Kim Jong Un का परमाणु शक्ति पर बड़ा ऐलान: अमेरिका-इजराइल हमलों के बीच उत्तर कोरिया ने दी दुनिया को सख्त चेतावनी
News-Desk
7 min read
kim jong un, अमेरिका, इजराइल, ईरान युद्ध, उत्तर कोरिया रक्षा नीति, एशिया सुरक्षा संकट, किम जोंग उन, ट्रम्प किम वार्ता, नॉर्थ कोरिया, परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल, वैश्विक राजनीति, साउथ कोरिया, ह्वासोंग मिसाइलउत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर Kim Jong Un का हालिया बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। संसद में दिए गए अपने विस्तृत भाषण में किम ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों ने यह साबित कर दिया है कि परमाणु हथियार किसी भी देश की सुरक्षा के लिए सबसे मजबूत गारंटी हैं। इस बयान ने न केवल कोरियाई प्रायद्वीप बल्कि पूरे विश्व में रणनीतिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
सरकारी मीडिया के जरिए जारी उनके इस संदेश में उत्तर कोरिया की भविष्य की सैन्य नीति, दक्षिण कोरिया के प्रति कड़ा रुख और अमेरिका के साथ संभावित वार्ता की शर्तों को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए गए। किम का यह भाषण उस समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज है और वैश्विक शक्ति संतुलन लगातार बदल रहा है।
परमाणु ताकत को बताया राष्ट्रीय सुरक्षा की ढाल
संसद में दिए गए अपने संबोधन के दौरान किम जोंग उन ने स्पष्ट कहा कि आधुनिक दुनिया में केवल मजबूत सैन्य शक्ति ही किसी राष्ट्र की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन देशों के पास मजबूत परमाणु क्षमता नहीं होती, वे बाहरी दबावों के सामने असुरक्षित हो जाते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु हथियार विकसित करने का फैसला पूरी तरह सही था और यह देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम था। किम के अनुसार, यदि उत्तर कोरिया ने यह रास्ता नहीं चुना होता तो आज उसकी स्थिति भी कई अन्य कमजोर देशों जैसी हो सकती थी।
और ज्यादा परमाणु हथियार बनाने का संकेत
अपने भाषण में किम जोंग उन ने भविष्य की सैन्य रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया आने वाले समय में अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें ले जाने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियों को भी मजबूत करेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि परमाणु क्षमता मजबूत होने के कारण अब देश अपने संसाधनों को आर्थिक विकास की दिशा में भी इस्तेमाल कर पा रहा है। उनका कहना था कि सैन्य सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही कोई राष्ट्र स्थिर आर्थिक प्रगति कर सकता है।
दक्षिण कोरिया को ‘सबसे बड़ा दुश्मन’ घोषित करने का संकेत
किम जोंग उन ने अपने भाषण में दक्षिण कोरिया के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया अब दक्षिण कोरिया को एक शत्रु राष्ट्र के रूप में देखेगा और उसके साथ किसी भी प्रकार के सहयोग या संवाद को सीमित किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दक्षिण कोरिया की ओर से कोई भी ऐसा कदम उठाया जाता है जिससे उत्तर कोरिया की सुरक्षा को खतरा हो, तो उसका कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। इस बयान ने कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने की आशंका को और गहरा कर दिया है।
अमेरिका से बातचीत पर रखी नई शर्त
किम जोंग उन ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि बातचीत तभी संभव है जब अमेरिका आधिकारिक रूप से उत्तर कोरिया को परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में मान्यता दे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब व्हाइट हाउस में दोबारा सत्ता में आने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने किम के साथ संवाद फिर शुरू करने की इच्छा जताई थी। हालांकि किम के इस रुख से संकेत मिलता है कि भविष्य की वार्ताएं आसान नहीं होने वाली हैं।
2019 में टूटी बातचीत को बताया सही मोड़
किम जोंग उन ने 2019 में अमेरिका के साथ हुई वार्ता के टूटने को भी सही फैसला बताया। उन्होंने कहा कि उस समय परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय उत्तर कोरिया की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी था।
उन्होंने याद दिलाया कि सिंगापुर में 2018 में हुई पहली ऐतिहासिक मुलाकात के बाद उम्मीदें बढ़ी थीं, लेकिन फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक के दौरान दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद उत्तर कोरिया ने अपनी रणनीति बदलते हुए सैन्य क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।
लीबिया और इराक का उदाहरण देकर दिया संदेश
उत्तर कोरिया लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि यदि लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन के पास परमाणु हथियार होते, तो उनका अंत इस तरह नहीं होता। किम ने अपने हालिया बयान में भी इसी सोच को दोहराया।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि परमाणु शक्ति किसी भी देश के अस्तित्व की गारंटी बन सकती है। यही कारण है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमता पर बढ़ी वैश्विक चिंता
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश के पास शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा भंडार मौजूद है।
ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण इस बात का संकेत है कि उत्तर कोरिया अब अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर चुका है। इन मिसाइलों की अनुमानित रेंज 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक बताई जाती है।
कितनी मजबूत है उत्तर कोरिया की परमाणु ताकत
हालांकि उत्तर कोरिया के पास मौजूद परमाणु हथियारों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश के पास 50 से 100 तक ऐसे हथियार हो सकते हैं जिन्हें मिसाइलों के जरिए ले जाया जा सकता है।
इसके अलावा सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार उत्तर कोरिया को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करता है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार इस कार्यक्रम को रोकने की कोशिश करते रहे हैं।
पश्चिम एशिया के संघर्ष का असर कोरियाई रणनीति पर
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा है। इसका प्रभाव पूर्वी एशिया की सुरक्षा नीति पर भी दिखाई देने लगा है।
किम जोंग उन ने अपने भाषण में साफ संकेत दिया कि इन घटनाओं ने उत्तर कोरिया की रणनीतिक सोच को और मजबूत किया है। उनका मानना है कि वैश्विक संघर्षों के इस दौर में सैन्य ताकत ही किसी देश की असली सुरक्षा गारंटी बन सकती है।
वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के इस नए रुख से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका पहले ही इस मुद्दे पर सतर्क नजर बनाए हुए हैं।
यदि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज करता है, तो क्षेत्र में हथियारों की दौड़ बढ़ने की आशंका भी बढ़ सकती है। इससे आने वाले समय में कूटनीतिक तनाव और सैन्य गतिविधियों में वृद्धि देखी जा सकती है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सैन्य मजबूती की रणनीति
किम जोंग उन ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उत्तर कोरिया अब आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। उनका मानना है कि मजबूत रक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु क्षमता मजबूत होने से देश को बाहरी दबावों से राहत मिली है और अब विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना आसान हो गया है।

