Gyanvapi: मंदिर को तोड़कर अवशेषों पर बनी थी अवैध मस्जिद, मस्जिद में हिंदू देवताओं की मूर्तियां मिलीं-ASI
Gyanvapi मस्जिद वहां पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों पर बनी है. इस बात का खुलासा, ASI रिपोर्ट में हुआ है. हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने एएसआई सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ASI ने कहा है कि मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले वहां एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था.
#GyanvapiASIReport इंडिया टुडे ने सर्वेक्षण रिपोर्ट हासिल की है, जिसमें कई तस्वीरें शामिल हैं जिनमें हनुमान, गणेश और नंदी जैसे हिंदू देवताओं की टूटी हुई मूर्तियां दिखाई देती हैं। तस्वीरों में कई एक शिव लिंग का भी पता चलता है, जिसका निचला हिस्सा या आधार गायब है। #Gyanwapi pic.twitter.com/goBeZf5jsi
— News & Features Network (@newsnetmzn) January 26, 2024
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने गुरुवार को कहा कि भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वेक्षण रिपोर्ट से संकेत मिला है कि ज्ञानवापीमस्जिद वहां पहले से मौजूद एक पुराने मंदिर के अवशेषों पर बनाई गई थी. जैन ने बताया कि एएसआई की 839 पन्नों वाली सर्वेक्षण रिपोर्ट की प्रतियां गुरुवार देर शाम अदालत द्वारा संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गईं.
ASI रिपोर्ट में कहा गया है, वैज्ञानिक अध्ययन/सर्वेक्षण में वास्तुशिल्प अवशेषों, कलाकृतियों शिलालेखों, कला और मूर्तियों का अध्ययन किया गया, यह कहा जा सकता है कि मौजूदा संरचना के निर्माण से पहले वहां एक हिंदू मंदिर मौजूद था.
#WATCH | Varanasi, Uttar Pradesh | Advocate Vishnu Shankar Jain, representing the Hindu side, gives details on the Gyanvapi case.
He says, “The ASI has said that Sculptures of Hindu deities and carved architectural members were found buried under the dumped soil…… pic.twitter.com/0qZ49HBOcL
— ANI (@ANI) January 25, 2024
जैन ने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि मस्जिद पूर्व में मौजूद मंदिर को तोड़कर उसके अवशेषों पर बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में मंदिर के अस्तित्व के पर्याप्त सबूत मिलने की बात कही गई, जिस पर मस्जिद का निर्माण किया गया था. हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर ने कहा, ASI ने कहा है कि वहां पर 34 शिलालेख है जहां पर पहले से मौजूद हिंदू मंदिर के थे. जो पहले हिंदू मंदिर था उसके शिलालेख को पुन: उपयोग कर ये मस्जिद बनाया गया. इनमें देवनागरी, ग्रंथ, तेलुगु और कन्नड़ लिपियों में शिलालेख मिले हैं. इन शिलालेखों में जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर जैसे देवताओं के तीन नाम मिलते हैं.
#Varanasi: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक रिपोर्ट कहती है कि उसी स्थान पर #GyanvapiMosque के निर्माण से पहले हिंदू मंदिर मौजूद था। 17वीं शताब्दी में औरंगजेब ने हिंदू मंदिर की संरचना को नष्ट कर दिया था। pic.twitter.com/jKpl6RMJUu
— News & Features Network (@newsnetmzn) January 26, 2024
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा वाराणसी जिला अदालत में जमा की गयी ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया, मंदिर के अवशेषों के साथ-साथ हिंदू देवताओं की मूर्तियां भी पाए गए.
वकील विष्णु शंकर ने कहा, ASI ने कहा है कि मस्जिद में जो खंभे लगे हुए हैं वो हिंदू मंदिर के थे जिन्हें पुन: उपयोग किया गया। मतलब हिंदू मंदिर के खंभे को मॉडिफाई किया गया.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा वाराणसी जिला अदालत में जमा की गयी ज्ञानवापी परिसर की सर्वे रिपोर्ट की प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए गुरुवार को हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की ओर से कुल 11 लोगों ने आवेदन किया था. एएसआई ने 18 दिसंबर को सीलबंद लिफाफे में अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट जिला अदालत को सौंपी थी.
ज्ञानवापी मस्जिद और उसमें मौजूद हिंदू मंदिर के अवशेषों का खुलासा
भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को लेकर एक नई विवाद उत्पन्न हो रहा है, जिसमें ग्यारहवीं सदी में इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा मंदिरों के नष्ट का आरोप है. इस बारे में जानकारी मिलने वाली है कि ग्यारहवीं सदी में ज्ञानवापी, जो वाराणसी में स्थित है, मस्जिद के निर्माण से पहले एक हिंदू मंदिर के अवशेषों पर बनी है.
इस खुलासे का हवाला हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट के माध्यम से दिया है. उनके अनुसार, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट हो रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण एक पूर्व मंदिर के अवशेषों पर हुआ है.
एएसआई द्वारा तैयार की गई 839 पन्नों वाली सर्वेक्षण रिपोर्ट में वास्तुशिल्प अवशेषों, कलाकृतियों, शिलालेखों, कला और मूर्तियों का विस्तृत अध्ययन किया गया है. इस अध्ययन के आधार पर ही ASI ने कहा है कि मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर के अवशेषों पर हुआ है. इससे स्पष्ट हो रहा है कि इस इलाके में पूर्व में हिंदू स्थलों का अपमान हुआ है.
#gyanwapi 32 ऐसी जगह हैं जो हिन्दू मंदिर के हिस्से थे. #Hindu मंदिर के सामान को मस्जिद बनाने में इस्तेमाल किया.देवनागरी, तेलगू, कन्नड़ 3 भाषाओं में जनार्दन लिखा मिला है.तहख़ाने में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली हैं- #ASI #GyanwapiBreakingNews pic.twitter.com/avwX4d9Qwe
— News & Features Network (@newsnetmzn) January 26, 2024
इस्लामी आक्रमणकारियों के द्वारा की गई अत्याचार
इस्लामी आक्रमणकारियों के द्वारा हिंदू मंदिरों के नष्ट का इतिहास भारत में लंबे समय से है. ग्यारहवीं सदी में होने वाले इस घटनाक्रम में हिंदू सामाजिक समृद्धि और सांस्कृतिक धरोहर का नुकसान हुआ. इससे समाज में असन्तोष उत्पन्न हुआ और विभिन्न सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हुईं.
इस विवाद से उत्तराधिकारिता का मुद्दा उभरा है और इसे लेकर समाज में विभाजन हो रहा है. हिंदू समुदाय इसे अपने सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों की हनन के रूप में देख रहा है, जबकि कुछ और समुदाय इसे सामाजिक एकता और सद्भाव की दृष्टि से देख रहे हैं.
इस विवाद ने फिर से भारतीय समाज को एक साजगार्ता के रूप में उठा दिया है, जहां सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक सद्भाव की साकारात्मक भावना को बनाए रखने के लिए सही समाधान ढूंढना होगा. इसमें सरकार, सामाजिक संगठन, और सभी समुदायों की सहभागिता की आवश्यकता है ताकि भारत में एक सद्भावपूर्ण और सामरिक समाज का निर्माण हो सके.

