इजराइल की पूर्व मेजर जनरल Yifat Tomer Yerushalmi गिरफ्तार: जेल वीडियो लीक मामले ने हिलाया देश, सैन्य तंत्र में मचा भूचाल
इजराइल के सुरक्षा प्रतिष्ठान में एक और बड़ा झटका लगा है। इजराइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) की पूर्व मेजर जनरल Yifat Tomer Yerushalmi को सडे तेइमान जेल वीडियो लीक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह वही विवादित वीडियो है जिसमें इजराइली सैनिकों को एक फिलिस्तीनी कैदी पर अमानवीय तरीके से बल प्रयोग करते हुए देखा गया था।
इस वीडियो ने पिछले साल न केवल इजराइल की सेना की छवि पर सवाल खड़े किए, बल्कि मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी हलचल मचा दी थी।
वीडियो लीक का मामला: सेना की गोपनीयता टूटी, साख पर दाग
सडे तेइमान जेल में ली गई इस फुटेज में, कुछ सैनिकों को एक फिलिस्तीनी बंदी को बंधक बनाकर पीटते और धमकाते हुए देखा गया था।
वीडियो के लीक होने के बाद, इजराइली सेना ने जांच कमेटी गठित की, और यह मामला धीरे-धीरे राजनीतिक और सैन्य विवाद का केंद्र बन गया।
मेजर जनरल यिफत तामेर यरुशलमी उस समय IDF में एक महत्वपूर्ण कानूनी पद पर कार्यरत थीं। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने जानबूझकर यह वीडियो मीडिया तक पहुंचाया, और लीक का स्रोत छिपाने की कोशिश की।
गायब होने के बाद गिरफ्तारी: रहस्यमय ढंग से मिलीं यरुशलमी
रविवार शाम से यिफत यरुशलमी लापता बताई जा रही थीं। इजराइली पुलिस और सुरक्षा बलों ने तेल अवीव के आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।
घंटों की खोजबीन के बाद उन्हें तेल अवीव के हज़ुक बीच से सुरक्षित बरामद किया गया। इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उनकी मानसिक स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि गिरफ्तारी से पहले वे गंभीर तनाव में दिखाई दीं।
यरुशलमी का इस्तीफा और विवाद की जड़
इस विवाद के बाद यरुशलमी को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि “सिस्टम के भीतर कुछ लोग सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।”
हालांकि, इजराइली सेना ने आधिकारिक रूप से यह कहा था कि वीडियो का लीक होना “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” है और जिसने भी ऐसा किया है, उसे कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।
जांच में पांच और सैनिकों के नाम आए सामने
यरुशलमी के अलावा पांच अन्य सैनिकों पर भी मामला दर्ज किया गया है। इनमें से दो सैनिकों को वीडियो में सीधे हिंसा करते हुए देखा गया, जबकि अन्य पर साक्ष्य छिपाने और झूठी रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है।
इजराइली मिलिट्री पुलिस ने कहा कि यह मामला “संवेदनशील” है क्योंकि इसमें राज्य सुरक्षा, मानवाधिकार और सैन्य अनुशासन – तीनों पहलू शामिल हैं।
इजराइली जनता और मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
यरुशलमी की गिरफ्तारी के बाद तेल अवीव, हाइफ़ा और यरूशलम में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किए।
मानवाधिकार समूह “बेतसेलेम” ने बयान जारी कर कहा –
“सच्चाई उजागर करने वालों को दंडित करना, न्याय को दबाने की कोशिश है। यह लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए खतरनाक संकेत है।”
दूसरी ओर, सरकारी प्रवक्ता ने कहा –
“कानून किसी के लिए अलग नहीं होता, चाहे वह सेना का जनरल ही क्यों न हो।”
यरुशलमी कौन हैं? सैन्य सेवा से लेकर विवाद तक का सफर
यिफत तामेर यरुशलमी इजराइल की उन चंद महिला अफसरों में से एक रही हैं जिन्होंने IDF में मेजर जनरल के पद तक पहुंच बनाई।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कानूनी विभाग से की और बाद में सैन्य न्यायिक प्रकोष्ठ की प्रमुख बनीं।
उनकी छवि एक “कठोर लेकिन ईमानदार अफसर” की रही है, जिन्होंने हमेशा सैन्य जवाबदेही और पारदर्शिता की वकालत की।
परंतु, वीडियो लीक कांड ने उनके पूरे करियर को संदेह के घेरे में ला दिया।
राजनीतिक दबाव और IDF की छवि पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब इजराइल पहले से ही गाजा और वेस्ट बैंक में बढ़ते तनाव से जूझ रहा है।
फिलिस्तीनी कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन इस बार एक उच्च रैंकिंग अधिकारी की संलिप्तता ने सरकार और सेना दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सैन्य विश्लेषक डॉ. एली शेवित ने कहा –
“यह घटना इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था में एक गहरी दरार को दिखाती है। अगर सेना के भीतर से वीडियो लीक हो रहा है, तो यह भरोसे की नींव को हिला देने वाला मामला है।”
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: इजराइल पर बढ़ा दबाव
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इजराइल की छवि को झटका दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि यह मामला “पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा” है। कई यूरोपीय देशों ने भी स्वतंत्र जांच की मांग की है।
इजराइल के लिए सबक: पारदर्शिता बनाम सुरक्षा
यरुशलमी की गिरफ्तारी ने इजराइल को एक कठिन सवाल के सामने ला खड़ा किया है –
“क्या राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सच्चाई को दबाया जा सकता है?”
जहां कुछ लोग इसे “राजद्रोह” बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे “नैतिक साहस” का प्रतीक मानते हैं।
लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने IDF की नैतिकता, अनुशासन और विश्वास पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

