Slovakia में गूंजा ‘वंदे मातरम्’, पीएम मोदी की ऐतिहासिक यात्रा से भारत-स्लोवाकिया रिश्तों को मिली नई ऊंचाई
PM Modi Slovakia Visit ने भारत और स्लोवाकिया के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया पहुंचने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। इस ऐतिहासिक दौरे ने न केवल दोनों देशों के राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत किया है, बल्कि सांस्कृतिक, तकनीकी, आर्थिक और रक्षा सहयोग के नए द्वार भी खोल दिए हैं।
फ्रांस की यात्रा के बाद स्लोवाकिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का राजधानी ब्रातिस्लावा में पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
ब्रातिस्लावा में पीएम मोदी का पारंपरिक स्वागत
ब्रातिस्लावा पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत स्लोवाकिया के विदेश एवं यूरोपीय मामलों के मंत्री Juraj Blanar ने किया।
स्लोवाक परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को ‘रोटी और नमक’ भेंट किया गया, जो वहां सम्मान, मित्रता और आतिथ्य का प्रतीक माना जाता है। इस स्वागत समारोह ने दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग की भावना को प्रदर्शित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए स्लोवाक नेतृत्व और वहां के भारतीय समुदाय का आभार व्यक्त किया।
भारत और स्लोवाकिया के रिश्तों को मिला ‘Comprehensive Partnership’ का दर्जा
India Slovakia Comprehensive Partnership इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रही।
स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री Robert Fico के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को “कम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप” यानी व्यापक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह निर्णय दोनों देशों के साझा विश्वास, साझा दृष्टिकोण और साझा भविष्य की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम आने वाले वर्षों में व्यापार, रक्षा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग का आधार बनेगा।
व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर
दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता में आर्थिक सहयोग प्रमुख एजेंडा रहा। भारत और स्लोवाकिया ने व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।
द्विपक्षीय चर्चाओं में निम्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया:
- व्यापार विस्तार
- ऑटोमोबाइल उद्योग
- रेलवे तकनीक
- डिजिटल नवाचार
- स्टार्टअप इकोसिस्टम
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
- उन्नत विनिर्माण तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप के औद्योगिक केंद्रों में से एक माने जाने वाले स्लोवाकिया के साथ बढ़ता सहयोग भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है।
रक्षा सहयोग में नई प्रगति
प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक बताया।
दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक Letter of Intent (LOI) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा उत्पादन, संयुक्त विकास और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अभियान को भी मजबूती दे सकता है।
AI और इनोवेशन में बढ़ेगा सहयोग
PM Modi Slovakia Visit के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि स्लोवाकिया की एक यूनिवर्सिटी में AI विषय पर “India Chair” स्थापित की जा रही है। इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि AI का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे मानवता, नैतिकता और जिम्मेदारी के मूल्यों के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
भारत-यूरोपीय संघ FTA पर स्लोवाकिया का समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने में स्लोवाकिया के सहयोग की सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ जल्द से जल्द इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। इससे उद्योग, निवेश, व्यापार और स्टार्टअप क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
यूएन सुरक्षा परिषद में भारत को मिला समर्थन
दौरे के दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन की बात दोहराई।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है।
यह समर्थन भारत की लंबे समय से चली आ रही उस मांग को बल देता है जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता का विस्तार शामिल है।
स्लोवाकिया में गूंजा ‘वंदे मातरम्’
इस यात्रा का सबसे भावनात्मक क्षण तब देखने को मिला जब प्रसिद्ध स्लोवाक सांस्कृतिक समूह Lucnica Ensemble ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया।
यह प्रस्तुति उस समय हुई जब भारत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे विशेष क्षण बताते हुए कहा कि यह भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का सुंदर उदाहरण है।
भारतीय समुदाय ने किया भव्य स्वागत
ब्रातिस्लावा में रह रहे भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री मोदी का उत्साहपूर्ण स्वागत किया।
‘मोदी-मोदी’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री ने भी समुदाय के लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दुनिया भर में भारत की संस्कृति, मूल्यों और क्षमताओं के सशक्त प्रतिनिधि हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम का किया स्वागत
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते का भी स्वागत किया।
उन्होंने इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
फ्रांस लौटकर जी-7 नेताओं से करेंगे मुलाकात
स्लोवाकिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी पुनः फ्रांस जाएंगे, जहां वह जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
इस दौरान उनकी कई वैश्विक नेताओं के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके अलावा वह यूरोप के प्रमुख टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप कार्यक्रम VivaTech 2026 में भी हिस्सा लेंगे।
भारत-स्लोवाकिया संबंधों को नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों को और करीब ला सकता है।
यूरोप में भारत की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी और स्लोवाकिया जैसे महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ गहरे होते संबंध वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।









