चाहे मेरी जिंदगी का सारा पुण्य ले लो , मैं तो कुएं का पानी हूंः गणाचार्य श्री १०८ Pushpadant Sagar Ji Maharaj
गणाचार्य श्री १०८ Pushpadant Sagar Ji Maharaj ससंघ प्रेमपुरी जैन औषधालय में विराजमान है आज के प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा चाहे मेरी जिंदगी का सारा पुण्य ले लो और उसे बांट दो मैं तो कुएं का पानी हूं चाहे जितना ले लो और अपनी प्यास बुझा लो ये कभी कम नही होगा। इससे पूर्व आज का चित्र अनावरण करने का सौभाग्य गुरु भक्त आशीष जैन अमित जैन चमन विहार देहरादून वालों को प्राप्त हुआ
और गुरुवर का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य श्री सुरेश जैन विक्की जैन मुकेश जैन राजेश जैन को प्राप्त हुआ । आज का मंगलाचरण श्री पुनीत जैन द्वारा किया गया । गुरु पूजा करने का सौभाग्य देहरादून जैन समाज से आए गुरु भक्तों को करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
आज गुरुवर को शास्त्र भेंट करने का परम सौभाग्य श्री अनिल जैन मनीष जैन को प्राप्त हुआ आचार्य श्री Pushpadant Sagar Ji Maharaj ने अपने संबोधन में कहा कि आप सबके बीच में बैठे परमात्मा को श्रद्धा पूर्वक प्रणाम! हर इंसान के जीवन का एक बहुत लंबा सफर है सड़कों पर भीड़ में चलता हो चाहे अपने विचारों के माध्यम से लंबी यात्रा करता हो भले आप कॉलोनी में रहते हो भले ही भवन बड़ा हो या सुंदर हो कमरे में आऊगे तो अकेले ही रहोगे आप के भीतर कौन है आपका अपना आदमी उसे पहचाना और समझो । एक जंगल में अनके वृक्ष होते है एक आम का पेड़ भी है उस पर पूरे फल लगे है कोई लटका रहा है कोई मोटा है कोई ऊपर लटका हुआ है कोई नीचे की तरफ लटक रहा है
एक ही ठेले पर रखे हैं बेचने वाले अनेक है किसी पर पीले हैं किसी पर बड़े हैं कच्चे हैं पके हुए हैं सब पर विभिन्न प्रकार हैं हमारी भी जिंदगी इसी तरह अलग अलग है मैं छोटा था नाइंथ क्लास में पढता था एक नेता जी की आमसभा में गया तो ३ घंटे खड़ा रहा था आम को लेने के लिए लेकिन आम बटे नही फिर किसी से पूछा तो बहाया आम बटने के लिए नही चल रही है यह सभा यहाँ ती भाषण हो रहा है ।
इस तरह हम भी कितनी भी भीड़ में रहे अकेले ही रहेंगे पेड़ पर कोई चोटी पर है कोई नीचे लटका है कोई पीला है लेकिन सबका स्वाद एक जैसा है इस प्रकार से हम भी कोई छोटा है कोई बड़ा है कोई दुकान पर बैठा है कोई आफिस में बैठा है लेकिन सबको जाना एक ही जगह है आपका जीवन भी आम की तरह है चाहे पीला हो चाय हरा हो महावीर भी एक हैं २४ तीर्थकर भी एक है
आपके विचार एक नहीं है हमारे मन में जो विचार रहते हैं वह आलतू फालूत पैदा होते हैं वह आलतू फालतू हैं जिस दिन हमारे परिवार की सोच एक हो जाएगी उस दिन मुक्ति मिल जाएगी वही साधना प्रेम और हमारे बीच हो जाए तो जीवन ही बदल जाए । आज के प्रवचन ओं में Pushpadant Sagar Ji Maharaj वर्षायोग समिति एवं अनुज जैन अमूल मुकेश जैन संजीव जैन चीनू जैन विकी जैन अनिल जैन आदि का सहयोग रहा

