Kalki Dhamभगवान कल्कि के अवतार के बारे में बात करते समय, संभल जिले में बन रहे कल्कि धाम मंदिर का भी जिक्र करना जरूरी है। कल्कि धाम मंदिर भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला है, क्योंकि यहां के विशाल मंदिर के माध्यम से हमें भगवान के अवतार लेने की प्रतीति मिलती है।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण भव्य और आध्यात्मिक माहौल में किया जा रहा है। इस मंदिर की ऊंचाई 108 फीट होने जा रही है और इसके शिखर के ऊपर 11 फीट का चबूतरा बनाया जा रहा है। मंदिर के निर्माण में सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर के निर्माण में प्रयुक्त पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जो की इसे और भी महत्वपूर्ण बना देता है।
कल्कि भगवान विष्णु के दसवें अवतार के रूप में माने जाते हैं। हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार, कलियुग के अंत में भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे और कलियुग का अंत करेंगे। कल्कि धाम के प्राचीन मंदिर के पास कल्कि पीठ में एक सफेद घोड़े की प्रतीमा भी लगी हुई है, जिसकी मान्यता है कि जब कल्कि अवतार लेंगे, तो वह सफेद घोड़े पर सवार होंगे।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण इंटरलॉकिंग पद्धति पर किया जा रहा है, जो कि भारतीय मंदिर निर्माण की प्राचीन शैली है। मंदिर में 10 गर्भगृहों का निर्माण किया जा रहा है, जो कि भगवान विष्णु के 10 अवतारों को दर्शाएंगे। इसके अलावा, मंदिर में 68 तीर्थों की भी स्थापना होगी और एक विग्रह भी स्थापित होगा, जिससे भगवान कल्कि की पूजा की जा सकेगी।
पीएम मोदी ने संभल में श्री कल्कि धाम मंदिर का शिलान्यास किया। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आचार्य प्रमोद कृष्णम भी मौजूद रहे।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण पूरा होने की समय-सीमा अगले पांच वर्षों तक तय की गई है, जिसके बाद भव्य मंदिर में श्रद्धालु आ सकेंगे। यह मंदिर भगवान के अवतार लेने की महानता और भगवान के भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक स्थान के रूप में महत्वपूर्ण होगा।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण भव्य और आध्यात्मिक माहौल में किया जा रहा है। इस मंदिर की ऊंचाई 108 फीट होने जा रही है और इसके शिखर के ऊपर 11 फीट का चबूतरा बनाया जा रहा है। मंदिर के निर्माण में सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर के निर्माण में प्रयुक्त पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है, जो की इसे और भी महत्वपूर्ण बना देता है।
कल्कि भगवान विष्णु के दसवें अवतार के रूप में माने जाते हैं। हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार, कलियुग के अंत में भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे और कलियुग का अंत करेंगे। कल्कि धाम के प्राचीन मंदिर के पास कल्कि पीठ में एक सफेद घोड़े की प्रतीमा भी लगी हुई है, जिसकी मान्यता है कि जब कल्कि अवतार लेंगे, तो वह सफेद घोड़े पर सवार होंगे।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण इंटरलॉकिंग पद्धति पर किया जा रहा है, जो कि भारतीय मंदिर निर्माण की प्राचीन शैली है। मंदिर में 10 गर्भगृहों का निर्माण किया जा रहा है, जो कि भगवान विष्णु के 10 अवतारों को दर्शाएंगे। इसके अलावा, मंदिर में 68 तीर्थों की भी स्थापना होगी और एक विग्रह भी स्थापित होगा, जिससे भगवान कल्कि की पूजा की जा सकेगी।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण पूरा होने की समय-सीमा अगले पांच वर्षों तक तय की गई है, जिसके बाद भव्य मंदिर में श्रद्धालु आ सकेंगे। यह मंदिर भगवान के अवतार लेने की महानता और भगवान के भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक स्थान के रूप में महत्वपूर्ण होगा।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण भव्य और आध्यात्मिक महत्व के साथ हो रहा है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित होगा, जो कलियुग के अंत में भगवान कल्कि के जन्म स्थल के रूप में माना जाता है। मंदिर का निर्माण उन पत्थरों से किया जा रहा है जो सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर के निर्माण में प्रयुक्त हुए थे, जिससे इसे और भी प्राचीनतम और महत्वपूर्ण बना देता है।
