अप्रितम सौंदर्य एवं अद्भुद जैव विविधता के लिए विख्यात Haiderpur wetland: बन रहा है विलुप्त होते पशु पक्षियों का घरौंदा
Haiderpur wetland।(Muzaffarnagar) गंगा-सोलानी का उथला क्षेत्र धीरे-धीरे अपने अप्रितम सौंदर्य एवं अद्भुद जैव विविधता के लिए विख्यात हो रहा है। ६ हजार हैक्टेअर से अधिक भू-भाग में फैले हैदरपुर वेटलैंड (Haiderpur wetland) के इस क्षेत्र में पक्षियों की ३२४ प्रजातियों की पहचान हो चुकी है।
जिनमें उन सभी प्रजातियों के पक्षी मौजूद हैं, जिन्हें देश की विलुप्त प्रायरू ३५ प्रजातियों की श्रेणी में रखा गया है। इन सहित अन्य प्रजातियों के पशु-पक्षियों के संरक्षण को हस्तिनापुर वन्य जीवअभ्यारण्य क्षेत्र में प्रयास शुरू हो चुके हैं। वेटलैंड में बारहसिंघा, ऊदबिलाऊ, घड़ियाल जैसे जानवरों की विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित किया जा रहा है।
स्म्यू बत्तख, इंडियन ग्राफ बर्ड और चाईनीज रूबी थ्रोट जैसे पक्षी हजारों मील का हवाई सफर तय कर यहां प्रवास करते हैं। यूरोप, मंगोलिया और दूसरे ठंडे क्षेत्र से आने वाले ये पक्षी गंगा-सोलानी के इस उथले इलाके की शान में चार चांद लगाते हैं।
अतिक्रमण और अशांति से दूर रखना होगा Haiderpur wetland
जीव वैज्ञानिकों के अनुसार जिस गति से हैदरपुर वेटलैंड (Haiderpur wetland) विकसित हुआ उन परिस्थितियों में उसे स्थापित रखने के लिए आवश्यक प्रयास जरूरी हैं। विश्व प्रसिद्ध बर्ड वाचर आशीष लोया विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कहते हैं कि इस क्षेत्र में देश की सभी ३५ विलुप्त प्रायः पक्षी प्रजातियां मौजूद हैं।
यदि इन्हें संरक्षित कर लिया गया तो समझो इन प्रजातियों के पक्षी हमेशा देश की धरोहर बने रहेंगे। इसके लिए जरूरी है कि हैदरपुर वेटलैंड में अतिक्रमण पर अंकुश लगाया जाए। इस क्षेत्र में शिकार पर न सिर्फ कागजों में पाबंदी हो बल्कि व्यवहार में लोग इसे पूरी तरह से निषेध कर दें। वन गुर्जरों का शिकार के लिए आवागमन पूरी तरह से निषेध कर दिया जाए।
किसी भी तरह की अशांति इस क्षेत्र में पशु और पक्षियों के प्रजनन में रुकावट पैदा करती है। आशीष लोया ने बताया कि निर्धारित शर्तों के साथ ही टूरिज्म का बढावा दिया जाए। क्योंकि इस क्षेत्र में कचरा बढने से न सिर्फ प्रदूषण बढ़ेगा बल्कि जंगल में गर्मियों के दिनों में आग लगने की संभावना भी अधिक हो जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वन
ग्राफिक एरा विश्वविद्याल के शोधार्थी आशीष आर्य का कहना है कि वन और पर्यावरण का गहरा नाता है। बारिश लाने में सहायक होने के साथ ही वन जीवन चक्र को नियमित गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आशीष आर्य का कहना है कि यदि प्रत्येक जीव का अपना महत्व है, यदि धरती या पर्यावरण से इंसानी गलती या अन्य कारणों से किसी जीव का अस्तित्व खत्म हो जाता है, तो उसका प्रभाव संपूर्ण मानस श्रंखला पर जरूर पड़ता है।
जिसका प्रभाव भले ही देर से हो लेकिन पड़ता जरूर है। आशीष ऐसे हालात में हस्तिनापुर वन्य क्षेत्र में तेजी से स्थापित हो रहे हैदरपुर वेटलैंड को प्रकृति की अमूल्य धरोहर मानते हैं। कहते हैं कि इस क्षेत्र के लोगों को प्रकृति ने यह तोहफा दिया है। इसे सहजने की आवश्यकता है।
मानसून की आमद के साथ हैदरपुर आएगा पपीहा
दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों ने हैदरपुर वेटलैंड को अपना घरौंदा बनाया है। जाड़ो के दिनों में यहां पहली बार स्म्यू बत्तख, इंडियन ग्राफ बर्ड और चाईनीज रूबी थ्रोट जैसे दुर्लभ पक्षी पहली बार दिखे। आशीष लोया के मुताबिक हैदरपुर वेटलैंड में गर्मियों का यह समय कइ पक्षियों के प्रजनन का है।
मानसून के साथ ही पपीहा यहां आता है, और प्रजनन कर क्षेत्र में अपनी प्रजाति के पक्षियों का अवागमन बढ़ाता है। विलुप्त प्रायरू होता बारहसिंघा, इंडियन ग्रास बर्ड, इंडियन स्कीमर तथा घड़ियाल यहां की शान बढ़ा रहे हैं। इनकी संख्या देश में तेजी से घट रही है।
४७वीं रामसर साइट घोषित हो चुका Haiderpur wetland
१९८४ में मुजफ्फरनगर-बिजनौर को जोड़ते हुए गंगा बैराज निर्माण के समय शायद ही किसी के दिमाग में ये बात आई हो कि एक दिन गंगा-सोलानी नदियों का यह उथला क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए इतना खास बन जाएगा। छह हजार हैक्टेअर से अधिक भू-भाग में फैले हैदरपुर वेटलैंड (Haiderpur wetland) को देश की ४७वीं रामसर साइट (अंतर्राष्ट्रीय साइट कंवेंशन के मापदंडो पर खरा क्षेत्र ) घोषित किया जा चुका है।
पेशे से इंजीनियर और प्रसिद्ध बर्ड वाचर आशीष लोया की कर्मभूमि बन चुका यह क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण के लिए किये गए उनके प्रयास की कहानी बयां कर रहा है।अभ्यारण्य क्षेत्र के विकास को गंभीररूः प्रो. नरेश मलिक-सीएम की अध्यक्षता वाले स्टेट बोर्ड फार वाइल्ड लाइफ के सदस्य एवं चौ. छोटूराम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. नरेश मलिक का कहना है कि वह हस्तिनापुर अभ्यारण्य क्षेत्र की जैव विविधता का अध्ययन कर रहे हैं।
उसी के आधार पर सीएम के साथ होने वाली अगली बैठक में रिपोर्ट रखेंगे। प्रो. नरेश मलिक ने बताया कि उनका प्रयास हैदरपुर वेटलैंड की जैव विविधता को कायम रखते हुए विलुप्त प्रायरू होती पशु पक्षियों की प्रजातियों को संरक्षण प्रदान कराना रहेगा। कहते हैं कि विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर वह ऐसा सोचते हैं कि अपनी जैव संपदा को कायम रखते हुए यदि संभव हो तो क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जाए।

