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Japan में भालुओं का कहर: सेना की तैनाती, स्कूल बंद, सुपरमार्केट तक पहुंचा आतंक

Japan के उत्तरी हिस्सों में भालुओं का आतंक अब चरम पर पहुंच गया है। बुधवार को सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज (SDF) यानी जापानी सेना को भालुओं को पकड़ने के मिशन में लगाया है। यह निर्णय तब लिया गया जब अप्रैल से अब तक देशभर में 100 से अधिक हमलों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है.


सबसे अधिक मौतें अकिता प्रांत और पड़ोसी इवाते शहर में दर्ज की गई हैं, जहां भालू अब खुलेआम सड़कों, स्कूलों और सुपरमार्केट्स तक पहुंच चुके हैं।


अकिता में भालुओं की मौजूदगी छह गुना बढ़ी, जंगलों से शहरों की ओर रूख

जापान के अकिता प्रांत में इस साल भालू दिखने की घटनाएं 6 गुना बढ़कर 8,000 से अधिक हो गई हैं। यह आंकड़ा अपने आप में इस संकट की भयावहता बताता है।
जहां पहले भालू केवल पहाड़ी इलाकों तक सीमित रहते थे, अब वे भोजन की तलाश में शहरों और कस्बों की सड़कों पर घूमते दिख रहे हैं।
भालुओं के झुंड अब रिज़ॉर्ट्स, बस स्टॉप, स्कूल कैंपस और बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि गवर्नर ने स्थिति बेकाबू होते ही SDF की मदद मांगी।बुधवार को SDF के जवान काज़ुनो शहर में पहुंचे और भालू पकड़ने के लिए स्टील के जाल लगाने का काम शुरू किया।


भालुओं के शिकार का जिम्मा ट्रेंड हंटर्स को सौंपा गया

सेना जहां सुरक्षा और पकड़ने का काम कर रही है, वहीं भालू मारने का जिम्मा ट्रेंड शिकारियों को सौंपा गया है।
स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से कहा है कि वे घरों के बाहर घंटियां या साउंड अलार्म रखें ताकि भालू तेज आवाज से डरकर भाग जाएं।
हालांकि, लोगों का कहना है कि अब भालू पहले जैसे नहीं रहे—वे डरने के बजाय इंसानों की ओर आते हैं।


काज़ुनो में दहशत का माहौल, लोग घरों में कैद

काज़ुनो शहर के 30,000 निवासी भय और चिंता में जी रहे हैं।
शहर के मेयर शिंजी सासामोतो ने बताया कि कई स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, “डर का माहौल ऐसा है कि लोग अब शाम होते ही घरों में बंद हो जाते हैं। सेना की तैनाती लोगों में कुछ राहत का कारण बनी है, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ।”

सेना नवंबर के अंत तक काज़ुनो, ओडेट और किताअकिता शहरों में भी सक्रिय रहेगी।
इन शहरों में लगातार भालुओं के देखे जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं।


भालू अब सुपरमार्केट और स्कूलों तक पहुंच गए

पिछले कुछ हफ्तों में भालुओं के हमले सार्वजनिक स्थानों तक फैल चुके हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ भालू स्कूल परिसरों में घुस आए, जिससे छात्रों और शिक्षकों को इमारतों में छिपना पड़ा।
इसी तरह, सुपरमार्केट्स और बस स्टॉप्स के बाहर भी भालू घूमते देखे गए हैं।
कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर लोहे के दरवाजे और सायरन सिस्टम लगाना शुरू कर दिया है।


पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट: जंगलों में भोजन की कमी ने बढ़ाई समस्या

जापान के पर्यावरण मंत्रालय ने इस संकट की जड़ जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई को बताया है।
पहाड़ी इलाकों में जंगल घटने से भालुओं को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा, जिससे वे शहरी इलाकों की ओर पलायन कर रहे हैं।
अक्टूबर-नवंबर के महीनों में, जब भालू हाइबरनेशन से पहले भोजन जमा करते हैं, तब हमलों की घटनाएं चरम पर होती हैं।


