Hathras पेयजल घोटाला: घर-घर पानी पहुंचाने की योजना में 40.13 लाख हजम, गांव नगला भीम कलवारी में पाइप का नामोनिशान नहीं?
Hathras जिले में नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित पेयजल आपूर्ति योजना में करोड़ों की अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वार्ड-17 के नगला भीम कलवारी गांव में जिस परियोजना के लिए 40.13 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया, वहां ज़मीन पर एक इंच पाइप तक नहीं बिछी।
गांव वालों से जब इस योजना के बारे में पूछा गया, तो वे स्वयं यह सुनकर हैरान थे कि कोई पेयजल योजना भी चल रही थी। गांव में ना तो पाइपलाइन है, ना घरों में कनेक्शन, और ना ही पेयजल आपूर्ति से जुड़े किसी काम का कोई निशान।
यह पूरा मामला अब Hathras water scam के रूप में उभर रहा है, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गांव में कैमरे पर बोले निवासी—“ना पाइपलाइन, ना कनेक्शन, हमने खुद इंतजाम किया पानी का”
गांव नगला भीम कलवारी के स्थानीय निवासी सीधे शब्दों में अपनी नाराजगी और हैरानी व्यक्त करते दिखे।
निवासी 1, नगला भीम कलवारी—
“गांव में पानी की कोई पाइपलाइन नहीं डाली गई है। किसी भी घर में कनेक्शन नहीं किया गया है। लोग अपने स्तर पर पानी का इंतजाम करते हैं।”
निवासी 2—
“हम सबमर्सिबल पंप से या बाहर से टैंकर से पानी मंगाकर पीते हैं। यहां पाइपलाइन डालने या घरों में कनेक्शन देने जैसा कोई काम नहीं हुआ।”
गांव का हर कोना यह साबित कर रहा है कि पेयजल आपूर्ति परियोजना कागजों में भले ही ‘पूर्ण’ दिखाई गई हो, लेकिन जमीन पर वास्तविक काम ‘शून्य’ है।
15 जुलाई 2023 को निकला टेंडर, 5 अगस्त को आदेश—पर काम एक दिन भी नहीं शुरू हुआ
नगर पालिका परिषद हाथरस ने वर्ष 2022–23 में 12 पेयजल परियोजनाएं तैयार की थीं, जिनका कुल बजट 3.94 करोड़ रुपये था।
इन्हीं परियोजनाओं में से एक थी — नगला भीम कलवारी (वार्ड-17) की घर-घर पाइपलाइन और जल कनेक्शन योजना।
काम का टेंडर: 38.79 लाख रुपये
ठेका मिला निचली दर पर: 32.55 लाख रुपये
कंपनी: मैसर्स दुबे इंटरप्राइजेज
वर्क ऑर्डर जारी: 5 अगस्त 2023
आश्चर्य की बात यह है कि न तो पाइप बिछाया गया, न वॉल्व लगाए गए, न ही किसी घर में कनेक्शन किया गया, लेकिन परियोजना का भुगतान कागजों में लगभग पूरा दिखा दिया गया।
योजनाओं में यह विसंगति इस ओर संकेत करती है कि अधिकारियों और ठेकेदार द्वारा किए गए भुगतान और खर्चे गंभीर अनियमितताओं के दायरे में आते हैं।
ठेकेदार, जेई और अधिकारियों की मिलीभगत? पूरा गांव स्तब्ध, सबूतों के साथ खुल रही परतें
गांववासियों का कहना है कि न तो कोई सर्वे हुआ, न कोई रोड काटी गई, न पाइपलाइन डालने की कोशिश हुई। स्पष्ट है कि फील्ड निरीक्षण न तो किया गया और न ही किसी अधिकारी ने यह सुनिश्चित किया कि योजना वास्तव में लागू हो रही है या नहीं।
इस पूरे मामले में तीन प्रमुख सवाल सामने आए हैं —
बिना काम के भुगतान कैसे हो गया?
नगर पालिका ने निरीक्षण रिपोर्ट कैसे पास कर दी?
गांव में कोई कर्मचारी या मजदूर दिखाई क्यों नहीं दिए?
अब गांव के लोग खुलकर कह रहे हैं कि यह मामला Hathras water scam जैसा साफ उदाहरण है, जहां ठेकेदार और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये ग़ायब कर दिए गए।
ईओ का बयान—“जेई से फाइलें मंगाई जाएंगी, कमी मिली तो कार्रवाई होगी”
नगर पालिका परिषद हाथरस के ईओ ने कहा—
“क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के कार्य कराए गए हैं। नगला भीम कलवारी के मामले में संबंधित जेई से पत्रावली मंगाकर जांच की जाएगी। यदि कोई कमी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।”हालांकि ईओ के इस बयान ने मामले को शांत नहीं किया है, क्योंकि गांव में आज तक किसी भी प्रकार का काम दिखाई नहीं देता।
इससे बड़ा सवाल यह है कि आखिर योजना के नाम पर लाखों रुपये जारी कैसे हो गए?
डीएम अतुल वत्स का रुख कठोर—“पत्रावलियों की जांच होगी, अनियमितता मिली तो निश्चित कार्रवाई”
पूरा मामला डीएम तक पहुंच चुका है।
डीएम अतुल वत्स ने स्पष्ट कहा—“यह गंभीर मामला है। पत्रावलियों की जांच कराई जाएगी। यदि अनियमितता मिली तो निश्चित रूप से कार्रवाई होगी।”
डीएम के इस बयान से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि इस घोटाले में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी।
राज्य सेक्टर पेयजल योजना—जमीन स्तर पर लागू होने से पहले ही फाइलों में पूरी?
राज्य सरकार ग्रामीण और शहरी आबादी में घर-घर तक पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है। इन्हीं योजनाओं के अंतर्गत हर जिले में पाइपलाइन, टंकी, कनेक्शन और पंपिंग स्टेशन विकसित किए जाते हैं। लेकिन हाथरस की यह परियोजना दिखाती है कि सरकार की मंशा और फील्ड स्तर पर क्रियान्वयन में भारी अंतर है।
2022–23 की योजनाओं में नगर पालिका परिषद ने 12 परियोजनाओं की तैयारी की थी, परंतु नगला भीम कलवारी में एक रुपया का भी वास्तविक काम नहीं हुआ।
जमीनी हालात यह दर्शाते हैं कि यह पूरा मामला नियमों के विरुद्ध भुगतान की ओर संकेत करता है।
गांव में आक्रोश—पानी के लिए लोग खर्च कर रहे अपनी जेब से, सरकारी योजना कागजों में गायब
गांव के लोग या तो सबमर्सिबल का उपयोग करते हैं या टैंकर मंगाकर पानी पीते हैं।
हर परिवार प्रतिमाह पानी पर खर्च कर रहा है, जबकि कागजों में उनके घरों तक पेयजल पहुंच चुका है।
यह स्थिति ग्रामीणों को गुस्सा, हताशा और व्यंग्य से भर रही है—
“सरकारी योजना सिर्फ फाइलों में आई, लेकिन पाइप की एक लाइन तक नहीं आई।”
गांव में वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा धोखा है, जहां पूरे गांव के नाम पर लाखों रुपये की पेयजल योजना बिना काम के पूरी दिखा दी गई।
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