गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय: महोत्सव में दिखाये करतब
मुजफ्फरनगर। तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय में चल रहे ५५वें वार्षिक महोत्सव में व्यायाम सम्मेलन में ब्रह्मचारी छात्रों ने आग के गोले से कूद कर हैरतंगेज करतब दिखाए, जिन्हें देख दूर दराज क्षेत्रों से आए लोग दंग रह गए। महोत्सव में मथुरा गुरुकुल से आए स्वामी विश्वानंद महाराज ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारे ऋषि मुनियों की देन है
गुरुकुल संस्कृत भाषा को बचाने में लगे हुए है गुरुकुल में वास्तव में आज भी गुरू शिष्य की परम्परा दिखाई देती है। समारोह में हापुड़ से आए भजनोपदेशक विरेंद्र महाशय ने कहा कि शिक्षा का मानव जीवन मे बहुत बडा महत्व है इसलिए हमे अपनों बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
खेल प्रशिक्षक राणा शास्त्री व विकास शास्त्री के निर्देशन में मेरठ मवाना के ब्रह्मचारी गौरव पाल, शामली के उत्तम कुमार व गाजियाबाद के कुनाल ने आग के गोले से कूद कर हैरतंगेज करतब दिखाए, जिन्हें देख दूर दराज क्षेत्रों से आए लोग दंग रह गए। ब्रह्मचारी गौरव व सिद्धार्थ ने रस्से पर डबल पदमासन व अनुज ने शीर्षासन किया।
लकड़ी के मलखंब पर ब्रह्मचारी आर्यवीर ने मयूर आसन, बकासन, ब्रजासन व पदमासन के साथ साथ दरबार व फूल स्तूप बनाकर भी दिखाए और ब्रह्मचारी विशाल देशवाल ने मोंगरी का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में स्वामी आंनदवेश जी महाराज, श्री गंगा सेवा समिति के महामंत्री महकार सिंह, आचार्य इंद्रपाल सिंह, यज्ञ के ब्रह्म आचार्य यज्ञवीर, प्रधानाचार्य प्रेमशंकर मिश्र, घनश्याम शास्त्री, सोमवीर सिंह, अरुण कुमार, सुदेश पाल आदि मौजूद रहे। यजमान के रूप में नरेंद्र बसेड़ा व डा. महार सिंह दतियाना ने मुख्य भूमिका निभाई।