जापान में पाई जाने वाली दो प्रमुख भालू प्रजातियां

  1. एशियन ब्लैक बियर (Asian Black Bear) – इनका वजन लगभग 130 किलो तक होता है।

  2. होक्काइडो ब्राउन बियर (Hokkaido Brown Bear) – ये अधिक खतरनाक माने जाते हैं और 400 किलो तक वजनी हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों ही प्रजातियां मनुष्यों से टकराव से बचती हैं, लेकिन भूख और संसाधनों की कमी उन्हें शहरों की ओर खींच लाई है।


सरकार ने नियमों में ढील दी, कार्रवाई तेज

जापान सरकार ने भालू नियंत्रण नियमों में ढील दी है ताकि सुरक्षा बल त्वरित कार्रवाई कर सकें।
डिप्टी चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी केई सातो ने कहा,
“भालू अब रोज़ आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं और हमलों की संख्या बढ़ रही है।
हमें नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।”

उन्होंने यह भी बताया कि SDF की सहायता से भालू ट्रैकिंग, ट्रैपिंग और सुरक्षित रिलोकेशन का कार्य जारी है।


लोगों को चेतावनी: जंगलों से दूरी बनाए रखें

स्थानीय प्रशासन ने निवासियों से अपील की है कि वे जंगलों या घने इलाकों की ओर न जाएं।
लोगों को सलाह दी गई है कि वे रात में घर से बाहर न निकलें, अपने घरों के आसपास लाइट और सायरन सिस्टम लगाएं,
और तेज आवाज वाले उपकरणों का प्रयोग करें ताकि भालू दूर रहें।
जंगलों से सटे गांवों में अब पोस्टर और चेतावनी संकेत लगाए जा रहे हैं।


पहले भी जंगली जानवरों को नियंत्रित करने में ली गई थी सेना की मदद

यह पहली बार नहीं है जब जापान ने जंगली जानवरों पर नियंत्रण के लिए सेना को तैनात किया हो।
करीब एक दशक पहले भी हिरणों की आबादी नियंत्रण के लिए सैनिकों की मदद ली गई थी।
1960 के दशक में सी-लायन (समुद्री शेर) को मछली पालन के नुकसान से बचाने के लिए सेना ने कार्रवाई की थी।
अब भालुओं के बढ़ते खतरे ने सरकार को फिर से सैन्य बलों पर निर्भर होने को मजबूर किया है।


लोगों का डर: “अब भालू इंसानों से नहीं डरते”

काज़ुनो और अकिता के लोगों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहले भालू शोर या इंसानों को देखकर भाग जाते थे,
लेकिन अब वे सीधे हमला कर देते हैं
एक स्थानीय नागरिक ने बताया, “अब भालू इंसानों को देखकर भागते नहीं, बल्कि पास आते हैं। यह बहुत डरावना है।”
इस बदलाव के पीछे विशेषज्ञ क्लाइमेट चेंज और फूड इनसिक्योरिटी को जिम्मेदार मान रहे हैं।


सरकार की दीर्घकालिक योजना: शिक्षा, सुरक्षा और पर्यावरण सुधार

सरकार अब इस समस्या को केवल तत्काल संकट नहीं, बल्कि लंबी अवधि की पर्यावरणीय चुनौती के रूप में देख रही है। शिक्षा विभाग ने ग्रामीण और शहरी स्कूलों में ‘वाइल्डलाइफ सेफ्टी प्रोग्राम’ शुरू करने की घोषणा की है।साथ ही, पर्यावरण मंत्रालय जंगलों में फलों के पेड़ लगाने और भोजन उपलब्ध कराने के प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा है ताकिभालू फिर से अपने प्राकृतिक आवासों में लौटें और मनुष्यों से टकराव कम हो।


जापान में भालुओं के हमले अब केवल पर्यावरण या वन्यजीव समस्या नहीं रहे — यह एक सामाजिक और सुरक्षा संकट बन चुका है। सेना की तैनाती और प्रशासनिक सतर्कता से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन असली समाधान तभी मिलेगा जब इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन बहाल किया जाए। भालुओं का आतंक फिलहाल थमा नहीं है, और आने वाले हफ्ते जापान की वन्यजीव नीतियों की बड़ी परीक्षा साबित होंगे।

 

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