इस मंदिर के निर्माण में कोई भी लोहा या स्टील नहीं लगाया जा रहा है, बल्कि इंटरलॉकिंग पद्धति पर आधारित निर्माण किया जा रहा है। इससे मंदिर का भव्य रूप बनाए रखने के साथ-साथ भारतीय स्थापत्यकला की प्राचीन शैली को भी महसूस किया जा सकेगा। मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद इसमें भगवान विष्णु के दस अवतारों के लिए गर्भगृह बनाए जाएंगे, जो की अलग-अलग प्रकार के शिल्पकला से सजे होंगे।
कल्कि धाम मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया जा रहा है कि यह आने वाले समय में भगवान के भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में भी महत्वपूर्ण बने। इसके निर्माण के पीछे भगवान कल्कि के अवतार की महत्वपूर्णता और धर्म के महत्व को और भी अधिक उजागर किया जा रहा है।
संभल में कल्किधाम का शिलान्यास:
उत्तर प्रदेश के संभल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्कि धाम का शिलान्यास (19 Feb 2024) किया है. उन्होंने इस दौरान कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम की जमकर तारीफ की है. इस पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी पीएम मोदी की प्रशंसा की है. उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी जैसा दूसरा आज तक नहीं हुआ है. न भूतो न भविष्यती.
प्रमोद कृष्णम ने कहा, ”आज जिस श्रद्धा भाव से प्रधानमंत्री ने श्री कल्कि धाम की भूमि को नमन किया है. मेरा मानना है कि न तो अतीत में कोई था और न ही भविष्य में नरेंद्र मोदी जैसा कोई दूसरा पीएम हो सकता है.” आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह हमारे देश और ‘सनातन धर्म’ के लिए गर्व का क्षण है.’ एबीपी न्यूज से बात करते हुए प्रमोद कृष्णम ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए बहुत ही भावुक दिन है. आज पूरे सनातन और विश्व के लिए गौरव का दिन है. युगों-युगों तक धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में पीएम मोदी का नाम लिखा जाएगा.
अयोध्या के बाद कल्किधाम के शिलान्यास पर प्रमोद कृष्णम ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम का मंदिर बना. संभल में कल्कि धाम का मंदिर बनेगा. पीएम मोदी सतयुग से कलयुग के सेतु बने हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी 19 फरवरी को श्री कल्कि धाम मंदिर की आधारशिला रखी है. इस दौरान पीएम ने पूर्व कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम की तारीफ भी की. जिसके बाद मंच से ही आचार्य प्रमोद कृष्णम ने हाथ जोड़कर पीएम का अभिवादन किया.
पीएम मोदी ने आचार्य प्रमोद कृष्णम की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘मैं प्रमोद कृष्णम को एक राजनैतिक व्यक्ति के रूप में दूर से जानता था लेकिन जब कुछ दिन पहले उनसे मुलाकात हुई तो पता चला कि वे ऐसे धार्मिक-अध्यात्मिक कार्यों में कितनी मेहनत से लगे रहते हैं. कल्कि मंदिर के लिए इन्हें पहले की सरकारों के समय लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी, कोर्ट के चक्कर भी लगाने पड़े. आज हमारी सरकार में वे निश्चिंत होकर इस काम को शुरू कर पाए हैं.’
Religious Desk
हमारे धार्मिक सामग्री संपादक धर्म, ज्योतिष और वास्तु के गूढ़ रहस्यों को सरल और स्पष्ट भाषा में जनमानस तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। वे धार्मिक ग्रंथों, आध्यात्मिक सिद्धांतों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित लेखन में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य समाज में सकारात्मकता फैलाना और लोगों को आध्यात्मिकता के प्रति जागरूक करना है। वे पाठकों को धर्म के विविध पहलुओं के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए समर्पित हैं, ताकि सभी लोग अपने जीवन में मूल्य और आस्था का समावेश कर सकें।