Iran की Missile City का रहस्य: पहाड़ों के 500 मीटर नीचे छिपा भूमिगत सैन्य शहर, जहां से कभी भी हो सकता है जवाबी हमला
Shyama Charan Panwar
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iran, Iran Defense System, Iran Military Power, Iran Missile Base, Iran missile city, Middle East Military News, Underground Military BaseIran Missile City आज वैश्विक सैन्य रणनीति और सुरक्षा विश्लेषण में एक रहस्यमय और बेहद महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। जब दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश करती हैं, तब भी ईरान की असली ताकत जमीन के ऊपर नहीं बल्कि जमीन के सैकड़ों मीटर नीचे छिपी हुई सुरंगों में मौजूद मानी जाती है।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार ईरान ने पहाड़ों के नीचे एक विशाल भूमिगत मिसाइल नेटवर्क तैयार किया है, जिसे आम भाषा में “मिसाइल सिटी” कहा जाता है। यह कोई एक छोटा सैन्य अड्डा नहीं बल्कि हजारों किलोमीटर तक फैला हुआ ऐसा नेटवर्क है, जो एक विशाल भूलभुलैया जैसा दिखाई देता है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियों के बीच भी यह नेटवर्क लंबे समय से एक रहस्य बना हुआ है।
पहाड़ों के नीचे बना विशाल भूमिगत नेटवर्क
Iran Missile City की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक सुरंग या कमरे तक सीमित नहीं है। यह हजारों सुरंगों, कमरों, स्टोरेज क्षेत्रों और सैन्य गलियारों का एक जटिल जाल है।
ईरान ने इन ठिकानों का कोई आधिकारिक नक्शा सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए दुनिया के अधिकांश सैन्य विशेषज्ञ केवल सैटेलाइट तस्वीरों, लीक हुई वीडियो फुटेज और सैन्य विश्लेषण के आधार पर इसका अनुमान लगाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुरंगों का नेटवर्क इतना बड़ा है कि यह एक भूमिगत शहर जैसा दिखाई देता है। इनमें कई स्तरों पर सुरंगें बनाई गई हैं, जिनमें मिसाइलों का भंडारण, रखरखाव और लॉन्चिंग की व्यवस्था की गई है।
भुलभुलैया जैसी संरचना
इन सुरंगों को जानबूझकर भुलभुलैया जैसी संरचना में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि अगर कोई दुश्मन इन सुरंगों में घुस भी जाए, तो उसे यह पता न चल सके कि असली मिसाइल स्टोरेज कहां है।
हर सुरंग कई अन्य रास्तों से जुड़ी होती है और उनमें कई बंद कमरे और वैकल्पिक मार्ग भी बनाए गए हैं।
इस तरह की संरचना सैन्य दृष्टि से बेहद प्रभावी मानी जाती है क्योंकि इससे किसी एक हिस्से के नष्ट होने पर भी पूरा सिस्टम प्रभावित नहीं होता।
भूमिगत नेशनल हाईवे जैसा नेटवर्क
ईरान का दावा है कि उसकी मिसाइल सिटीज लगभग हर प्रांत में मौजूद हैं। यदि इन सभी को जोड़ दिया जाए तो यह एक विशाल भूमिगत नेशनल हाईवे नेटवर्क जैसा बन जाता है।
ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी वीडियो में देखा गया है कि इन सुरंगों की चौड़ाई इतनी अधिक है कि दो बड़े मिसाइल ट्रक आसानी से एक-दूसरे के पास से गुजर सकते हैं।
इन सुरंगों की ऊंचाई लगभग 30 से 50 फीट तक बताई जाती है ताकि विशाल बैलिस्टिक मिसाइलों को खड़ा रखा जा सके और उन्हें वर्टिकल पोजिशन में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सके।
इन सुरंगों में ट्रक, मिसाइल लॉन्चर और अन्य सैन्य वाहन आसानी से एक छोर से दूसरे छोर तक जा सकते हैं।
कहां-कहां हैं ईरान की मिसाइल सिटी
सैन्य विश्लेषण के अनुसार Iran Missile City कई रणनीतिक क्षेत्रों में बनाई गई हैं।
फारस की खाड़ी के तट पर पहाड़ों के नीचे लंबी सुरंगों का नेटवर्क मौजूद है। इन सुरंगों से समुद्र में मौजूद दुश्मन जहाजों को सीधे निशाना बनाया जा सकता है।
पश्चिमी ईरान के पहाड़ी क्षेत्रों में भी गहरी सुरंगें बनाई गई हैं। माना जाता है कि यहां से इजरायल जैसे दूरस्थ लक्ष्यों को निशाना बनाने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें रखी गई हैं।
मध्य ईरान के सेमनान और नतेंज क्षेत्र भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां जमीन के नीचे बने ठिकानों में मिसाइलों के साथ-साथ परमाणु कार्यक्रम से जुड़े रिसर्च सेंटर भी मौजूद बताए जाते हैं।
इन क्षेत्रों में कई वर्ग किलोमीटर में फैला भूमिगत ढांचा तैयार किया गया है।
कंपार्टमेंटलाइजेशन तकनीक से बनी संरचना
ईरान ने इन सुरंगों को कंपार्टमेंटलाइजेशन तकनीक के आधार पर तैयार किया है।
