Kanpur: यूपी पुलिस आवास निगम के अवर अभियंता पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज, भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बड़ी कार्रवाई
Kanpur Disproportionate Assets Case में भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) ने उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम के एक अवर अभियंता (सिविल) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। संगठन ने जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि जांच अवधि के दौरान उन्होंने अपनी ज्ञात वैध आय की तुलना में 39.48 लाख रुपये अधिक खर्च और संपत्ति अर्जित की, जो उनकी घोषित आय से लगभग 28.65 प्रतिशत अधिक पाई गई।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी करने के बाद मामला दर्ज किया गया है। अब आगे की विवेचना के दौरान संबंधित दस्तावेजों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की जाएगी।
किस अधिकारी के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर?
एफआईआर उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम में तैनात अवर अभियंता (सिविल) जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज की गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह मूल रूप से ग्राम लहटोरिया, थाना बिधूना, जनपद औरैया के निवासी हैं। वर्तमान में उनका पता शिवनगर, नवीननगर, काकादेव, कानपुर बताया गया है।
मामले की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन, लखनऊ इकाई द्वारा की गई।
जांच में क्या सामने आया?
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के निरीक्षक एवं जांच अधिकारी जटाशंकर सिंह के अनुसार, निर्धारित जांच अवधि के दौरान आरोपी अधिकारी की कुल ज्ञात वैध आय 1,37,80,469 रुपये आंकी गई।
इसी अवधि में उनके द्वारा—
- संपत्तियों के अधिग्रहण,
- पारिवारिक भरण-पोषण,
- अन्य व्यक्तिगत एवं वित्तीय मदों
पर कुल 1,77,28,720 रुपये खर्च किए जाने का विवरण सामने आया।
दोनों आंकड़ों की तुलना करने पर 39,48,251 रुपये (लगभग 39.48 लाख रुपये) का अंतर पाया गया, जिसे जांच एजेंसी ने ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक बताया है।
आय से 28.65 प्रतिशत अधिक मिली संपत्ति और खर्च
जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपी अधिकारी के व्यय और अर्जित परिसंपत्तियां उनकी वैध आय से लगभग 28.65 प्रतिशत अधिक पाई गईं।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में इस अतिरिक्त संपत्ति और खर्च का संतोषजनक वैध स्रोत सामने नहीं आया, जिसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
हालांकि, यह जांच एजेंसी के आरोप हैं और इनका अंतिम निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों तथा सुनवाई के आधार पर होगा।
कैसे हुई जांच?
भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने जांच के दौरान अधिकारी की आय और व्यय से जुड़े विभिन्न वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया।
जांच में मुख्य रूप से निम्न पहलुओं का मूल्यांकन किया गया—
- वेतन एवं अन्य वैध आय
- अचल एवं चल संपत्तियों का अधिग्रहण
- पारिवारिक खर्च
- बैंकिंग एवं वित्तीय लेनदेन
- अन्य निवेश और परिसंपत्तियां
इन्हीं तथ्यों के आधार पर कथित आय और व्यय के बीच अंतर का आकलन किया गया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे क्या होगा?
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब विवेचना के अगले चरण में जांच एजेंसी—
- संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत जांच करेगी,
- संपत्तियों के स्वामित्व और मूल्यांकन का सत्यापन करेगी,
- बैंक खातों एवं अन्य निवेश संबंधी अभिलेखों का परीक्षण करेगी,
- आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कैसे होती है कार्रवाई?
आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के मामलों में जांच एजेंसियां किसी लोकसेवक की वैध आय की तुलना उसके खर्च, निवेश और अर्जित संपत्तियों से करती हैं।
यदि जांच के दौरान ऐसा अंतर सामने आता है, जिसका संतोषजनक वैध स्रोत उपलब्ध नहीं होता, तो संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत विवेचना की जाती है। इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से आरोपों की पुष्टि या खंडन होता है।
मामले में जांच जारी
भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विस्तृत विवेचना जारी रहेगी।
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया जाता, तब तक आरोपी को कानूनन दोषी नहीं माना जाता। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच और न्यायिक परीक्षण के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

