जम्मू-कश्मीर की बहाली की लड़ाई: Rahul Gandhi की रैली और राजनीतिक संघर्ष
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi का जम्मू-कश्मीर दौरा और वहां दी गई जनसभाओं में उनके वक्तव्यों ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक वातावरण को गर्म कर दिया है। राहुल गांधी ने सोपोर में एक विशाल रैली को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ जो हुआ, वह अन्याय था, और अब इस मुद्दे को देशव्यापी राजनीति के केंद्र में लाया जाएगा। राहुल ने यह भी घोषणा की कि जब केंद्र में ‘इंडिया गठबंधन’ की सरकार बनेगी, तो राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।
राज्य का दर्जा: राहुल गांधी की प्रमुख मांग
Rahul Gandhi ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन का सबसे पहला कदम जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराना और राज्य का दर्जा बहाल करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर के लोग चाहते थे कि पहले राज्य का दर्जा बहाल हो, फिर चुनाव हों, लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनकर उसके लोगों के साथ अन्याय किया और इसे केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील कर दिया।
Rahul Gandhi ने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया, तो इंडिया गठबंधन संसद में और सड़कों पर अपनी पूरी ताकत से सरकार पर दबाव बनाएगा। उन्होंने कहा, “जब तक उपराज्यपाल हैं, बाहरी लोगों को फायदा मिलता रहेगा और स्थानीय लोगों के हितों को नजरअंदाज किया जाएगा। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीना गया।”
2019 का निर्णय और विरोध
2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था, जो अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त करने के बाद हुआ। इस कदम का राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने तब से ही विरोध किया है। राहुल गांधी के अनुसार, भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी राज्य का दर्जा छीना गया है और उसे केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील किया गया है।
इस निर्णय के पीछे राहुल गांधी का आरोप है कि यह कदम बाहरी लोगों को जम्मू-कश्मीर के संसाधनों और भूमि पर अधिकार दिलाने के लिए उठाया गया। राहुल का दावा है कि इस फैसले से जम्मू-कश्मीर के स्थानीय निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया गया है और इसका लाभ बाहरी उद्योगपतियों और व्यवसायियों को पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को बार-बार अपनी रैलियों में उठाते हुए कहा कि जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होगा, जम्मू-कश्मीर का विकास संभव नहीं है।
कांग्रेस का राजनीतिक संघर्ष: राहुल की असफलता?
राहुल गांधी का राजनीतिक संघर्ष काफी समय से विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित रहा है। हालांकि, कई लोग उन्हें कांग्रेस के विफल नेता के रूप में देखते हैं, जो लगातार चुनावों में हारते रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद, राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इस बीच, भाजपा और अन्य विपक्षी दल उन्हें ‘बिना विजन वाला नेता’ करार देते हैं।
विपक्षी नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी के पास जनता को आकर्षित करने के लिए कोई ठोस एजेंडा नहीं है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने महत्वपूर्ण राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों में कई हार का सामना किया। राहुल गांधी की आलोचना यह भी है कि वे पार्टी को एकजुट रखने में असमर्थ रहे हैं और उनके नेतृत्व में कांग्रेस कमजोर होती जा रही है।
भाजपा की प्रतिक्रिया और विपक्ष की रणनीति
भाजपा ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी मांगें और आरोप आधारहीन हैं। भाजपा के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्णय सुरक्षा और विकास की दृष्टि से लिया गया था, और यह निर्णय देश के हित में था। भाजपा नेताओं का मानना है कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की है और वहां विकास कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं।
इसके विपरीत, कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल किए बिना जम्मू-कश्मीर में असली लोकतंत्र और विकास संभव नहीं है। विपक्षी दल इस मुद्दे को अपने चुनावी प्रचार में प्रमुखता से उठाते रहे हैं और इसे केंद्र सरकार की विफलता के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
राहुल गांधी ने अपने भाषणों में बार-बार मोदी सरकार पर अंबानी और अदाणी जैसे बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने जीएसटी और नोटबंदी को छोटे और मझोले व्यवसायों के खिलाफ एक साजिश बताया है। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार केवल कुछ बड़े कारोबारियों के लिए काम कर रही है और गरीब तथा मध्यम वर्गीय लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।
‘इंडिया’ गठबंधन: विपक्षी दलों का नया मोर्चा
राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने हाल ही में ‘इंडिया’ नामक गठबंधन का गठन किया है, जिसका उद्देश्य नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को 2024 के आम चुनावों में हराना है। इस गठबंधन में कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार का विरोध कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने रैलियों में इस बात को साफ कर दिया है कि अगर ‘इंडिया’ गठबंधन सत्ता में आता है, तो जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना उनकी प्राथमिकताओं में होगा।
यह गठबंधन भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता और उनकी पार्टी की राजनीतिक स्थिति को लेकर अभी भी कई सवाल उठते हैं। क्या ‘इंडिया’ गठबंधन भाजपा के खिलाफ एक प्रभावी राजनीतिक ताकत बन सकेगा, यह आने वाले चुनावों में ही स्पष्ट होगा।
राहुल गांधी का जम्मू-कश्मीर दौरा और वहां की राज्य बहाली की मांग ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट कर दिया है। हालांकि, उनके आलोचक उन्हें विफल नेता मानते हैं, लेकिन उनके समर्थक मानते हैं कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन देश में एक नया राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले चुनावों में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा किस प्रकार का प्रभाव डालता है और क्या राहुल गांधी अपने वादे को पूरा कर पाते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव के बाद जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल नहीं करती है तो ‘इंडिया’ गठबंधन संसद के भीतर अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगा और सड़कों पर भी उतरेगा. जम्मू में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को 2019 में दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर प्रदेश के लोगों के साथ बड़ा अन्याय किया गया था. जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए काम करने का संकल्प दोहराते हुए राहुल ने कहा, ‘‘भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि हमने किसी राज्य का दर्जा छीन लिया हो और उस राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया हो.

