मुजफ्फरनगर में आईएमए से जुडे चिकित्सक रहे हड़ताल पर, केंद्र सरकार को भेजा ज्ञापन, फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग
मुजफ्फरनगर। मिक्सो पैथी के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में शामिल आई एम ए के बैनर तले चिकित्सकों ने डीएम कार्यालय पहुंच कर प्रधानमंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन सौपा। आई एम ए के आहवान पर की गई 12 घंटे की हडताल पर रहते हुए आईएमए हॉल मे खिचडी तंत्र पर विस्तृत चर्चा भी की गई।
मिक्सो पैथी के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत आई एम ए के अध्यक्ष डा.एम.एल.गर्ग के नेतृत्व मे आई एम के पदाधिकारियो ने कचहरी स्थित डीएम कार्यालय पहुंचे पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा।
जिसमें सरकार के खिचडी तंत्र के निर्णय को वापिस लिये जाने की मांग की गई। इस दौरान आईएमए अध्यक्ष डा.एम.एल.गर्ग के साथ आईएमए सचिव डा.अनुज माहेश्वरी, वरिष्ठ पदाधिकारी डा.अनिल कक्कड आदि मौजूद रहे।
आईएमए अध्यक्ष डा. एमएल गर्ग ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि पूर्व मे की गई घोषणा के आधार पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसके अर्न्तगत आई.एम.ए. से सम्बद्ध सभी चिकित्सक आज सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 12 घंटे की हडताल पर रहे। इस दौरान सभी गैर आपातकाली चिकित्सीय सुविधाएं बंद रही किसी भी आपातकालीन मरीज को कोई तकलीफ ना हो इसलिए आपातकालीन सेवाएं और कोविड-19 के लिए इलाज की सुविधा यथावत रही।
आई.एम.ए. के अध्यक्ष डा.एम.एल.गर्ग ने जारी प्रेस विज्ञप्ति मे बताया कि मिक्सो पैथी के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदश्रन मे आई एम ए का पूर्ण सहयोग है। डा.एम.एल.गर्ग ने बताया कि मिक्सो पैथी-खिचडी तंत्र- यानीएक पद्धति के चिकित्सक को दूसरी पद्धति के कार्य करने की अनुमति देना चिकित्सा के स्तर एवं उसकी गुणवत्ता को कम करना है।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सरकार ने सर्जरी की इजाजत तो दे दी है। लेकिन जिस विधि को सीखने में 10 से 12 साल लग जाते हैं वह कुछ महीनों की टै्रनिंग से कैसे सीखा जा सकता है।
आयुर्वेद में तो एनएसथीसिया की पढाई भी नही है तो बिना बेहोशी के वह सर्जरी कैसे करेंगे। कई बार मरीज की सर्जरी में कॉम्प्लिकेशन आ जाती है और उसे हायर सर्जरी के लिए रैफर भी करना पडता है उस समय यह चिकितसक उस केस को कैसे संभाल लेंगे या हायर सर्जरी कैसे कर पाएंगे। क्या ऐसे चिकित्सक चंद महीने की ट्रेनिंग के बाद मरीज के साथ पूरा इंसाफ कर पाएंगे।
आई एम ए अध्यक्ष डा.एम.एल.गर्ग का कहना है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हर विद्या को स्वतंत्र रूप से विकसित करने की पक्षधर है। उनका कहना है कि कोई भी पद्धति बुरी नही होती है अपने आप मे संपूर्ण व सही होती है।
सरकार को चाहिए के आयुष पद्धति को अलग से विकसित करे उसका विकास करे प्रोत्साहन दे परन्तु एलोपैथी में मिश्रित ना करे क्योंकि इस तरह तो ऐसे चिकित्सक किसी भी पैथी मे निपुण ही नही हो पाएंगे जिसका सीधा प्रभाव जन मानस के स्वास्थ्य पर पडेगा।
मॉर्डन चिकित्सा पूरी तरह से रिसर्च पर आधारित विद्या है, इसमें हर मर्ज का इलाज आधुनिक तरीके से किया जाता है। देश में इलाज के लिए कोई नयी दवा आनी हो, या बीमारी को रोकने के लिए वैक्सीन तैयार करनी हो
मॉडर्न चिकित्सा के रिसर्च से ही संभव पाता है। 1950 मे लाइफ एक्सपेक्टनसी 35 साल से 2020 में 09 साल हो गयी है,यह मॉर्डन चिकित्सा से से ही संभव हो सका है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सरकार से खिचडी तंत्र के निर्णय को वापस लेकर मॉर्डन मेडिसन और अन्य चिकित्सा तंत्रो को स्वतंत्र रूप से विकसित करने की मांग करती है।
