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Goa के Lairai जत्रा महोत्सव में मची भगदड़ से कोहराम: छह की मौत, दर्जनों घायल, पुलिस-प्रशासन पर उठे सवाल

Goa का प्रसिद्ध Lairai जत्रा महोत्सव इस बार मातम में बदल गया। उत्तरी गोवा के शिरगांव गांव स्थित श्री लईराई देवी मंदिर में शनिवार तड़के मची भगदड़ ने श्रद्धा के इस पर्व को त्रासदी में बदल दिया। हजारों की संख्या में जुटे श्रद्धालुओं की भीड़ उस समय बेकाबू हो गई जब मंदिर परिसर में अचानक अफरा-तफरी मच गई। अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और 30 से अधिक श्रद्धालु घायल हैं। घायलों में से आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

महोत्सव का उल्लास बना मातम: कैसे मची भगदड़

लईराई देवी का यह जत्रा महोत्सव गोवा ही नहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी हजारों भक्तों को आकर्षित करता है। इस बार भी शुक्रवार रात से ही श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ने लगा था। शनिवार तड़के जब दर्शन के लिए लोगों की भीड़ बढ़ी, तभी यह दर्दनाक हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंदिर के आसपास पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था और न ही भीड़ नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस इंतजाम किए गए थे।

मौके पर मददगार बने स्थानीय लोग, प्रशासन हुआ नदारद

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि भगदड़ के समय स्थानीय लोग एक-दूसरे की मदद करते नजर आए। वीडियो में एक व्यक्ति कहता है कि “पुलिस तो थी ही नहीं, हम एक-दूसरे को संभाल रहे थे।” इस वीडियो को Goa News Hub ने शेयर किया है और लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते सक्रिय होता, तो यह हादसा टल सकता था।

स्वास्थ्य विभाग की तत्परता, आईसीयू तक की व्यवस्था

गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने हादसे की जानकारी देते हुए बताया कि 30 लोग घायल हुए हैं, जिनमें आठ की हालत नाजुक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि “घायलों को तुरंत नजदीकी जिला अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायलों को गोवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। पांच एंबुलेंस घटनास्थल पर भेजी गईं और आईसीयू की व्यवस्था के साथ अतिरिक्त डॉक्टरों को ड्यूटी पर बुलाया गया।”

क्या कहता है प्रशासन? घटनास्थल पर कलेक्टर और सीएम

उत्तर गोवा की कलेक्टर स्नेहा गिट्टे ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने घटनास्थल का दौरा किया और हर घायल की स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत खुद जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

श्रद्धालुओं का आक्रोश: “पुलिस की लापरवाही से गई जानें”

हादसे के बाद शोक की लहर के साथ आक्रोश भी देखने को मिला। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने साफ तौर पर प्रशासन और पुलिस की नाकामी को हादसे की वजह बताया। एक परिवार के सदस्य ने रोते हुए कहा, “अगर वहां पुलिस होती, तो मेरी मां आज जिंदा होती। हर साल यही जत्रा होता है, फिर भी इंतजाम क्यों नहीं होते?”

धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की चुनौती

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि भारत जैसे देश में, जहां धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ जुटती है, वहां भीड़ नियंत्रण के लिए कोई स्थायी नीति क्यों नहीं बन पाई है। बीते कुछ वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, जहां भीड़ के कारण लोगों की जानें गईं। मथुरा, हरिद्वार, प्रयागराज और अब गोवा – हर जगह एक ही कहानी दोहराई जा रही है।

एक नजर अन्य धार्मिक आयोजनों पर जहां मची भगदड़

  • 2008, जोधपुर – चामुंडा देवी मंदिर में भगदड़ में 224 लोगों की मौत।

  • 2013, रत्नागिरि – मलकापुर मंदिर में हादसे में 10 लोगों की मौत।

  • 2013, मध्यप्रदेश – रतलाम के रावटी मेले में भीड़ बेकाबू होने से भगदड़ में 20 से ज्यादा घायल।

  • 2016, वाराणसी – जय गुरुदेव के कार्यक्रम में 24 की जान गई।

इन सब घटनाओं से यह साफ है कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण एक गंभीर मसला है जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

अब क्या होगा: सरकार की चुनौती और अगला कदम

अब राज्य सरकार और मंदिर समिति के सामने यह चुनौती है कि ऐसे आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की पुख्ता व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने संकेत दिया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और भविष्य में किसी भी बड़े आयोजन से पहले रिहर्सल और सुरक्षा प्लान अनिवार्य होंगे।

स्थानीय समुदाय का सहयोग सराहनीय

इस घटना के दौरान स्थानीय लोगों का व्यवहार सराहनीय रहा। कई लोगों ने अपने घरों के दरवाज़े घायल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए। गांव की महिलाओं ने पानी और प्राथमिक उपचार में सहायता दी। यह दिखाता है कि जब प्रशासन असफल होता है, तब जनता खुद मोर्चा संभालती है।

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