इसका मतलब है कि पूरा नेटवर्क कई अलग-अलग हिस्सों में विभाजित होता है। अगर किसी हमले में एक हिस्सा नष्ट हो जाए, तो बाकी हिस्से सुरक्षित रह सकते हैं।
यह तकनीक आधुनिक सैन्य इंजीनियरिंग में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इससे युद्ध के समय सैन्य संरचना पूरी तरह नष्ट नहीं होती।
एक आत्मनिर्भर सैन्य शहर
Iran Missile City केवल मिसाइल रखने की जगह नहीं बल्कि एक पूर्ण सैन्य शहर की तरह काम करती है।
इन भूमिगत शहरों में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद होती हैं:
मिसाइल असेंबली हॉल
ईंधन भंडारण केंद्र
सैनिकों के लिए बैरक
भोजनालय और मेस
मेडिकल सेंटर
कमांड और कंट्रोल रूम
युद्ध की स्थिति में इन ठिकानों से पूरी सैन्य कार्रवाई को नियंत्रित किया जा सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए तैयार किया गया है।
कितनी गहराई पर स्थित हैं ये शहर
विश्लेषकों के अनुसार कई Iran Missile City लगभग 500 मीटर की गहराई पर स्थित हैं।
इतनी गहराई इन्हें पारंपरिक बमों और कई शक्तिशाली बंकर-बस्टर हथियारों से भी सुरक्षित बना देती है।
ईरान इन्हें अपने रक्षा तंत्र का “लौह मुक्का” कहता है।
क्या सामान्य बम इन्हें नष्ट कर सकते हैं
साधारण बम इन सुरंगों के लिए लगभग बेअसर माने जाते हैं।
अमेरिका के पास मौजूद शक्तिशाली बंकर-बस्टर बम भी आमतौर पर लगभग 60 मीटर गहराई तक ही कंक्रीट या चट्टान को भेद सकते हैं।
लेकिन अगर कोई सुरंग 500 मीटर गहराई में है और उसके ऊपर पहाड़ की ठोस चट्टानें मौजूद हैं, तो उसे पूरी तरह नष्ट करना बेहद कठिन माना जाता है।
परमाणु बम का असर क्या हो सकता है
सैद्धांतिक रूप से यदि किसी पहाड़ के ठीक ऊपर परमाणु विस्फोट होता है, तो उसकी तीव्र गर्मी और दबाव पहाड़ के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है।
इससे सुरंगों के निकास द्वार बंद हो सकते हैं और अंदर मौजूद मिसाइल सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।
परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाली भूकंपीय तरंगें सुरंगों के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
हालांकि यदि सुरंगें अत्यधिक गहरी और शॉक-एब्जॉर्बिंग तकनीक से बनी हों, तो कई हिस्से सुरक्षित भी रह सकते हैं।
40 वर्षों की लंबी योजना का परिणाम
ईरान ने इन मिसाइल सिटीज को एक दिन में नहीं बनाया।
इस परियोजना की शुरुआत 1984 से 1988 के बीच ईरान-इराक युद्ध के दौरान हुई। उस समय इराक की वायुसेना ईरान के शहरों पर भारी बमबारी कर रही थी और ईरान के पास अपनी मिसाइलों को सुरक्षित रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं थी।
1984 में ईरान ने केरमानशाह क्षेत्र के पास अपना पहला भूमिगत मिसाइल बेस बनाया।
उस समय ये केवल साधारण सुरंगें थीं, जहां लीबिया और उत्तर कोरिया से लाई गई स्कड मिसाइलें छिपाई जाती थीं।
विदेशी तकनीक और इंजीनियरिंग का योगदान
युद्ध के बाद ईरान ने अपनी सिविल इंजीनियरिंग और माइनिंग तकनीकों को सैन्य निर्माण में इस्तेमाल करना शुरू किया।
कई विश्लेषकों का मानना है कि 1990 के दशक में उत्तर कोरिया ने ईरान को गहरी सुरंगों और मिसाइल साइलो बनाने की तकनीक साझा की थी।
इसके बाद पूरे ईरान में पहाड़ों के नीचे सुरंगों का विशाल नेटवर्क बनाना शुरू हुआ।
2015 में पहली बार दुनिया को दिखी मिसाइल सिटी
2015 में ईरान ने पहली बार दुनिया को अपनी एक मिसाइल सिटी का वीडियो दिखाया।
वीडियो में देखा गया कि सुरंगों के अंदर बड़ी संख्या में मिसाइलें खड़ी थीं और सैन्य वाहन उनमें घूम रहे थे। इस वीडियो ने दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों को हैरान कर दिया।
स्मार्ट तकनीक से लैस हो चुकी हैं सुरंगें
पिछले एक दशक में ईरान ने इन सुरंगों को और आधुनिक बना दिया है।
अब कई ठिकानों में मिसाइलों को रोबोटिक रेल सिस्टम और स्वचालित मैगजीन प्लेटफॉर्म पर रखा जाता है। इससे मिसाइलों को तेजी से लॉन्च पोजिशन में लाया जा सकता है।
हाल के संघर्षों के बाद तेज हुआ निर्माण
2025 में इजरायल के साथ हुए 12 दिनों के संघर्ष के बाद ईरान ने अपने भूमिगत नेटवर्क को और मजबूत करने का काम तेज कर दिया।
नई सुरंगों का निर्माण, अतिरिक्त गुप्त निकास द्वार और गहरी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं।
इन परियोजनाओं को अत्यधिक गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जाता है। अक्सर सुरंगों की खुदाई से निकली मिट्टी को रात के समय दूर ले जाकर छिपाया जाता है, ताकि सैटेलाइट से निर्माण गतिविधियों का पता न चल सके।

