉ. बिरेश्वर पॉल के निर्देशन में किए गए अध्ययन में 25 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का परीक्षण किया गया, जिसमें 15 प्रतिशत तक मिश्रण से इंजन प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण नकारात्मक प्रभाव नहीं मिलने की बात सामने आई, जबकि इससे अधिक एथेनॉल की स्थिति में स्पार्क प्लग डिपॉजिट, इग्निशन दक्षता, दहन प्रक्रिया और इंजन ऑयल की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना बताई गई। E20 को लेकर जारी चर्चा के बीच यह शोध इस बात पर जोर देता है कि बदलते ईंधन मानकों के साथ इंजन तकनीक, स्पार्क प्लग और लुब्रिकेंट की अनुकूलता पर भी गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है।

 

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