Election 2022: 15 जनवरी तक रैली और पदयात्राओं पर रोक, आपके जिले में कब डाले जाएंगे वोट?
Election 2022: Election Commission ने देश में कोविड-19 महामारी की स्थिति को देखते हुए पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के दौरान आगामी 15 जनवरी तक जनसभाओं, साइकिल एवं बाइक रैली और पदयात्राओं पर रोक लगा दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (Chief Election Commissioner Sushil Chandra) ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 15 जनवरी के बाद स्थिति का जायजा लेने के बाद आयोग आगे का निर्णय लेगा।
सभी चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों को फ्रंटलाइन वर्कर माना और सभी पात्र अधिकारियों को प्रीकोशनरी डोज़ लगाई जाएगी: मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा #Election2022 #COVID19India pic.twitter.com/qocb3IZK1V
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सुशील चंद्रा ने कहा कि आयोग ने फैसला किया है कि 15 जनवरी तक लोगों की शारीरिक रूप से मौजूदगी वाली कोई जनसभा (फिजिकल रैली), पदयात्रा, साइकिल रैली, बाइक रैली रोडशो की अनुमति नहीं होगी। आगे चुनाव आयोग कोविड महामारी की स्थिति की समीक्षा करेगा और इसके मुताबिक निर्देश जारी करेगा। कोरोना नियमों को बताते हुए CEC सुशील चंद्रा ने कहा, स्थिति सामान्य नहीं है।
उन्होंने कहा, जिन लोगों की भी चुनाव में ड्यूटी लगाई जाएगी उनको वैक्सीन की दोनों डोज लगी होनी जरूरी है। इसके अलावा सभी को एक बूस्टर डोज भी दी जाएगी। सभी राज्यों के चीफ सेक्रटरी को निर्देश दिए गए हैं कि वैक्सिनेशन की प्रक्रिया तेज करें।
विधानसभाओं का कार्यकाल
यूपी में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त होगा, जबकि अन्य चार राज्यों में विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च में अलग-अलग तिथियों पर समाप्त हो रहा है। यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं, जबकि किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 202 सीटों का आंकड़ा चाहिए होगा। सूबे में पिछला चुनाव सात चरण में 11 फरवरी से आठ मार्च, 2017 के बीच हुआ था। उस चुनाव में 61.04 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो कि बीते चुनाव के मुकाबले अधिक थी।
बीजेपी को पिछले चुनाव में 312 सीटें, मायावती की बसपा को 19, अखिलेश यादव की सपा को 47, कांग्रेस को सात, अनुप्रिया पटेल के अपना दल को नौ, ओम प्रकाश राजभर के एसबीएसपी को चार और निर्दलीय को तीन सीटें हासिल हुई थीं। रोचक बात है कि भारतीय जनता पार्टी यानी कि बीजेपी ने बगैर किसी सीएम कैंडिडेट को घोषित किए चुनाव जीता था। यह चुनाव भगवा पार्टी ने अपने फायरब्रांड नेता नरेंद्र मोदी की छवि के बलबूते लड़ा था।
18 मार्च, 2017 को योगी आदित्यनाथ सीएम बनाए गए थे, जबकि उनके साथ दो डिप्टी सीएम बने थे, जो कि केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा हैं। यूपी आबादी के हिसाब से बड़ा सूबा है और सियासी तौर पर भी महत्वपूर्ण राज्य है। मौजूदा समय में यहां बीजेपी की सरकार है, जबकि सपा और बसपा प्रमुख विपक्षी दल हैं। इस बार असल टक्कर बीजेपी और सपा के बीच मानी जा रही है।
गोरखपुर में
Chief Minister Yogi Adityanath के गढ़ गोरखपुर में छठवें चरण में यानी तीन मार्च (3 March) को मतदान होगा। परिणाम के लिए वोटरों के साथ ही दावेदारों को सिर्फ 7 दिन का इंतजार करना होगा। इस चरण में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्यों पर मुहर तो लगेगी ही, जातिगत आधार में जिम्मेदारी ओढ़ने वाले नेताओं की भी परीक्षा होगी।
