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India Uzbekistan Dustlik Military Exercise: ईरान संकट के बीच भारत की सामरिक चाल—सेंट्रल एशिया में ‘डस्टलिक’ अभ्यास से बढ़ी रणनीतिक ताकत

India Uzbekistan Dustlik Military Exercise: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बीच भारत ने सैन्य कूटनीति के मोर्चे पर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेंट्रल एशिया में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। इसी रणनीतिक पृष्ठभूमि में भारतीय सेना और उज्बेकिस्तान की सेना के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ का सातवां संस्करण शुरू हो गया है, जिसे क्षेत्रीय संतुलन और रक्षा सहयोग के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते दबाव के बीच यह अभ्यास भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा नीति और बहु-आयामी कूटनीतिक दृष्टिकोण का संकेत देता है।


नामंगन के गुरुमसराय प्रशिक्षण क्षेत्र में हुआ अभ्यास का औपचारिक शुभारंभ

उज्बेकिस्तान के नामंगन क्षेत्र स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ इस संयुक्त अभ्यास की शुरुआत हुई। दोनों देशों की सेनाओं के अधिकारी और जवान इसमें शामिल हुए और सैन्य सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य पर बल दिया गया।

यह अभ्यास 12 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें दोनों देशों की विशेष सैन्य इकाइयां संयुक्त अभियानों का प्रशिक्षण ले रही हैं।


संयुक्त विशेष अभियानों पर केंद्रित है अभ्यास का मुख्य फोकस

इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य संयुक्त विशेष अभियानों की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि अवैध सशस्त्र समूहों और उभरते सुरक्षा खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। इसमें सैनिकों को पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में अभियान चलाने की विशेष रणनीतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अभ्यास भविष्य के जटिल सुरक्षा परिदृश्यों से निपटने की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।


उज्बेकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में रणनीतिक महत्व पर चर्चा

उद्घाटन समारोह में उज्बेकिस्तान के पूर्वी सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल सईदोव ओयबेक अजादोविच मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास की रणनीतिक उपयोगिता और क्षेत्रीय स्थिरता में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

विशेष रूप से अर्ध-पहाड़ी इलाकों में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता विकसित करने को अभ्यास का केंद्रीय उद्देश्य बताया गया।


सामरिक कौशल, फिटनेस और संयुक्त योजना निर्माण पर दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

अभ्यास के दौरान सैनिकों को भूमि नेविगेशन, लक्ष्य आधारित स्ट्राइक मिशन, कब्जे वाले क्षेत्रों को मुक्त कराने की रणनीति और आधुनिक हथियार प्रणालियों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही संयुक्त योजना निर्माण और कमांड संरचना के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

इस प्रक्रिया के माध्यम से दोनों देशों की सेनाएं साझा संचालन प्रणाली विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही हैं।


भारतीय सैन्य कूटनीति का सेंट्रल एशिया में मजबूत संकेत

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस संयुक्त अभ्यास से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही सेंट्रल एशिया क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को भी नई मजबूती मिलेगी।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीतिक गतिविधियों के बीच इस सैन्य अभ्यास को भारत की संतुलित और दूरदर्शी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।


ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बना ‘डस्टलिक’ अभ्यास

इस अभ्यास के दौरान भारतीय सेना उज्बेकिस्तान की सैन्य कार्यप्रणाली को समझ रही है, वहीं अपने अनुभव और तकनीकी दक्षता भी साझा कर रही है। इससे दोनों देशों के बीच पेशेवर तालमेल और पारस्परिक विश्वास को मजबूती मिल रही है।

संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में बहुपक्षीय सैन्य सहयोग की संभावनाओं को भी मजबूत करता है।


वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता का संदेश

भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (ADGPI) के अनुसार यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे रक्षा सहयोग के नए आयाम खुलने की संभावना है और क्षेत्रीय स्थिरता को भी सकारात्मक संदेश जाता है।


ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के बीच शुरू हुआ ‘डस्टलिक’ सैन्य अभ्यास केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि सेंट्रल एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और रक्षा सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

 

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