Hathras में बुजुर्ग दंपती का दर्द: ‘बहुएं समय पर रोटी नहीं देतीं’, उत्पीड़न से तंग आकर थाने पहुंचे पति-पत्नी
Hathras का एक भावुक मामला विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर सामने आया है। उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले 80 वर्षीय सुखराम और उनकी 70 वर्षीय पत्नी सावित्री देवी ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपने ही घर में उपेक्षा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
बुढ़ापे के इस पड़ाव में जहां उन्हें परिवार के सहयोग और देखभाल की आवश्यकता है, वहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी बहुएं उन्हें समय पर भोजन तक नहीं देतीं और मानसिक रूप से परेशान करती हैं। हालात से तंग आकर वृद्ध दंपती ने पुलिस की शरण ली है और न्याय की गुहार लगाई है।
विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर सामने आई दर्दभरी कहानी
हर वर्ष 15 जून को विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के साथ होने वाले शोषण, उपेक्षा और हिंसा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना है। इसी दिन हाथरस से सामने आया यह मामला समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सुखराम और सावित्री देवी की कहानी केवल एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि उन हजारों बुजुर्गों की स्थिति को भी दर्शाती है जो उम्र के अंतिम चरण में सम्मान और देखभाल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार दंपती लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं और अब उन्होंने अपनी परेशानी सार्वजनिक करते हुए प्रशासन से मदद की उम्मीद जताई है।
‘समय पर भोजन नहीं मिलता’, बुजुर्ग दंपती ने लगाए गंभीर आरोप
वृद्ध दंपती का आरोप है कि उन्हें नियमित रूप से भोजन नहीं दिया जाता। कई बार उन्हें समय पर खाना भी नसीब नहीं होता, जिससे उनका स्वास्थ्य लगातार प्रभावित हो रहा है।
उनका कहना है कि बुढ़ापे में शारीरिक कमजोरी पहले से ही कई परेशानियां लेकर आती है। ऐसे में यदि परिवार का सहयोग भी न मिले तो जीवन और अधिक कठिन हो जाता है।
सुखराम और सावित्री देवी ने पुलिस को बताया कि उन्हें घर में सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिलता और अक्सर उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि वे अब मानसिक रूप से भी बेहद परेशान हो चुके हैं।
सावित्री देवी की आंख की रोशनी पर भी पड़ा असर
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू सावित्री देवी की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो चुका था और उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता थी।
आरोप है कि उचित सहयोग न मिलने के कारण उन्हें स्वयं लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता था। खाना बनाते समय निकलने वाले धुएं का असर उनकी आंखों पर पड़ा, जिससे उनकी एक आंख की स्थिति और खराब हो गई।
परिवार के भीतर उत्पन्न इन परिस्थितियों ने उनके स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित किया है। यह स्थिति वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के महत्व को भी रेखांकित करती है।
शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप
Senior Citizen Harassment से जुड़े इस मामले में दंपती ने केवल उपेक्षा ही नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के भी आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि उन्हें बार-बार अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है। उम्र के इस पड़ाव में वे शांति और सम्मान से जीवन बिताना चाहते हैं, लेकिन घरेलू माहौल इसके विपरीत होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्गों के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना कई बार शारीरिक हिंसा से भी अधिक गंभीर प्रभाव छोड़ती है। लगातार अपमान, उपेक्षा और अकेलापन वरिष्ठ नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है।
पुलिस के पास पहुंची शिकायत, शुरू हुई जांच
दंपती की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों के अनुसार शिकायत के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस का प्रयास रहेगा कि दोनों पक्षों की बात सुनी जाए और मामले का निष्पक्ष समाधान निकाला जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की प्रताड़ना या कानूनी उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन भी मामले पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यह वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
बुजुर्गों के अधिकारों को लेकर क्या कहता है कानून?
भारत में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और देखभाल के लिए कई कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण से संबंधित कानून बुजुर्गों को अपने बच्चों और परिजनों से सहायता प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी बुजुर्ग को परिवार द्वारा जानबूझकर उपेक्षित किया जाता है या उसकी बुनियादी आवश्यकताओं की अनदेखी की जाती है, तो वह संबंधित अधिकारियों से सहायता मांग सकता है।
इसी उद्देश्य से विभिन्न राज्यों में वरिष्ठ नागरिक सहायता प्रकोष्ठ और हेल्पलाइन सेवाएं भी संचालित की जाती हैं।
बदलते सामाजिक परिवेश में बढ़ रही हैं ऐसी चुनौतियां
सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, आर्थिक दबाव और पारिवारिक संरचना में आए बदलावों के कारण कई बार बुजुर्गों को परिवार के भीतर उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
हालांकि अधिकांश परिवार अपने बुजुर्गों का सम्मान और देखभाल करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में सामने आने वाली घटनाएं चिंता का विषय बन जाती हैं। ऐसे मामलों में सामाजिक जागरूकता और पारिवारिक संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुजुर्गों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग, सम्मान और सुरक्षा की भी आवश्यकता होती है।
समाज के लिए एक गंभीर संदेश
हाथरस का यह मामला केवल एक घरेलू विवाद नहीं बल्कि समाज को आत्ममंथन का अवसर भी देता है। जिन माता-पिता ने अपने बच्चों का पालन-पोषण कर उन्हें जीवन में आगे बढ़ाया, उनके बुढ़ापे में सम्मान और देखभाल सुनिश्चित करना परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर सामने आई यह घटना वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनके सम्मानजनक जीवन के महत्व को फिर से रेखांकित करती है।