गोरखपुर-बस्ती मंडल 42 सीटों में सिर्फ चार सीटों पर भाजपा को हार मिली थी। ऐसे में भाजपा के लिए पुराना प्रदर्शन दोहराना काफी चुनौतीपूर्ण होगा। पिछली बार से इस बार भाजपा के लिए परिस्थितयां बदली हुई है। तब भाजपा विपक्ष में थी और सपा सत्ता में। अब स्थितियां ठीक उलट हैं। भाजपा ने ब्राह्मणों को रिझाने के लिए जो कमेटी बनाई है, उसके अध्यक्ष राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला हैं।
उनके समक्ष ब्राह्मणों को भाजपा के पाले में करना बड़ी चुनौती है। वह भी तब जब पूर्वांचल में ब्राह्मणों का प्रमुख चेहरा पंडित हरिशंकर तिवारी का पूरा परिवार सपा में है। वहीं कुर्मी चेहरे पंकज चौधरी की भी परीक्षा होनी है।
केन्द्र सरकार में मंत्री पद का तोहफा देकर भाजपा ने कुर्मी वोटरों को अपने पाले में करने की कोशिश की है। वहीं सिद्धार्थनगर से आने वाले दो मंत्रियों जय प्रताप सिंह और सतीश द्विवेदी की भी चुनाव में परीक्षा होगी। देवरिया से आने वाले मंत्री सूर्य प्रताप शाही के कामकाज की भी परीक्षा चुनाव में होगी।
होर्डिंग को उतरवाना शुरू-
चुनाव आयोग की आचार संहिता लागू होते ही जिला प्रशासन ने चौराहों पर लगे होर्डिंग को उतरवाना शुरू कर दिया है। गोरखपुर जनपद में छठवे चरण के 3 मार्च को मतदान कराया जाएगा। जिलाधिकारी/ जिला निर्वाचन अधिकारी विजय किरन आनंद के निर्देशन में अपर नगर मजिस्ट्रेट रोहित मौर्य व लेखा अधिकारी नगर निगम अमरेश के नेतृत्व में विकास भवन, अंबेडकर चौक, शास्त्री चौक, कलेक्ट्रेट चौक, गणेश चौक सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा लगाए गए होडिंग को उतरवाया गया।
#Jansath आचार सहिंता लागू होते ही एसडीएम जानसठ आये एक्टिव मोड़ में,आदर्श आचार सहिंता का पालन शुरू कराते हुए, एसडीएम जयेंद्र कुमार ने सड़कों से राजनीतिक दलों के फ्लेक्श बोर्ड हटवाना शुरू किया। pic.twitter.com/bjcvpUxMDc
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(CEC Sushil Chandra) सुशील चंद्रा ने कहा- Election 2022
सुशील चंद्रा ने कहा कि रात आठ बजे से सुबह बजे के बीच कोई सभा नहीं होगी। सार्वजनिक सड़कों पर कोई नुक्कड़ सभा नहीं होगी। चुनाव नतीजों के बाद कोई विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा।
- उन्होंने कहा कि आगे स्थिति की समीक्षा के बाद ही चुनाव प्रचार के लिए राज्यों में कोविड से संबंधित दिशानिर्देश के अनुसार कार्यक्रमों की अनुमति दी जाएगी।
- रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक कैंपेन कर्फ्यू होगा। कोई नुक्कड़ सभा नहीं होगी। इसके अलावा जीतने के बाद भी जश्न पर रोक होगी। डोर टू डोर कैंपेन के लिए केवल पांच लोग जा सकेंगे।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि सभी राज्यों को यह हलफनामा देना होगा कि वे सभी दिशानिर्देशों का पालन करेंगे। कोविड दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने वाले कानूनी कार्रवाई के भागी होंगे।
- उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा डिटिजल चुनाव प्रचार हो। उन्होंने कहा कि सभी मतदान केंद्रों पर सैनिटाइजर और मास्क जैसी कोविड से बचाव की सुविधाएं उपलब्ध होंगी और कोविड की स्थिति को देखते हुए मतदाता केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
छठे चरण में 3 मार्च को उत्तर प्रदेश के छठे चरण और मणिपुर के दूसरे चरण के मतदान पूरे होंगे। उत्तर प्रदेश के 7वें और अंतिम चरण के मतदान 7 मार्च को पूरे होंगे: मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा #UPElection2022 #Election2022
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